करौली के राजकीय मेडिकल कॉलेज के सभागार में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ‘राज ममता-मन दर्पण’ कार्यक्रम हुआ। इसमें मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता संगोष्ठी रखी गई। इस संगोष्ठी में करीब 170 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को तनाव से निपटने, नशे के बुरे असर, मानसिक समस्याओं के शुरुआती लक्षणों को पहचानने और आत्महत्या रोकने के तरीकों की जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि मानसिक परेशानी होने पर समय पर सलाह और डॉक्टरों की मदद लेना बहुत जरूरी है। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और नियंत्रक डॉ. आरसी मीना ने बताया कि ‘मन दर्पण’ के पांच मॉड्यूल मानसिक समस्याओं के शुरुआती लक्षणों को पहचानने, समय पर सलाह लेने और इलाज में काम आते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता का संदेश दूसरे युवाओं तक पहुंचाएं। डॉ. मीना ने यह भी कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है। मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सतीश मीना ने कहा कि आत्महत्या को रोकना सिर्फ एक दिन का अभियान नहीं है। इसके लिए समाज के सभी लोगों को मिलकर कोशिश करनी होगी। उन्होंने बताया कि संवेदनशील बातचीत, मानसिक समस्याओं को समय पर पहचानना, भावनात्मक साथ देना और सही इलाज से लोग मुश्किल हालात से बाहर निकल सकते हैं। मनोचिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रेमराज मीना ने बताया कि पढ़ाई, करियर और सोशल मीडिया का दबाव युवाओं में तनाव बढ़ा सकता है। उन्होंने नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक बुरे असर के बारे में जानकारी दी। साथ ही, स्वस्थ दिनचर्या अपनाने और नशे की समस्या होने पर समय पर डॉक्टरों की मदद लेने पर जोर दिया। इस संगोष्ठी में डॉ. शिखा सक्सेना, डॉ. रचना शर्मा, डॉ. अंकुर विचबलिया, डॉ. अनिल नेहरा, डॉ. महेंद्र खींची, डॉ. शैलेंद्र गर्ग, डॉ. राजपाल मीना और डॉ. प्रीति जैसे फैकल्टी सदस्य मौजूद थे। इनके अलावा सीआरए गौरव शर्मा और कई विद्यार्थी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आखिर में बायोकेमिस्ट्री विभाग की अध्यक्ष डॉ. रचना शर्मा ने सभी का धन्यवाद किया।

