‘मैं तुमसे मिलकर जरूर जाऊंगी’ हिमांशी खुराना ने गुस्से में की थी किन्नौर कैलाश की यात्रा, बताया कारण

‘मैं तुमसे मिलकर जरूर जाऊंगी’ हिमांशी खुराना ने गुस्से में की थी किन्नौर कैलाश की यात्रा, बताया कारण

Himanshi Khurana On Kinnaur Kailash: पंजाबी एक्ट्रेस और ‘बिग बॉस 13’ फेम हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं। उन्होंने हाल ही में खुलासा किया था कि वह अपने एक्स-बॉयफ्रेंड के दबाव में इस्लाम कबूल करने वाली थीं। अब उन्होंने एक और चौंकाने वाली बात बताई है कि एक रात उन्हें लगा कि उनकी जिंदगी का शायद आखिरी दिन है। इसी मानसिक तनाव और डिप्रेशन के दौर से गुजरते हुए हिमांशी ने किन्नौर कैलाश की खतरनाक यात्रा की थी, जिसे डेडली ट्रेक कहते हैं। 

हिमांशी खुराना ने अपने डेडली ट्रेक को लेकर की बात

हिमांशी खुराना ने पारस छाबड़ा संग खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि जब वह भयानक एंग्जायटी और डिप्रेशन से जूझ रही थी तब वह गुस्से में भारत के सबसे खतरनाक और कठिन धार्मिक ट्रैक्स में से एक ‘किन्नौर कैलाश’ की यात्रा पर निकल पड़ी थीं।

हिमांशी ने उस दौर को याद करते हुए कहा, “भारत का सबसे टफेस्ट और डेडलीस्ट ट्रैक किन्नौर कैलाश है। मैंने वह चढ़ाई की और वो भी बहुत गुस्से में की थी, लेकिन मेरे मन में बस एक ही मकसद था- ‘हे भगवान, मैं तुमसे मिलकर तो जरूर जाऊंगी! तुमने मुझे ऊपर बुलाना है तो बुला लो।’

हिमांशी ने की थी 24,000 फीट की यात्रा

हिमांशी ने आगे दर्द बयां करते हुए बताया कि वह चढ़ाई इतनी कठिन थी कि आज अगर कोई उनसे कहे तो वे शायद दोबारा न कर पाएं। उन्होंने कहा, “उस वक्त मेरे अंदर न जाने कहां से इतनी ताकत आ गई थी कि मैंने तय कर लिया था कि मुझे कैलाश यात्रा करनी ही है। वह 90 डिग्री की सीधी चढ़ाई है, जो लगभग 24,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है। उसे स्वर्ग की चौथी सीढ़ी भी कहा जाता है, जहां पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रावण ने भी कठोर तपस्या की थी।” 

हिमांशी खुराना बताया आपके अंदर है पूरा ब्रह्मांड

हिमांशी ने आगे कहा, “जब मैं वहां पहुंची तो मैं खूब रोई थी इतना रोई कि मुझे खुद समझ आ गया कि आपका ब्रेन, आपके अंदर जो सवाल होते हैं यही आपका टीचर है। यही इसी के अंदर यूनिवर्स यानी ब्रह्मांड समाया हुआ है और मेरा सारा दर्द आंसुओं के रूप में बह निकला।” बता दें कि आसिम रियाज के साथ रिश्ते के दौरान धर्म बदलने के मानसिक दबाव को झेलने के बाद हिमांशी की इस आध्यात्मिक यात्रा ने उन्हें डिप्रेशन से बाहर निकलने और अपनी खोई हुई आत्मशक्ति को वापस पाने में मदद की।

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