मुरादाबाद में धीमरी गांव के रकबे की पैमाइश का काम फिर से शुरू हुआ है। ये वही गांव है जिसके हाईवे किनारे के 10 बीघा रकबे पर भाजपा महापौर विनोद अग्रवाल ने बाउंड्री बना ली थी। प्रशासन ने इस जमीन को सरकारी बताते हुए मेयर की बाउंड्री को बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया था। खाली कराई गई जमीन मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल को अलॉट कर दी गई थी। लेकिन प्रशासन के इस फैसले से नाखुश मेयर ने नए सिरे से नापजोख कराने की मांग की थी।
हालांकि, पूर्व में भी कई बार इस जमीन की पैमाइश हो चुकी है। तहसील टीम की पैमाइश को गलत बताते हुए मेयर विनोद अग्रवाल ने शिकायत की थी। जिसके बाद तत्कालीन डीएम अनुज सिंह ने खुद मौके पर खड़े होकर पैमाइश कराई थी। उनकी पैमाइश से भी भाजपा महापौर विनोद अग्रवाल संतुष्ट नहीं हुए थे। जिसके बाद उन्होंने कमिश्नर आंजनेय सिंह को अर्जी दी थी।
कमिश्नर ने गैर जनपद से टीम गठित करके इस भूमि की पैमाइश कराई थी। अनुज सिंह के बाद मुरादाबाद के डीएम बने आईएएस राजेंद्र पैंसिया ने सीएम कंपोजिट मॉडल स्कूल को आवंटित भूमि पर स्कूल निर्माण नहीं करने के आदेश दिए थे।
अब तीन दिन पहले इसी भूमि की फिर से पैमाइश के लिए कलेक्ट्रेट में अधिकारियों की एक बैठक बुलाई गई थी। जिस बैठक में मेयर विनोद अग्रवाल भी मौजूद रहे। इस मीटिंग के बाद फिर से धीमरी की इस जमीन की पैमाइश शुरू करा दी गई है। कांवड़ यात्रा की व्यस्तता के बीच भी यह पैमाइश जारी है। यहां तक कि रविवार को भी टीम ने मौके पर पैमाइश की। इस दौरान मेयर विनोद अग्रवाल और सीनियर अफसर भी मौके पर पहुंचे। मेयर की कोशिश है कि किसी तरह उनकी 10 बीघा जमीन उन्हें मिल जाए। मेयर का कहना है कि जिस जमीन को सरकारी बताकर प्रशासन ने उनकी बाउंड्री पर बुलडोजर चलाया है उसे उन्होंने आजाद समाज पार्टी के नेता हाजी चांद बाबू से खरीदा था।
दूसरी ओर भाजपा विधायक रितेश गुप्ता का कहना है कि, बेशक कोई किसी भी पद पर क्यों न बैठा हो, सरकारी जमीन कब्जाने के मामले में कड़ी कार्रवाई होनी ही चाहिए।

