कानपुर देहात। आज के दौर में जहां बड़ी संख्या में युवा नौकरी की तलाश में परेशान हैं और रोजगार के लिए अपने घर-परिवार से दूर दूसरे शहरों का रुख कर रहे हैं, वहीं कानपुर देहात के हाशिम गांव के रहने वाले 24 वर्षीय आशीष कुमार ने अपने गांव में ही रोजगार का रास्ता तलाश लिया। आशीष ने नौकरी के पीछे भागने के बजाय खुद का कारोबार शुरू करने का फैसला किया। आज वह न सिर्फ अपनी मेहनत से अपने सपनों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि गांव के आसपास के करीब 10 लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। खास बात यह है कि आशीष एमएससी की पढ़ाई भी कर रहे हैं और इसके साथ अपने कारोबार को भी आगे बढ़ा रहे हैं। आशीष कुमार के पिता उमाशंकर खेती-किसानी करते हैं। परिवार का खेती से जुड़ा काम जारी है, वहीं आशीष ने करीब ढाई साल पहले मिट्टी के कुल्हड़ बनाने का कारोबार शुरू किया। इस काम के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री माटी कला योजना के तहत चार लाख रुपये का लोन लिया और अपनी मेहनत से कारोबार को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। शुरुआत में देखा गया सपना आज एक छोटे उद्योग का रूप ले चुका है। अब उनके यहां प्रतिदिन करीब 25 हजार कुल्हड़ों का उत्पादन हो रहा है। पढ़ाई के साथ कारोबार, परिवार भी बना ताकत आशीष के इस सफर में उनका परिवार भी बराबर साथ दे रहा है। पिता उमाशंकर खेती-किसानी के साथ कारोबार में हाथ बंटाते हैं, तो मां भी काम में सहयोग करती हैं। परिवार के सहयोग और आशीष की मेहनत से कारखाने में आसपास के करीब 10 लोगों को काम मिला है। यहां कोई कुल्हड़ों को आकार देने में जुटा है, तो कोई उन्हें सुखाने और भट्ठी में तैयार करने का काम करता है। मिट्टी को आकार देकर उपयोगी उत्पाद बनाने की यह प्रक्रिया कई लोगों की रोजी-रोटी का सहारा बन गई है। चाय, दूध और लस्सी के लिए तैयार होते हैं कुल्हड़

