मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा कोतवाली क्षेत्र में उत्तराखंड से सटे इलाकों में तेंदुए का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को क्षेत्र में तेंदुए ने अलग-अलग स्थानों पर दो लोगों पर हमला कर उन्हें भीर रूप से घायल कर दिया। एक ही दिन में दो हमलों की घटनाओं से पूरे इलाके में भारी दहशत का माहौल है और ग्रामीण खेतों पर जाने से कतरा रहे हैं। तेंदुए के हमले की पहली घटना शुक्रवार सुबह की है। कोतवाली क्षेत्र के गांव राईभूड़ निवासी ओमप्रकाश पर तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया था, जिसमें वह घायल हो गए। इस घटना के बाद से ही वन विभाग और स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर था, लेकिन शाम होते-होते तेंदुए ने दूसरे गांव में एक और बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। दूसरा हमला शुक्रवार शाम करीब 5:30 बजे बलिया गांव में हुआ। बलिया गांव निवासी नरपत सिंह (55 वर्ष), पुत्र चोके सिंह, अपने घर से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित खेत से पशुओं के लिए चारा लेने गए थे। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाकर बैठे तेंदुए ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। तेंदुए ने नरपत सिंह को जमीन पर गिरा दिया और उनके चेहरे को बुरी तरह नोच डाला, जिससे वे लहूलुहान हो गए। नरपत सिंह ने हिम्मत दिखाते हुए शोर मचाना शुरू किया। नरपत सिंह की चीख-पुकार सुनकर कुछ ही दूरी पर पशु चरा रहे अन्य ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके की तरफ दौड़े। ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए और डंडे फटकारते हुए तेंदुए को घेरा, जिसके बाद तेंदुआ नरपत सिंह को छोड़कर वापस झाड़ियों की तरफ भाग गया। लहूलुहान हालत में नरपत सिंह को तुरंत राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत (विशेषकर चेहरे पर गहरे घाव) को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया है। एक ही दिन में दो अलग-अलग गांवों (राईभूड़ और बलिया) में तेंदुए के हमलों से पूरे ठाकुरद्वारा क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए की मौजूदगी के कारण अब खेतों में जाकर काम करना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में तुरंत पिंजरा लगाकर आदमखोर हो रहे तेंदुए को पकड़ा जाए, ताकि लोग चैन की सांस ले सकें।


