भास्कर न्यूज | जालंधर शिव राम कला मंच (रजि.) श्रीराम लीला कमेटी मॉडल हाउस की ओर से दशहरा ग्राउंड मॉडल हाउस में चल रही रामलीला के छठे दिन प्रभु श्रीराम और माता शबरी के मिलन तथा बाली वध के सजीव प्रसंगों का मंचन किया गया। सुहावने मौसम के बीच रामलीला देखने पहुंचे भगत जनों ने देर रात तक मंचन का आनंद लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ कंवलजीत सिंह लवली और विशाल गुलाटी ने दीप प्रज्वलित कर किया। नाइट के शुभारंभ अवसर पर विशाल गुलाटी ने कहा कि माता शबरी भले ही भीलनी थीं, लेकिन प्रभु श्रीराम सबसे पहले उनकी कुटिया में पहुंचे। भगवान को पाने के लिए वेद पढ़ने की जरूरत नहीं है, बस बेर की तरह मन में मिठास और सच्ची भक्ति होनी चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। धार्मिक उत्सव कमेटी के संयोजक हेमंत शर्मा ने बच्चों और नौजवानों द्वारा रामलीला के माध्यम से संस्कृति को बचाने के इस पुनीत कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की। बाली वध के प्रसंग पर चर्चा करते उन्होंने कहा कि बाली ने सुग्रीव की बात सुने बिना ही उसे दोषी मान लिया, जिसके परिणामस्वरुप सुनी-सुनाई बात और गलतफहमी के कारण युद्ध हुआ और बाली मारा गया। अशोक चौहान लवली (प्रधान, ब्रदरहुड वेलफेयर सोसायटी) ने कहा कि रामायण हमें सिखाती है कि अहंकार का नाश निश्चित है और बुराई पर हमेशा अच्छाई की ही जीत होती है। कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय और निर्देशक व अध्यक्ष रजनीश कुमार के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत इस छठी नाइट के अंत में प्रभु श्रीराम की आरती की। इस मौके पर चेयरमैन हरजीवन गोगना, डायरेक्टर व अध्यक्ष रजनीश कुमार, महासचिव कुलविंदर सिंह हीरा, कोषाध्यक्ष विशाल भल्ला, शिवम कालिया, निर्दोष कुमार, स्टेज सचिव प्रियव्रत शास्त्री, प्रोमट डायरेक्टर कार्तिक, प्रेम कृष्णा दास, रोहन, जगदीश बिट्टा, प्रदीप बीटी, प्ले बैक सिंगर प्रितपाल सिंह, अमनदीप हैरी, दीप अरोड़ा, सचित शर्मा, मिकुल शर्मा, गुरदास बोलीना, धीरज सहगल, राजेश सोनी, पवन भगत, अशोक, हृदय, अमन, प्रिंस, मनजीत कुमार, अमित टिंकू, शुभम पेंटर, नितक वर्मा, वतन, म्यूजिक डायरेक्टर विनय वर्मा, सावन कुमार आदि अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे। बाली (हैरानी से) : अरे सुग्रीव! तेरी यह मजाल कि तू मुझे फिर से युद्ध के लिए ललकारे? तुझे कल की हार भूल गई क्या? सुग्रीव : आज मेरे साथ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की शक्ति और आशीर्वाद है, बाली! (दोनों में भयंकर युद्ध शुरू होता है) तारा (बाली की पत्नी, चिराग वर्मा द्वारा अभिनीत – बाली को रोकते हुए) : नाथ! मत जाइए युद्ध में। मुझे किसी अनहोनी का आभास हो रहा है। भगवान राम धर्म के पक्ष में हैं, आप मान जाइए। बाली : चुप रहो तारा! बाली कभी रणभूमि से पीठ नहीं दिखाता। बाली युद्ध के लिए जाता है, जहां श्रीराम की तीर से उसका वध होता है सीता की खोज में भटकते प्रभु श्रीराम (कार्तिक) और लक्ष्मण (प्रेम) जंगलों में माता शबरी (दीप अरोड़ा) की कुटिया में पहुंचते हैं। मुख्य संवाद – राम-शबरी मिलन शबरी (भावुक होकर): हे प्रभु! मेरे भाग्य आज जाग उठे जो आप मेरी इस छोटी सी कुटिया में पधारे। यह लीजिए, कुछ मीठे बेर हैं, इन्हें ग्रहण कीजिए। (शबरी रामजी को झूठे बेर भेंट करती हैं) लक्ष्मण (आपत्ति जताते हुए): “भैया आप क्या कर रहे हैं? ये जूठे बेर माता शबरी आपको दे रही हैं, इनका परीक्षण कैसे किया जाए? श्रीराम : लक्ष्मण भक्ति में जात-पात या जूठन का कोई स्थान नहीं होता। यह प्रेम का प्रसाद है, जो संसार में दुर्लभ है। इसके बाद शबरी माता श्रीराम को सीता जी की खोज के लिए महाराज सुग्रीव का पता बताती हैं। राम और लक्ष्मण की मुलाकात सुग्रीव (सचित) से होती है। रामजी सुग्रीव को अपना मित्र बनाते हैं। सुग्रीव अपनी आपबीती सुनाता है, जिसके बाद श्रीराम सुग्रीव को बाली (मिकुल) को ललकारने के लिए भेजते हैं।

