महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट STP के संचालन को लेकर स्थिति अब भी साफ नहीं है। करीब दो महीने पहले 28 जुलाई को दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने STP के बने होने के बावजूद संचालित नहीं होने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने विश्वविद्यालय को एक महीने के अंदर STP चलाने का आदेश दिया था। इसके बाद भी छात्रों का कहना है कि उन्होंने आज तक STP को चलते हुए नहीं देखा। एक आरटीआई के जवाब में विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया था कि एसटीपी का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अभी कार्यप्रगति पर होने के कारण संचालन संभव नहीं है। वहीं कुलपति का दावा है कि STP चल रही है। छात्रों की मांग है कि अगर STP चल रही है तो विश्वविद्यालय यह जानकारी दे कि इसमें कितना पानी ट्रीट हो रहा है। छात्र बोले- STP चलते नहीं देखी, सीवर लाइन की खुदाई भी नहीं हुई विश्वविद्यालय में वर्ष 2020 से पढ़ रहे छात्र युवराज पांडेय ने कहा कि उन्होंने आज तक STP को संचालित होते हुए नहीं देखा है। उनका कहना है कि अगर STP चल रही है तो उसका संचालन परिसर में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि STP तक सीवेज पहुंचाने के लिए सीवर लाइन बिछाने की बात कही गई है, लेकिन उन्होंने इसके लिए परिसर में खुदाई होते या पाइपलाइन बिछते नहीं देखा। करीब चार साल से विश्वविद्यालय में पढ़ रहे आकाश ने भी कहा कि उन्होंने STP को कभी चलते हुए नहीं देखा। उनका कहना है कि सीवर लाइन बिछाने के लिए खुदाई का काम भी उनकी नजर में नहीं आया। आरटीआई डालने वाले पूर्व छात्र आकाश राय ने बताया कि मुझे आरटीआई के माध्यम से बाताया गया कि एसटीपी का संचालन अभी संभव नहीं है क्योंकि अभी कार्य प्रगति पर है। छात्रों का कहना है कि अगर विश्वविद्यालय का दावा है कि STP चल रही है तो इसमें कितना पानी ट्रीट हो रहा है, रोज कितनी क्षमता में काम हो रहा है और ट्रीट किया गया पानी कहां इस्तेमाल हो रहा है, इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। राज्यपाल ने एक महीने में STP चलाने को कहा था 28 जुलाई को काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने STP का मुद्दा उठाया था। राज्यपाल ने कहा था कि STP बनी हुई है, लेकिन चल नहीं रही है। इसे एक महीने के अंदर चलाया जाना चाहिए। राज्यपाल के निर्देश के बाद अब करीब दो महीने बीत चुके हैं। इसके बावजूद छात्रों का दावा है कि उन्हें STP का संचालन दिखाई नहीं दिया है। कुलपति का दावा- STP चल रही है वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति का कहना है कि STP चल रही है। यानी STP के संचालन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के दावों में अंतर है। छात्रों का कहना है कि यदि प्लांट वास्तव में चल रहा है तो उसके संचालन से जुड़ी जानकारी और पानी ट्रीटमेंट का रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। RTI में दी गई जानकारी- 90% काम पूरा, 80% भुगतान STP को लेकर पूर्व छात्र आकाश राय ने RTI के जरिए विश्वविद्यालय से जानकारी मांगी थी। विश्वविद्यालय की ओर से 2026 में दिए गए RTI जवाब में बताया गया कि वर्ष 2023 में STP और सीवर लाइन का काम कराया गया। 250 KLD क्षमता वाले STP की लागत 154.12 लाख रुपए और करीब 1600 रनिंग मीटर सीवर लाइन की लागत 111.60 लाख रुपए बताई गई। RTI के जवाब में विश्वविद्यालय ने बताया कि करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और करीब 80 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है। साथ ही बाकी काम को प्रगति पर बताया गया। एक अन्य जवाब में STP की स्थापना का काम प्रगति पर होने और काम पूरा नहीं होने के कारण संचालन नहीं किए जाने की जानकारी दी गई थी। आकाश राय बोले- RTI के बाद सामने आए दस्तावेजों से स्थिति पर सवाल पूर्व छात्र और RTI आवेदक आकाश राय ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2025 में STP से जुड़ी जानकारी के लिए RTI लगाई थी। शुरुआती जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर उन्होंने अपील की और मामला राज्य सूचना आयोग तक गया। 14 सितंबर 2026 को सुनवाई के बाद उन्हें STP और सीवर लाइन से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मिली। आकाश राय का कहना है कि दस्तावेजों में STP की क्षमता 250 KLD, उसकी लागत 154.12 लाख रुपए और करीब 1600 मीटर सीवर लाइन की जानकारी दी गई है। उनका सवाल है कि जब सीवर लाइन का काम भी परियोजना का हिस्सा है तो उसकी वास्तविक स्थिति क्या है। उनका कहना है कि उन्होंने और अन्य छात्रों ने परिसर में सीवर लाइन बिछाने के लिए खुदाई होते नहीं देखी है। MOU में तीन महीने में पूरा होना था STP का काम STP के लिए विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के CDS विंग के बीच 25 मार्च 2023 को MOU हुआ था। MOU के मुताबिक कार्यदायी संस्था को 15 अप्रैल 2023 तक निर्माण कार्य शुरू करना था। MOU में STP का काम पूरा करने की अवधि तीन महीने तय की गई थी। यानी तय समय के अनुसार काम जुलाई 2023 तक पूरा होना था। अब अक्टूबर 2026 है, यानी तय समयसीमा से करीब तीन साल तीन महीने अधिक समय बीत चुका है। MOU में 250 KLD क्षमता के STP की स्थापना के साथ करीब 1600 रनिंग मीटर सीवर लाइन का काम भी शामिल था। इसके बावजूद RTI में 2026 में करीब 90 प्रतिशत काम पूरा होने और शेष काम प्रगति पर होने की जानकारी दी गई है। अब एक तरफ राज्यपाल के एक महीने में STP चलाने के निर्देश के बाद भी छात्र इसके संचालन से इनकार कर रहे हैं, दूसरी तरफ कुलपति STP के चलने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में छात्रों की मांग है कि STP के संचालन और उसमें ट्रीट होने वाले पानी का रिकॉर्ड सामने रखा जाए।

