यमुना चौक पर राम-लक्ष्मण ने भरत-शत्रुघ्न को गले लगाया:बक्सर में जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा चौक, लोगों ने छतों-बालकनी से की पुष्प वर्षा

यमुना चौक पर राम-लक्ष्मण ने भरत-शत्रुघ्न को गले लगाया:बक्सर में जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा चौक, लोगों ने छतों-बालकनी से की पुष्प वर्षा

बक्सर के यमुना चौक पर गुरुवार रात भगवान राम और लक्ष्मण ने भरत व शत्रुघ्न को गले लगाया। 21 दिवसीय रामलीला महोत्सव का समापन भरत मिलाप के मंचन से हुआ। यह दृश्य देख श्रद्धालु भावुक हुए। पूरा चौक ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंजा, लोगों ने पुष्प वर्षा की। यमुना चौक पर ऐसा माहौल था, मानो अयोध्या बक्सर में ही उतर आई हो। भरत मिलाप देखने शहर के कई इलाकों से लोग पहुंचे। छतों और बालकनी पर भीड़ जुटी। रात 11 बजे तक रास्तों पर भीड़ के कारण आवागमन पर असर पड़ा। भरत मिलाप रामलीला का भावुक प्रसंग है। श्रीराम के वनवास के बाद भरत ने राजसिंहासन पर उनकी खड़ाऊं रखकर राज्य चलाया। यह मिलन त्याग, प्रेम और पारिवारिक एकता का संदेश देता है। श्रवण कुमार की झांकी ने दर्शकों का खींचा इस अवसर पर बक्सर जिला मुख्यालय के मोहल्लों से आकर्षक धार्मिक और सामाजिक झांकियां प्रस्तुत की गई। इनसे भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को दिखाया गया। कार्यक्रम में गुरुकुल परंपरा, मां काली के रौद्र रूप और श्रवण कुमार की झांकी ने दर्शकों का ध्यान खींचा। श्रवण कुमार की झांकी में अपने माता-पिता को कंधे पर बैठाकर तीर्थयात्रा पर ले जाने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा भगवान राम द्वारा अहिल्या उद्धार सहित कई अन्य धार्मिक प्रसंगों को भी झांकियों के माध्यम से जीवंत किया गया। दुर्गा पूजा समितियों की ओर से तैयार इन झांकियों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रही। सुरक्षा व्यवस्था के रहे इंतजाम कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। यमुना चौक और आसपास के इलाकों में मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। इस अवसर पर बक्सर के एसडीएम अविनाश कुमार, एसडीपीओ गौरव पांडेय और नगर परिषद के जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। 1885 से भरत मिलाप का साक्षी बना है यमुना चौक नगर परिषद चेयरमैन प्रतिनिधि नियंतुल्ला फरीदी ने बताया कि बक्सर के यमुना चौक (जिसे पुराना चौक भी कहा जाता है) पर वर्ष 1885 से भरत मिलाप के मंचन की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने कहा कि किला मैदान सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर रामलीला का आयोजन कई दिनों तक होता है, लेकिन भरत मिलाप के लिए लोगों को हर साल यमुना चौक का इंतजार रहता है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बक्सर की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में हर साल बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। भरत मिलाप के साथ ही 21 दिवसीय रामलीला महोत्सव का समापन हुआ और यमुना चौक एक बार फिर भाईचारे, प्रेम, त्याग और धार्मिक आस्था के संदेश का साक्षी बना। बक्सर के यमुना चौक पर गुरुवार रात भगवान राम और लक्ष्मण ने भरत व शत्रुघ्न को गले लगाया। 21 दिवसीय रामलीला महोत्सव का समापन भरत मिलाप के मंचन से हुआ। यह दृश्य देख श्रद्धालु भावुक हुए। पूरा चौक ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंजा, लोगों ने पुष्प वर्षा की। यमुना चौक पर ऐसा माहौल था, मानो अयोध्या बक्सर में ही उतर आई हो। भरत मिलाप देखने शहर के कई इलाकों से लोग पहुंचे। छतों और बालकनी पर भीड़ जुटी। रात 11 बजे तक रास्तों पर भीड़ के कारण आवागमन पर असर पड़ा। भरत मिलाप रामलीला का भावुक प्रसंग है। श्रीराम के वनवास के बाद भरत ने राजसिंहासन पर उनकी खड़ाऊं रखकर राज्य चलाया। यह मिलन त्याग, प्रेम और पारिवारिक एकता का संदेश देता है। श्रवण कुमार की झांकी ने दर्शकों का खींचा इस अवसर पर बक्सर जिला मुख्यालय के मोहल्लों से आकर्षक धार्मिक और सामाजिक झांकियां प्रस्तुत की गई। इनसे भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को दिखाया गया। कार्यक्रम में गुरुकुल परंपरा, मां काली के रौद्र रूप और श्रवण कुमार की झांकी ने दर्शकों का ध्यान खींचा। श्रवण कुमार की झांकी में अपने माता-पिता को कंधे पर बैठाकर तीर्थयात्रा पर ले जाने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा भगवान राम द्वारा अहिल्या उद्धार सहित कई अन्य धार्मिक प्रसंगों को भी झांकियों के माध्यम से जीवंत किया गया। दुर्गा पूजा समितियों की ओर से तैयार इन झांकियों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रही। सुरक्षा व्यवस्था के रहे इंतजाम कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। यमुना चौक और आसपास के इलाकों में मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। इस अवसर पर बक्सर के एसडीएम अविनाश कुमार, एसडीपीओ गौरव पांडेय और नगर परिषद के जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। 1885 से भरत मिलाप का साक्षी बना है यमुना चौक नगर परिषद चेयरमैन प्रतिनिधि नियंतुल्ला फरीदी ने बताया कि बक्सर के यमुना चौक (जिसे पुराना चौक भी कहा जाता है) पर वर्ष 1885 से भरत मिलाप के मंचन की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने कहा कि किला मैदान सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर रामलीला का आयोजन कई दिनों तक होता है, लेकिन भरत मिलाप के लिए लोगों को हर साल यमुना चौक का इंतजार रहता है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बक्सर की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में हर साल बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। भरत मिलाप के साथ ही 21 दिवसीय रामलीला महोत्सव का समापन हुआ और यमुना चौक एक बार फिर भाईचारे, प्रेम, त्याग और धार्मिक आस्था के संदेश का साक्षी बना।  

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