‘मैं हमेशा से मां बनना चाहती थी, लेकिन डरती हूं’, श्रुति हासन ने शादी और सिंगल मदर बनने पर खुलकर की बात

‘मैं हमेशा से मां बनना चाहती थी, लेकिन डरती हूं’, श्रुति हासन ने शादी और सिंगल मदर बनने पर खुलकर की बात

Shruti Haasan motherhood: एक्ट्रेस श्रुति हासन ने रणवीर इलाहाबादिया के शो ‘द रणवीर शो’ में अपनी पर्सनल लाइफ, शादी और मां बनने की इच्छा को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें शादी का विचार अब भी थोड़ा डराता है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि उन्हें प्यार और रिश्तों पर भरोसा नहीं है। वो कमिटमेंट और लॉयल्टी में विश्वास करती हैं, लेकिन शादी को अपनी पहचान से जोड़ने का विचार उन्हें सहज नहीं लगता।

‘शादी के ख्याल से ही डर जाती हूं’

शादी न करने के फैसले के बारे में बात करते हुए श्रुति हासन ने कहा कि वो शादी के विचार से डरती हैं। उन्होंने बताया कि अपनी पूरी जिंदगी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए काफी मेहनत की है और इसे एक कागज के टुकड़े से बांधने का ख्याल उन्हें डरावना लगता है।

हालांकि, श्रुति ने साफ किया कि इसका मतलब ये नहीं है कि वो कमिटमेंट में विश्वास नहीं करतीं। उनके लिए किसी रिश्ते में ईमानदारी, वफादारी और भावनात्मक जुड़ाव बेहद अहम हैं। उनका मानना है कि ये सभी खूबसूरत चीजें शादी का हिस्सा होनी चाहिए।

शादी के करीब पहुंची थीं श्रुति

जब श्रुति से पूछा गया कि क्या वह कभी शादी के करीब पहुंची थीं, तो उन्होंने हां में जवाब दिया। उन्होंने बताया कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें नहीं लगता कि उस रिश्ते से पीछे हटना उनकी गलती थी।

श्रुति के मुताबिक, मामला सिर्फ रिश्ते का नहीं था, बल्कि आगे की जिंदगी और भविष्य की कई चीजों से जुड़ा था। उन्होंने इसे कम्पैटिबिलिटी से जोड़ते हुए बताया कि भविष्य और संभावित बच्चों जैसे मुद्दों पर भी विचार करना पड़ता है।

‘मैं हमेशा से मां बनना चाहती थी’

श्रुति हासन ने यह भी बताया कि वो हमेशा से मां बनना चाहती हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह कभी सिंगल मदर नहीं बनना चाहती थीं। उनका मानना है कि अगर संभव हो तो बच्चे के लिए दो माता-पिता का होना अच्छा है। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह उन लोगों को जज या शर्मिंदा नहीं कर रही हैं, जो सिंगल पैरेंट के तौर पर बच्चों की परवरिश कर रहे हैं।

श्रुति की बातों से साफ है कि वह शादी को रिश्ते की मजबूरी के तौर पर नहीं देखतीं। उनके लिए प्यार, कमिटमेंट और लॉयल्टी जरूरी हैं, लेकिन शादी को लेकर फैसला वह अपनी पहचान और भविष्य की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर करना चाहती हैं।

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