मुजफ्फरपुर- चावल से बाबा गरीबनाथ का महाश्रृंगार:सोमवारी के साथ प्रदोष तिथि का भी संयोग, महाआरती में गूंजा हर-हर महादेव

मुजफ्फरपुर- चावल से बाबा गरीबनाथ का महाश्रृंगार:सोमवारी के साथ प्रदोष तिथि का भी संयोग, महाआरती में गूंजा हर-हर महादेव

मुजफ्फरपुर में श्रावण मास की दूसरी सोमवारी(10 अगस्त 2026) पर बाबा गरीबनाथ धाम में भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। दूसरी सोमवारी के साथ प्रदोष तिथि के संयोग पर बाबा गरीबनाथ का विशेष महाश्रृंगार किया गया। दूध, दही, घी, मधु और शक्कर से बाबा का स्नान कराने के बाद चंदन का लेप लगाया गया। जनेऊ अर्पित किया गया। इसके बाद फूलों और विशेष रूप से चावल से बाबा का महाश्रृंगार किया गया। महाश्रृंगार के बाद बाबा गरीबनाथ की भव्य महाआरती हुई। बाबा की मनमोहक छटा के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। महाआरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और जय बाबा गरीबनाथ के जयघोष से गूंज उठा। दूसरी सोमवारी पर चावल से महाशृंगार की परंपरा बाबा गरीबनाथ मंदिर के पुजारी अभिषेक पाठक ने बताया कि दूसरी सोमवारी पर बाबा का चावल से महाश्रृंगार करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। शिव पूजन में चावल अर्पित करने का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव को चावल अर्पित करने से यश और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। सबसे पहले बाबा का पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद चंदन का लेप, जनेऊ और फूल अर्पित किए गए। अंत में चावल से बाबा का विशेष महाश्रृंगार किया गया। प्रदोष तिथि का संयोग भी रहा खास इस बार दूसरी सोमवारी के दिन प्रदोष तिथि का भी संयोग रहा। पुजारी अभिषेक पाठक ने बताया कि सोमवारी और प्रदोष का संयोग धार्मिक रूप से विशेष शुभ माना जाता है। प्रदोष व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं और संतान की कामना करने वाले श्रद्धालु भी करते हैं। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा और आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। महाआरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह बाबा के महाश्रृंगार के बाद जैसे ही महाआरती शुरू हुई, मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भक्ति में डूब गए। घंटियों और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने बाबा गरीबनाथ के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की। चावल और फूलों से सजे बाबा गरीबनाथ की भव्य छवि श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रही। बाबा गरीबनाथ के दरबार में यह परंपरा श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जाती है। दूसरी सोमवारी पर चावल से होने वाला महाश्रृंगार बाबा के प्रति भक्तों की आस्था और परंपरा का प्रतीक है। मुजफ्फरपुर में श्रावण मास की दूसरी सोमवारी(10 अगस्त 2026) पर बाबा गरीबनाथ धाम में भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। दूसरी सोमवारी के साथ प्रदोष तिथि के संयोग पर बाबा गरीबनाथ का विशेष महाश्रृंगार किया गया। दूध, दही, घी, मधु और शक्कर से बाबा का स्नान कराने के बाद चंदन का लेप लगाया गया। जनेऊ अर्पित किया गया। इसके बाद फूलों और विशेष रूप से चावल से बाबा का महाश्रृंगार किया गया। महाश्रृंगार के बाद बाबा गरीबनाथ की भव्य महाआरती हुई। बाबा की मनमोहक छटा के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। महाआरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और जय बाबा गरीबनाथ के जयघोष से गूंज उठा। दूसरी सोमवारी पर चावल से महाशृंगार की परंपरा बाबा गरीबनाथ मंदिर के पुजारी अभिषेक पाठक ने बताया कि दूसरी सोमवारी पर बाबा का चावल से महाश्रृंगार करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। शिव पूजन में चावल अर्पित करने का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव को चावल अर्पित करने से यश और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। सबसे पहले बाबा का पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद चंदन का लेप, जनेऊ और फूल अर्पित किए गए। अंत में चावल से बाबा का विशेष महाश्रृंगार किया गया। प्रदोष तिथि का संयोग भी रहा खास इस बार दूसरी सोमवारी के दिन प्रदोष तिथि का भी संयोग रहा। पुजारी अभिषेक पाठक ने बताया कि सोमवारी और प्रदोष का संयोग धार्मिक रूप से विशेष शुभ माना जाता है। प्रदोष व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं और संतान की कामना करने वाले श्रद्धालु भी करते हैं। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा और आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। महाआरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह बाबा के महाश्रृंगार के बाद जैसे ही महाआरती शुरू हुई, मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भक्ति में डूब गए। घंटियों और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने बाबा गरीबनाथ के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की। चावल और फूलों से सजे बाबा गरीबनाथ की भव्य छवि श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रही। बाबा गरीबनाथ के दरबार में यह परंपरा श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जाती है। दूसरी सोमवारी पर चावल से होने वाला महाश्रृंगार बाबा के प्रति भक्तों की आस्था और परंपरा का प्रतीक है।  

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