‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ नीति का दिख रहा असर:रग्बी के रण में गोल्ड पर बिहार की नजर, कोच ने कहा- पिछले 1 महीना से पसीना बहा रही टीम

‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ नीति का दिख रहा असर:रग्बी के रण में गोल्ड पर बिहार की नजर, कोच ने कहा- पिछले 1 महीना से पसीना बहा रही टीम

राजगीर के अत्याधुनिक खेल परिसर में आयोजित 13वीं सीनियर नेशनल रग्बी चैंपियनशिप में मेजबान बिहार की बेटियों ने लगातार दूसरी जीत दर्ज कर प्री-क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। इस शानदार प्रदर्शन के बीच मैदान पर खिलाड़ियों और कोच के उत्साह ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में खेल संस्कृति अब एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। तैयारी और सरकार का साथ बिहार महिला टीम के कोच और अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी सौरभ कुमार ने सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत और सरकारी सुविधाओं को दिया। उन्होंने कहा कि हमारी टीम पिछले एक महीने से कैंप में पसीना बहा रही है। बिहार सरकार खिलाड़ियों को हर छोटी-बड़ी सुविधा तुरंत उपलब्ध करा रही है, जिससे प्रदर्शन में निखार आया है। अंडर-20 इंटरनेशनल और अब नेशनल रग्बी जैसे आयोजनों से स्थानीय बच्चों में जागरूकता बढ़ी है। जब अपनी जमीन पर बड़े मुकाबले होते हैं, तो खेल संस्कृति और कॉम्पिटिशन लेवल दोनों में सुधार होता है। खिलाड़ियों का संकल्प: बिहार में मैच, तो गोल्ड भी बिहार का विगत चैंपियन बिहार टीम की कप्तान काजल कुमारी ने जीत के बाद आत्मविश्वास से लबरेज होकर कहा कि पिछली बार हमने लीग से लेकर फाइनल तक का सफर तय कर गोल्ड जीता था। इस बार भी हमारा लक्ष्य बिहार की धरती पर बिहार को गोल्ड दिलाना ही है। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी गुड़िया कुमारी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि बिहार का दबदबा रग्बी में हमेशा से रहा है। दर्शकों से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि टीम एक बार फिर चैंपियन बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना बनी संजीवनी मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों ने राज्य सरकार की नीतियों की जमकर सराहना की। कप्तान ने कहा कि मेडल लाओ, नौकरी पाओ योजना के तहत खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ सुरक्षित भविष्य की गारंटी मिल रही है। यही कारण है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों से भी खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर नौकरी पाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतर रहे हैं। राजगीर के अत्याधुनिक खेल परिसर में आयोजित 13वीं सीनियर नेशनल रग्बी चैंपियनशिप में मेजबान बिहार की बेटियों ने लगातार दूसरी जीत दर्ज कर प्री-क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। इस शानदार प्रदर्शन के बीच मैदान पर खिलाड़ियों और कोच के उत्साह ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में खेल संस्कृति अब एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। तैयारी और सरकार का साथ बिहार महिला टीम के कोच और अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी सौरभ कुमार ने सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत और सरकारी सुविधाओं को दिया। उन्होंने कहा कि हमारी टीम पिछले एक महीने से कैंप में पसीना बहा रही है। बिहार सरकार खिलाड़ियों को हर छोटी-बड़ी सुविधा तुरंत उपलब्ध करा रही है, जिससे प्रदर्शन में निखार आया है। अंडर-20 इंटरनेशनल और अब नेशनल रग्बी जैसे आयोजनों से स्थानीय बच्चों में जागरूकता बढ़ी है। जब अपनी जमीन पर बड़े मुकाबले होते हैं, तो खेल संस्कृति और कॉम्पिटिशन लेवल दोनों में सुधार होता है। खिलाड़ियों का संकल्प: बिहार में मैच, तो गोल्ड भी बिहार का विगत चैंपियन बिहार टीम की कप्तान काजल कुमारी ने जीत के बाद आत्मविश्वास से लबरेज होकर कहा कि पिछली बार हमने लीग से लेकर फाइनल तक का सफर तय कर गोल्ड जीता था। इस बार भी हमारा लक्ष्य बिहार की धरती पर बिहार को गोल्ड दिलाना ही है। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी गुड़िया कुमारी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि बिहार का दबदबा रग्बी में हमेशा से रहा है। दर्शकों से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि टीम एक बार फिर चैंपियन बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना बनी संजीवनी मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों ने राज्य सरकार की नीतियों की जमकर सराहना की। कप्तान ने कहा कि मेडल लाओ, नौकरी पाओ योजना के तहत खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ सुरक्षित भविष्य की गारंटी मिल रही है। यही कारण है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों से भी खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर नौकरी पाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतर रहे हैं।  

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