रक्तदान को लेकर मन में थोड़ी घबराहट और सुई का डर था, लेकिन किसी की जिंदगी बचाने की खुशी इस डर से बड़ी निकली। पहली बार रक्तदान करने वाली एक युवा रक्तदाता ने प्रक्रिया पूरी होने के बाद कहा कि अब उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। वहीं, पिछले साल रक्तदान कर चुकी युवती इस बार भी शिविर में पहुंचीं। उन्होंने कहा, “मुझे फिर से रक्तदान करके बहुत अच्छा लग रहा है। थोड़ा डर भी है, लेकिन मैं बहुत उत्साहित हूं।” राष्ट्रीय मेगा रक्तदान अभियान के तहत 26 जून को गांधी मेडिकल कॉलेज एवं हमीदिया अस्पताल के ब्लड सेंटर की टीम ने संत निरंकारी मिशन, बैरागढ़ के सहयोग से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगाया। सुबह 9 बजे शुरू हुआ शिविर शाम करीब 7 बजे तक चला। इसमें लोगों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और 518 यूनिट रक्त का संग्रहण हुआ। पहली बार रक्तदान किया, डर के बाद चेहरे पर दिखी खुशी शिविर में पहली बार रक्तदान करने पहुंची युवा रक्तदाता ने बताया कि शुरुआत में उसे सुई और रक्तदान की प्रक्रिया को लेकर घबराहट थी। हालांकि प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसका डर दूर हो गया। उसने कहा कि रक्तदान के बाद उसे अच्छा महसूस हो रहा है। रक्तदाताओं का कहना था कि पहली बार रक्तदान करने वालों के मन में सुई या कमजोरी को लेकर झिझक हो सकती है, लेकिन किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने का एहसास इस डर से कहीं बड़ा है। उनका संदेश था कि थोड़ी सी झिझक छोड़कर किया गया रक्तदान किसी अनजान व्यक्ति या संभव है कि किसी अपने की जिंदगी बचाने में काम आ सकता है। पिछले साल भी किया था रक्तदान, इस बार फिर पहुंचीं शिविर में ऐसी युवा रक्तदाता भी पहुंचीं, जिन्होंने पिछले साल भी रक्तदान किया था। उन्होंने लगातार दूसरी बार रक्तदान किया। उनका कहना था कि रक्तदान से शरीर कमजोर हो जाता है, यह धारणा सही नहीं है। उनका उद्देश्य अन्य लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करना है, क्योंकि एक व्यक्ति का रक्त किसी जरूरतमंद के लिए जीवन का आधार बन सकता है। उन्होंने कहा, “मानव सेवा ही माधव सेवा है।” उनका कहना था कि रक्तदान को लेकर थोड़ा डर जरूर है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा उत्साह है। स्वयंसेवकों ने संभाली व्यवस्थाएं संत निरंकारी मिशन, बैरागढ़ के स्वयंसेवकों ने शिविर की व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग किया। रक्तदाताओं की सहायता से लेकर अन्य व्यवस्थाओं तक स्वयंसेवकों ने सेवा भावना के साथ जिम्मेदारी निभाई। हमीदिया अस्पताल के ब्लड सेंटर की टीम ने भी पूरे दिन रक्त संग्रहण किया। टीम का नेतृत्व डॉ. पुनीत टंडन, डॉ. अरुण कनेल और डॉ. रिचा जैन ने किया। 518 यूनिट रक्त, 518 उम्मीदें शिविर में जुटी 518 यूनिट रक्त सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि जरूरतमंद मरीजों के लिए 518 उम्मीदें हैं। प्रत्येक यूनिट रक्त किसी मरीज के उपचार में उपयोगी हो सकता है। आयोजकों का कहना है कि जब चिकित्सा संस्थान, स्वयंसेवी संगठन और आम लोग एक साथ मानव सेवा के लिए आगे आते हैं तो ऐसे अभियान जरूरतमंदों के लिए बड़ी मदद बनते हैं।

