छह साल की बच्ची से दुराचार के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी जूता कारीगर को दोषी मानते हुए 20 साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट संगीता कुमारी ने पीड़िता के बयान और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने पीड़िता को प्रतिकर दिलाने के लिए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश भी दिए हैं। वादी के घर में जूता कारीगर था आरोपी मामला थाना हरीपर्वत क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार आरोपी बंटी पुत्र राधे निवासी रतनपुरा, आगरा, पीड़िता के परिवार के यहां संचालित जूता कारखाने में कारीगर के रूप में काम करता था। 13 जून 2020 को आरोपी ने वादी की छह वर्षीय बेटी के साथ उसके घर में ही दुराचार किया। बच्ची की चीख सुनकर उसकी मां मौके पर पहुंची तो आरोपी वहां से भाग गया। परिवार ने आरोपी के घर जाकर शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन वह वहां से भी फरार हो गया। इसके बाद पीड़िता के परिवार की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुराचार और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और जांच पूरी करने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। पीड़िता समेत इन लोगों की हुई गवाही मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता, उसकी मां और पिता की गवाही कराई गई। इसके अलावा डॉक्टर नीता कुलश्रेष्ठ, विवेचक अजय कौशल और पुलिसकर्मी सुमित कुमार ने भी अदालत में अपने बयान दर्ज कराए। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से आरोपी को निर्दोष साबित करने के लिए जसवंत सिंह और पवन कुमार को गवाह के तौर पर पेश किया गया। पीड़िता के बयान को माना अहम विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट संगीता कुमारी ने मामले में पीड़िता के बयान और विशेष लोक अभियोजक विमलेश आनंद की ओर से रखे गए तर्कों को प्रमुख आधार माना। कोर्ट ने आरोपी बंटी को दोषी पाते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। कोर्ट ने पीड़िता को प्रतिकर दिलाने की कार्रवाई के लिए फैसले की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के भी आदेश दिए हैं।

