राजनीतिक परम्परा में फंसे हैं शहर के प्रथम नागरिक

राजनीतिक परम्परा में फंसे हैं शहर के प्रथम नागरिक

– नगर निगम बनने के बाद जिसने महापौर की कुर्सी संभाली, फिर राजनीतिक प्रगति रुकी
– न आगे विधानसभा का टिकट मिला और न ही लोकसभा का
:::: पत्रिका पड़ताल :::

जोधपुर.जोधपुर नगर निगम की राजनीति में महापौर का पद शहर के प्रथम नागरिक के तौर पर संबोधित किया जाता है, लेकिन यही पद कई राजनेताओं के लिए अंतिम राजनीतिक व चुनावी पद भी साबित होता है। पिछले तीन दशकों का रिकॉर्ड तो कम से कम यही बात कह रहा है। 1994 में नगर निगम गठन के बाद जिन नेताओं ने पूर्णकालिक या कार्यवाहक महापौर की कुर्सी संभाली, उनमें से किसी को भी बाद में विधानसभा या लोकसभा का टिकट नहीं मिला। इतना ही नहीं, अब तक कोई भी नेता दूसरी बार महापौर भी नहीं बन सका।

निकाय चुनाव 2026 के बीच यह चर्चा फिर तेज है कि क्या इस बार महापौर बनने वाला चेहरा इस राजनीतिक परंपरा को तोड़ पाएगा या फिर शहर के प्रथम नागरिक की कुर्सी एक बार फिर राजनीतिक ठहराव का प्रतीक बनेगी। 1994 से अब तक महापौर पद पर भाजपा, कांग्रेस पृष्ठभूमि के नेताओं ने जिम्मेदारी संभाली। इनमें कार्यवाहक महापौर भी शामिल रहे, लेकिन नगर निगम से आगे की चुनावी राजनीति में अपेक्षित उछाल किसी को नहीं मिला। यही वजह है कि महापौर का पद प्रशासनिक दृष्टि से प्रभावशाली होने के बावजूद बड़े चुनावों की सीढ़ी साबित नहीं हो पाया। 2020 में नगर निगम के उत्तर और दक्षिण दो निगम बनने के बाद पहली बार दो महापौर वनिता सेठ और कुंती देवड़ा परिहार ने समानांतर रूप से पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। अब दोनों निगमों के पुनर्गठन के बाद होने वाले चुनाव इस परंपरा की अगली परीक्षा माने जा रहे हैं।

B तीन दशक की परंपराB
– 1994 में जोधपुर नगर निगम का गठन हुआ।
– अब तक 10 नेताओं ने पूर्णकालिक या कार्यवाहक महापौर का दायित्व संभाला।
– किसी भी पूर्व महापौर को बाद में विधानसभा या लोकसभा का टिकट नहीं मिला।

– कोई भी नेता दूसरी बार महापौर नहीं बन सका।
– 2026 का चुनाव इस राजनीतिक परिपाटी को बदलने का अवसर माना जा रहा है।

Bयह है पूर्णकालिक व कार्यवाहक महापौर B
– खेत लखानी – नवम्बर 1994 से अगस्त 97 तक ।
– संगीता सोलंकी – अगस्त 97 से सितम्बर 97 तक।
– राजेन्द्र कुमार गहलोत – सितम्बर 97 से नवम्बर 99 तक।
– शिवलाल टाक – नवम्बर 99 से अप्रेल 2004 तक।
– अब्दुल मजीद गौरी – मई 2004 से नवम्बर 04 तक।
– ओमकुमारी गहलोत – नवम्बर 2004 से नवबर 2009 तक।
– रामेश्वर दाधीच – नवम्बर 2009 से नवम्बर 2014 तक।
– घनश्याम ओझा – नवम्बर 2014 से 2019 तक।
– वनिता सेठ – 2020 से 2025 तक।
– कुंती देवड़ा परिहार- 2020 से 2025 तक।

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