मेरठ में पूर्व एसएसपी अविनाश पांडे और सिविल लाइन थाने के आठ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के बाद अब उन पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच तेज हो गई है, जिनके नाम दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने लिए हैं। दोनों ने पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिकारियों ने मामले की जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिया है। इसके अलावा सिविल लाइन थाने के दो दरोगाओं की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। दोनों के नाम दिग्विजय और मोहित ने उच्चाधिकारियों को बताए हैं। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है। 8 जुलाई को ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में हुआ था प्रदर्शन ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर 8 जुलाई को मेरठ में बड़ा प्रदर्शन हुआ था। परिजनों ने पुलिस पर हत्यारों को बचाने का आरोप लगाया था। जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे भी मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और एसएसपी ने भी हाथापाई की। इसके बाद पुलिस वैन में हिरासत में लिए गए रवि गौतम के साथ मारपीट का मामला सामने आया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी। कार्रवाई की चर्चा के बीच आई कांवड़ यात्रा घटना के बाद एसएसपी अविनाश पांडे के खिलाफ कार्रवाई की चर्चाएं तेज हो गई थीं। हालांकि इसी दौरान कांवड़ यात्रा शुरू हो गई और मामला कुछ समय के लिए ठंडा पड़ गया। कांवड़ यात्रा खत्म होने के बाद भी तत्काल कोई कार्रवाई सामने नहीं आई। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एसएसपी के भाषण में पुलिस हिंसा के समर्थन से जुड़े बयान भी चर्चा में रहे। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर अटकलें और तेज हो गईं। ललिता गौतम प्रकरण को लेकर आंदोलन कर रहे दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव भी बाद में पुलिस कार्रवाई की चपेट में आए। दोनों के मुताबिक, मोहित पर दर्ज एक मुकदमे के सिलसिले में पुलिस अधिकारियों से बातचीत हुई थी। इसके बाद दोनों एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। दिग्विजय भाटी का आरोप है कि कार्यालय में उनके साथ मारपीट की गई और बाद में उन्हें SOG के हवाले कर दिया गया। मोहित जाटव ने भी पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों ने पुलिस लाइन में थर्ड डिग्री देने का आरोप लगाया है। रवि गौतम मामले से जोड़ी जा रही घटना पुलिस कार्रवाई को लेकर दिग्विजय और मोहित के आरोपों के बाद इस प्रकरण की तुलना रवि गौतम के मामले से की जा रही है। रवि गौतम ने भी आरोप लगाया था कि पहले एसएसपी कार्यालय में उनके साथ मारपीट हुई और बाद में उन्हें SOG को सौंप दिया गया। उन्होंने पुलिस लाइन में भी बर्बरता का आरोप लगाया था। हालांकि इन आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटनाओं में किस-किस पुलिसकर्मी की भूमिका थी और आरोप कितने सही हैं। इस पूरे प्रकरण में पूर्व एसएसपी अविनाश पांडे समेत 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है। अविनाश पांडे को लखनऊ अटैच किया गया है। वहीं सिविल लाइन थाने के आठ पुलिसकर्मियों, जिसमें तत्कालीन SHO अखिलेश कुमार गौड़ भी शामिल हैं, पर भी कार्रवाई की जा चुकी है। अब SOG के उन पुलिसकर्मियों की पहचान की जा रही है, जिन पर दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने मारपीट और थर्ड डिग्री देने के आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही सिविल लाइन थाने के दो दरोगाओं की भूमिका की भी जांच शुरू हो गई है। जांच के बाद सामने आएगी जिम्मेदारी मामले में पुलिस विभाग की ओर से आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि SOG और सिविल लाइन थाने के किन पुलिसकर्मियों की भूमिका रही और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

