सम्राट सरकार के फैसले के खिलाफ बीते 20 दिनों से पटना यूनिवर्सिटी के शिक्षक चरणबद्ध तरीके से आंदोलन कर रहे। ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026’ को लेकर शिक्षकों के मन में काफी आक्रोश है। कॉलेजों के प्रोफेसर की भर्ती, ट्रांसफर-पोस्टिंग समेत दूसरे कंट्रोल सरकार के पास होंगे। वहीं, शिक्षकों के चुनाव लड़ने पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। इस पर शिक्षकों का कहना है कि जिस यूनिवर्सिटी से निकलकर लोग मंत्री, विधायक बने हैं, वहीं आज अंग्रेजों वाला नीति लागू कर रहे हैं। सरकार को इस बात का डर है कि शिक्षित लोग सत्ता में आ जाएंगे। वहीं, शिक्षकों के मन में दूर-दराज गांवों में पोस्टिंग का भी डर बना हुआ है। इस रिपोर्ट में पढ़िए इस विधेयक के आने से शिक्षकों के मन में किस बात का डर है… सरकार को डर है कि शिक्षित लोग सत्ता में आ जाएंगे इंग्लिश डिपार्टमेंट की शिक्षक रिचा ने कहा कि इस विधेयक के आने से शिक्षकों के निजी जिंदगी पर भी काफी असर पड़ेगा। शिक्षकों की मेरिट नहीं देखी जाएगी। हमारे मन में यह डर है कि हमारी पोस्टिंग कहीं भी हो सकती है। वो सरकारी ऑफिस ज्यादा और विश्वविद्यालय कब होगा। शिक्षकों के चुनाव लड़ने पर भी रोक रहेगी। आखिर इससे सरकार को परेशानी क्या है? सरकार को क्या इस बात का डर है कि शिक्षित लोग सत्ता में आ जाएंगे? अगर शिक्षित लोग राजनीति में नहीं आएंगे तो अच्छी पॉलिटिक्स कैसे होगी? राजनीति करने से रोका जाएगा तो शिक्षक मांगे नहीं रख पाएंगे पटना साइंस कॉलेज की शिक्षक शोभन चक्रवर्ती ने कहा कि सभी शिक्षक यहां हाई मेरिट के चलते पदस्थापित हुए हैं। मेरी यहां नियुक्ति बीपीएससी के जरिए हुई थी। अभी तक पटना के अंतर्गत यूनिवर्सिटी के जितने भी कॉलेज हैं, उसी में हमारा ट्रांसफर सीमित था। मगर अब प्रति हिंसा के चलते, या विपक्षी राजनीति के कारण कहीं दूर-दराज गांव में पोस्टिंग कर दी जाएगी। हमारी नियुक्ति जब हुई थी तो हमें पता था कि पटना से बाहर नहीं जाना है। उसी हिसाब से हमने सब कुछ सेटल किया था। अब पूरे के पूरे पारिवारिक के ढांचे पर भी असर पड़ेगा। दूसरी ओर अगर हमें राजनीति करने से रोक दिया जाएगा तो इसका पहला असर यही होगा कि हम अपनी मांगे नहीं रख पाएंगे। PU से निकलकर नेता-मंत्री बने, अब यहां अंग्रेजों वाला नीति ला रहे पीजी डिपार्टमेंट के शिक्षक डॉ प्रभुनाथ सिंह ने कहा कि पटना यूनिवर्सिटी की अपनी एक गरिमा रही है। जितने भी पॉलिटिकल लीडर है उसमें से अधिकतर यहीं से पढ़े हुए हैं। राज्यसभा, लोकसभा, विधानसभा में बैठे लोग यहीं से पढ़कर राजनीति में सुशोभित करने का काम किया है। अगर शिक्षकों को चुनाव लड़ने से रोका जाएगा, तो आगे उन्हें राजनीतिक गुलामी से जूझना होगा। लोग इसी यूनिवर्सिटी से पास आउट होकर विधायक, नेता, मंत्री बन जाते हैं और आज जाकर अंग्रेजों वाला नीति यहां लागू करते हैं। ये विधेयक सभ्य समाज के लिए न्याय संगत नहीं है। महिला होकर दूर-दराज गांवों में पोस्टिंग होने का डर पटना यूनिवर्सिटी में डीडी में कार्यरत शिक्षक मीना देवी ने कहा कि कॉलेजों के प्रोफेसर की भर्ती, ट्रांसफर-पोस्टिंग समेत दूसरे कंट्रोल सरकार के पास होंगे। मेरा जन्म पटना में हुआ। मैंने यहीं पढ़ाई-लिखाई की और पटना में ही नौकरी कर रही हूं। ड्यूटी पर पहुंचने के लिए रास्ते में गाड़ी को लेकर काफी दिक्कत होगा। यहां मेरा घर परिवार है। दूर दराज इलाके में अकेले मैं नहीं संभाल पाऊंगी। ये विधेयक पूरी तरह से गलत है इसे नहीं आना चाहिए। सम्राट सरकार के फैसले के खिलाफ बीते 20 दिनों से पटना यूनिवर्सिटी के शिक्षक चरणबद्ध तरीके से आंदोलन कर रहे। ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026’ को लेकर शिक्षकों के मन में काफी आक्रोश है। कॉलेजों के प्रोफेसर की भर्ती, ट्रांसफर-पोस्टिंग समेत दूसरे कंट्रोल सरकार के पास होंगे। वहीं, शिक्षकों के चुनाव लड़ने पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। इस पर शिक्षकों का कहना है कि जिस यूनिवर्सिटी से निकलकर लोग मंत्री, विधायक बने हैं, वहीं आज अंग्रेजों वाला नीति लागू कर रहे हैं। सरकार को इस बात का डर है कि शिक्षित लोग सत्ता में आ जाएंगे। वहीं, शिक्षकों के मन में दूर-दराज गांवों में पोस्टिंग का भी डर बना हुआ है। इस रिपोर्ट में पढ़िए इस विधेयक के आने से शिक्षकों के मन में किस बात का डर है… सरकार को डर है कि शिक्षित लोग सत्ता में आ जाएंगे इंग्लिश डिपार्टमेंट की शिक्षक रिचा ने कहा कि इस विधेयक के आने से शिक्षकों के निजी जिंदगी पर भी काफी असर पड़ेगा। शिक्षकों की मेरिट नहीं देखी जाएगी। हमारे मन में यह डर है कि हमारी पोस्टिंग कहीं भी हो सकती है। वो सरकारी ऑफिस ज्यादा और विश्वविद्यालय कब होगा। शिक्षकों के चुनाव लड़ने पर भी रोक रहेगी। आखिर इससे सरकार को परेशानी क्या है? सरकार को क्या इस बात का डर है कि शिक्षित लोग सत्ता में आ जाएंगे? अगर शिक्षित लोग राजनीति में नहीं आएंगे तो अच्छी पॉलिटिक्स कैसे होगी? राजनीति करने से रोका जाएगा तो शिक्षक मांगे नहीं रख पाएंगे पटना साइंस कॉलेज की शिक्षक शोभन चक्रवर्ती ने कहा कि सभी शिक्षक यहां हाई मेरिट के चलते पदस्थापित हुए हैं। मेरी यहां नियुक्ति बीपीएससी के जरिए हुई थी। अभी तक पटना के अंतर्गत यूनिवर्सिटी के जितने भी कॉलेज हैं, उसी में हमारा ट्रांसफर सीमित था। मगर अब प्रति हिंसा के चलते, या विपक्षी राजनीति के कारण कहीं दूर-दराज गांव में पोस्टिंग कर दी जाएगी। हमारी नियुक्ति जब हुई थी तो हमें पता था कि पटना से बाहर नहीं जाना है। उसी हिसाब से हमने सब कुछ सेटल किया था। अब पूरे के पूरे पारिवारिक के ढांचे पर भी असर पड़ेगा। दूसरी ओर अगर हमें राजनीति करने से रोक दिया जाएगा तो इसका पहला असर यही होगा कि हम अपनी मांगे नहीं रख पाएंगे। PU से निकलकर नेता-मंत्री बने, अब यहां अंग्रेजों वाला नीति ला रहे पीजी डिपार्टमेंट के शिक्षक डॉ प्रभुनाथ सिंह ने कहा कि पटना यूनिवर्सिटी की अपनी एक गरिमा रही है। जितने भी पॉलिटिकल लीडर है उसमें से अधिकतर यहीं से पढ़े हुए हैं। राज्यसभा, लोकसभा, विधानसभा में बैठे लोग यहीं से पढ़कर राजनीति में सुशोभित करने का काम किया है। अगर शिक्षकों को चुनाव लड़ने से रोका जाएगा, तो आगे उन्हें राजनीतिक गुलामी से जूझना होगा। लोग इसी यूनिवर्सिटी से पास आउट होकर विधायक, नेता, मंत्री बन जाते हैं और आज जाकर अंग्रेजों वाला नीति यहां लागू करते हैं। ये विधेयक सभ्य समाज के लिए न्याय संगत नहीं है। महिला होकर दूर-दराज गांवों में पोस्टिंग होने का डर पटना यूनिवर्सिटी में डीडी में कार्यरत शिक्षक मीना देवी ने कहा कि कॉलेजों के प्रोफेसर की भर्ती, ट्रांसफर-पोस्टिंग समेत दूसरे कंट्रोल सरकार के पास होंगे। मेरा जन्म पटना में हुआ। मैंने यहीं पढ़ाई-लिखाई की और पटना में ही नौकरी कर रही हूं। ड्यूटी पर पहुंचने के लिए रास्ते में गाड़ी को लेकर काफी दिक्कत होगा। यहां मेरा घर परिवार है। दूर दराज इलाके में अकेले मैं नहीं संभाल पाऊंगी। ये विधेयक पूरी तरह से गलत है इसे नहीं आना चाहिए।

