मोतिहारी में यूरिया की कालाबाजारी का खेल लगातार जारी है। बंजरिया प्रखंड खाद माफियाओं के लिए सुरक्षित जगह बन गया है। आरोप है कि इसमें कृषि विभाग के अधिकारियों का भी सहयोग मिलता है। यह मामला बंजरिया थाना क्षेत्र के लक्ष्मण चौक का है। DM सौरभ सुमन यादव को सूचना मिली थी कि लक्ष्मण चौक के पास एक गोदाम में बड़ी मात्रा में यूरिया गैरकानूनी तरीके से जमा की जा रही है। सूचना के बाद DM ने एक टीम बनाई और छापेमारी करने को कहा। टीम में अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सुरेश प्रसाद, बंजरिया, सदर और कोटवा के बीडीओ, प्रखंड कृषि पदाधिकारी और बंजरिया थाना की पुलिस शामिल थे। टीम सुबह करीब सात बजे से गोदाम की तलाश में लगी रही और करीब नौ बजे गोदाम को पहचाना गया। इस दौरान गोदाम बंद था। छौड़ादानो निवासी गोदाम संचालक सुनील कुमार उर्फ लड्डू को फोन कर बुलाया गया, लेकिन वह करीब छह घंटे बाद वहां पहुंचा। तब तक अधिकारी और पुलिस गोदाम खुलने का इंतजार करते रहे। गोदाम खुलते ही अंदर खाद से भरा हुआ था। गोदाम को सील कर आगे की कार्रवाई शुरू सूत्रों के अनुसार, गोदाम खुलते ही अनुमंडल कृषि पदाधिकारी ने यह कहकर मामला सामान्य बताया कि सब कुछ ठीक है। उनके लगातार बदलते बयानों से मौके पर मौजूद अन्य अधिकारी भी हैरान रह गए। इसके बाद बीडीओ ने सख्त रुख अपनाते हुए गोदाम को सील कर आगे की कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान लाइसेंस को लेकर सवाल उठा। अनुमंडल कृषि पदाधिकारी के अनुसार, गोदाम पहले किसी और व्यक्ति के नाम पर था। उनकी मृत्यु के बाद 10 सितंबर को यह दूसरे व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर हुआ। वहीं, गोदाम संचालक ने बताया कि 9 सितंबर को कार्यालय के निर्देश पर 100 बोरी यूरिया बेची गई थी। अब सवाल उठ रहा है कि जब लाइसेंस 10 सितंबर को ट्रांसफर हुआ, तो 9 सितंबर को किस अधिकार से यूरिया बेची गई और उसका बिल किसने काटा? स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां रोजाना यूरिया की लोडिंग-अनलोडिंग होती रही है। इसकी पुष्टि आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज से हो सकती है।
1545 बोरी बताई, मौके पर 7 हजार का दावा
गोदाम संचालक ने टीम को 1545 बोरी यूरिया होने की जानकारी दी, जबकि मौके पर मौजूद लोगों का दावा है कि गोदाम में करीब सात हजार बोरी यूरिया रखी हुई है। सच्चाई विभागीय भौतिक सत्यापन और स्टॉक रजिस्टर से ही सामने आएगी। सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि सोमवार को ट्रक से यूरिया गोदाम में कैसे पहुंची, रैक प्वाइंट से माल किस अनुमति से आया, जबकि रैक प्वाइंट से आवंटन में कृषि विभाग की भूमिका होती है। इस पर एसएओ ने जानकारी नहीं होने की बात कही, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। गोदाम के बाहर भी यूरिया बिखरी मिली। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यहां रात में लोडिंग कर यूरिया नेपाल भेजी जाती है, जिसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है। मोतिहारी में यूरिया की कालाबाजारी का खेल लगातार जारी है। बंजरिया प्रखंड खाद माफियाओं के लिए सुरक्षित जगह बन गया है। आरोप है कि इसमें कृषि विभाग के अधिकारियों का भी सहयोग मिलता है। यह मामला बंजरिया थाना क्षेत्र के लक्ष्मण चौक का है। DM सौरभ सुमन यादव को सूचना मिली थी कि लक्ष्मण चौक के पास एक गोदाम में बड़ी मात्रा में यूरिया गैरकानूनी तरीके से जमा की जा रही है। सूचना के बाद DM ने एक टीम बनाई और छापेमारी करने को कहा। टीम में अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सुरेश प्रसाद, बंजरिया, सदर और कोटवा के बीडीओ, प्रखंड कृषि पदाधिकारी और बंजरिया थाना की पुलिस शामिल थे। टीम सुबह करीब सात बजे से गोदाम की तलाश में लगी रही और करीब नौ बजे गोदाम को पहचाना गया। इस दौरान गोदाम बंद था। छौड़ादानो निवासी गोदाम संचालक सुनील कुमार उर्फ लड्डू को फोन कर बुलाया गया, लेकिन वह करीब छह घंटे बाद वहां पहुंचा। तब तक अधिकारी और पुलिस गोदाम खुलने का इंतजार करते रहे। गोदाम खुलते ही अंदर खाद से भरा हुआ था। गोदाम को सील कर आगे की कार्रवाई शुरू सूत्रों के अनुसार, गोदाम खुलते ही अनुमंडल कृषि पदाधिकारी ने यह कहकर मामला सामान्य बताया कि सब कुछ ठीक है। उनके लगातार बदलते बयानों से मौके पर मौजूद अन्य अधिकारी भी हैरान रह गए। इसके बाद बीडीओ ने सख्त रुख अपनाते हुए गोदाम को सील कर आगे की कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान लाइसेंस को लेकर सवाल उठा। अनुमंडल कृषि पदाधिकारी के अनुसार, गोदाम पहले किसी और व्यक्ति के नाम पर था। उनकी मृत्यु के बाद 10 सितंबर को यह दूसरे व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर हुआ। वहीं, गोदाम संचालक ने बताया कि 9 सितंबर को कार्यालय के निर्देश पर 100 बोरी यूरिया बेची गई थी। अब सवाल उठ रहा है कि जब लाइसेंस 10 सितंबर को ट्रांसफर हुआ, तो 9 सितंबर को किस अधिकार से यूरिया बेची गई और उसका बिल किसने काटा? स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां रोजाना यूरिया की लोडिंग-अनलोडिंग होती रही है। इसकी पुष्टि आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज से हो सकती है।
1545 बोरी बताई, मौके पर 7 हजार का दावा
गोदाम संचालक ने टीम को 1545 बोरी यूरिया होने की जानकारी दी, जबकि मौके पर मौजूद लोगों का दावा है कि गोदाम में करीब सात हजार बोरी यूरिया रखी हुई है। सच्चाई विभागीय भौतिक सत्यापन और स्टॉक रजिस्टर से ही सामने आएगी। सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि सोमवार को ट्रक से यूरिया गोदाम में कैसे पहुंची, रैक प्वाइंट से माल किस अनुमति से आया, जबकि रैक प्वाइंट से आवंटन में कृषि विभाग की भूमिका होती है। इस पर एसएओ ने जानकारी नहीं होने की बात कही, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। गोदाम के बाहर भी यूरिया बिखरी मिली। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यहां रात में लोडिंग कर यूरिया नेपाल भेजी जाती है, जिसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।

