अभी उसने दुनिया में आंखें खोली ही थी। दोपहर के 3:45 बज रहे थे। दादा ने उसके जन्म पर खुशी से कहा- ‘देव’ आ गया। 8 घंटे बाद ही बच्चे की मां की मौत हो गई। बेटे के जन्म के एक घंटे बाद ही उसे तेज दर्द शुरू हो गया था। वह दर्द से कराहते हुए डॉक्टर से इलाज की गुहार लगाती रही। 7 घंटे बाद इलाज मिला, लेकिन तक तक देर हो गई थी। यह घटना पटना के राजा बाजार स्थित एक निजी नर्सिंग होम की है। मां राजलक्ष्मी की मौत क्यों हुई? डॉक्टर पर लापरवाही के क्या आरोप हैं? डॉक्टर का क्या कहना है? पढ़िए रिपोर्ट..। ऑपरेशन से बेटे का हुआ जन्म, फिर शुरू हो गया तेज दर्द देव के नाना केके लाल पेशे से पत्रकार हैं। इन्होंने वर्षों तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए पत्रकारिता की है। उनकी बेटी राजलक्ष्मी प्रखंड कृषि पदाधिकारी थी। देव हमें अपने नाना के घर में आराम से सोता मिला। केके लाल ने बताया, ‘11 अक्टूबर की शाम बेटी राजलक्ष्मी को नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। 12 अक्टूबर को सुबह 9 बजे ऑपरेशन का समय दिया गया था, लेकिन समय बदलकर दोपहर के 3 बजे किया गया।’ ‘तीन बजे राजलक्ष्मी को ओटी में ले जाया गया। 3:45 बजे देव का जन्म हुआ। 4:30 बजे राज राजलक्ष्मी को ओटी से नर्सिंग होम के कमरे में शिफ्ट किया गया। थोड़ी देर में उसे तेज दर्द शुरू हुआ जो बर्दाश्त से बाहर होता चला गया।’ उन्होंने कहा, ‘सर्जरी करने वाली डॉक्टर पूनम दीक्षित ने 6:30 बजे शाम को आकर देखा। राजलक्ष्मी ने बताया कि बहुत दर्द हो रहा है। काफी प्यास लग रही है। यह सुनकर डॉक्टर चली गई। शाम 8 बजे के बाद दर्द ने जीना मुहाल कर दिया।’ ‘नर्स ने कहा कि दर्द कम हो जाएगा, लेकिन कम नहीं हुआ। 8.30 बजे राजलक्ष्मी ने नर्स से कहा कि डॉक्टर को जल्दी बुलाओ नहीं तो मारूंगी तुम सबों को। उसके इतना कहने पर भी किसी को रहम नहीं आई। डॉक्टर पूनम दीक्षित रात 11 बजकर 20 मिनट पर अपने पति डॉ. अजय कुमार शर्मा के साथ नर्सिंग होम पहुंची।’ रात 11:40 बजे राजलक्ष्मी को फिर से ऑपरेशन थियेटर ले गए डॉक्टर केके लाल ने कहा, ‘ऑपरेशन के बाद डॉक्टर दंपत्ति पूनम दीक्षित और अजय कुमार शर्मा शाम 6:30 बजे घर चले गए थे। दोनों रात 11:20 में आए। 11:40 बजे स्ट्रेचर बुलाकर दर्द से कराहती राजलक्ष्मी को फिर से ऑपरेशन थियेटर में ले गए।’ ‘डॉ. अजय ने डॉ. पूनम दीक्षित से कहा कि पैड पर खून है। लगता है यूट्रस में खून जम गया है, लेकिन डॉ. पूनम ने पति से चुप रहने को कहा। ओटी में ले जाने के बाद 12:30 बजे तक अंदर क्या हो रहा है कोई जानकारी नहीं दी गई।’ ‘12:45 बजे हम लोग थर्ड फ्लोर पर पहुंचे कि आखिर वहां क्या हो रहा है। डॉ. अजय कुमार शर्मा ने बताया कि आपकी बेटी राजलक्ष्मी को कार्डियक अरेस्ट हो गया है, उसका शरीर रिस्पांस नहीं कर रहा है।’ इतना बताते-बताते केके लाल की आंखों से आंसू बहने लगे। उन्होंने अपने आंसू पोंछे, कुछ पल ठहरने के बाद कहा, ‘बड़े जतन से बेटी को पाला था। पढ़ने में काफी होशियार थी। पटना के बेली रोड स्थित सेंट्रल स्कूल से प्लस टू, शांति निकेतन से बीएससी और बीएचयू से एमएससी किया था। मेरठ से पीएचडी कर रही थी। पटना जिला में प्रखंड कृषि पदाधिकारी के पद पर काम कर रही थी। राजलक्ष्मी की शादी चेतन आनंद से हुई थी।’ डॉक्टर ने बताया- पल्मोनरी एम्बॉजिल्म से गई जान केके लाल ने बताया, ‘समरी ऑफ डेथ डिस्चार्ज में टाइमिंग भी गलत लिखा गया है। एक बजे रात को राजलक्ष्मी की मौत होने की बात कही गई है। डॉ. पूनम दीक्षित ने हमलोगों को बताया कि उसे पल्मोनरी एम्बॉजिल्म हो गया था, जिसके चलते उसे बचाया नहीं जा सका।’ ‘मेरी बेटी की स्थिति पूरी तरह ठीक थी जब वह अस्पताल आयी थी। ऑपरेशन के लिए ओटी में जाते समय भी वह अच्छी थी। ऑपरेशन से बच्चा होने के बाद से ही दर्द से परेशान थी। शाम छह बजे से तेजी से दर्द बढ़ने लगा था।’ ‘6:30 बजे डॉक्टर उसे देख कर गईं तो फिर रात 11 बजकर 20 मिनट पर देखने आईं। इस बीच उसे नर्सों के भरोसे छोड़ दिया गया। नर्स स्थिति को संभाल नहीं सकीं। ऑपरेशन के बाद जब दर्द काफी था तो किसी डॉक्टर की निगरानी में राजलक्ष्मी को रखना चाहिए था।’ ‘4-5 घंटे तक कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। इस बीच बेटी को डॉक्टर की सख्त जरूरत थी। समय से देखभाल होती तो उसे बचाया जा सकता था। सबसे ज्यादा ज्यादती तो बच्चे के साथ हो गई। मेरा पूरा परिवार टूट गया है। मेरी पत्नी किसी से ठीक से बात करने की स्थिति में नहीं है।’ केके लाल ने कहा, ‘डॉक्टर अपनी गलती के लिए माफी के लायक नहीं हैं। इन्हें तो कम से कम फांसी की सजा मिलनी चाहिए। तुरंत जेल भेजा जाना चाहिए और अस्पताल को सील किया जाना चाहिए।’ ‘डॉक्टर दावा करती हैं कि नर्सिंग होम को NABH (नेशनल एग्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) का सर्टिफिकेट प्राप्त है, जबकि इस अस्पताल में ऐसी तमाम सुविधाएं हैं ही नहीं। अस्पताल का ओटी खंडहर जैसा है।’ अब पढ़िए, डॉक्टर पूनम दीक्षित ने भास्कर की बातचीत डॉक्टर- हां बोलिए आपने फोन किया था? रिपोर्टर- आपके नर्सिंग होम में इलाज के दौरान राजलक्ष्मी नामक कृषि पदाधिकारी की मौत हो गई। उसने एक बच्चे को जन्म दिया था। डॉक्टर- आप उनको कैसे जानते हैं? रिपोर्टर- जानते हैं, मैं राजलक्ष्मी के पिता केके लाल के घर गया था। उन्होंने आपलोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉक्टर- आप लोगों ने पहले तो खबर छापी ही है। उसमें कई आरोप गलत लगाए गए हैं। तथ्य की गड़बड़ी है। रिपोर्टर- पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है। इस पर आपका क्या कहना है? इलाज में आपलोगों ने लापरवाही क्यों की? डॉक्टर- इस घटना से हमलोगों को भी काफी दुख है, लेकिन फोन पर बातचीत उचित नहीं है। रिपोर्टर- आप बताइए कहां आना है, आप कहेंगी तो नर्सिंग होम आकर आपका पक्ष ले लेंगे, नर्सिंग होम के नंबर पर फोन किया था, लेकिन पता चला कि आप वहां नहीं हैं। डॉक्टर- मैं अपने वकील से बात करके आपको दो मिनट में फोन करती हूं। (डॉक्टर पूनम दीक्षित का फोन नहीं आया) अभी उसने दुनिया में आंखें खोली ही थी। दोपहर के 3:45 बज रहे थे। दादा ने उसके जन्म पर खुशी से कहा- ‘देव’ आ गया। 8 घंटे बाद ही बच्चे की मां की मौत हो गई। बेटे के जन्म के एक घंटे बाद ही उसे तेज दर्द शुरू हो गया था। वह दर्द से कराहते हुए डॉक्टर से इलाज की गुहार लगाती रही। 7 घंटे बाद इलाज मिला, लेकिन तक तक देर हो गई थी। यह घटना पटना के राजा बाजार स्थित एक निजी नर्सिंग होम की है। मां राजलक्ष्मी की मौत क्यों हुई? डॉक्टर पर लापरवाही के क्या आरोप हैं? डॉक्टर का क्या कहना है? पढ़िए रिपोर्ट..। ऑपरेशन से बेटे का हुआ जन्म, फिर शुरू हो गया तेज दर्द देव के नाना केके लाल पेशे से पत्रकार हैं। इन्होंने वर्षों तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए पत्रकारिता की है। उनकी बेटी राजलक्ष्मी प्रखंड कृषि पदाधिकारी थी। देव हमें अपने नाना के घर में आराम से सोता मिला। केके लाल ने बताया, ‘11 अक्टूबर की शाम बेटी राजलक्ष्मी को नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। 12 अक्टूबर को सुबह 9 बजे ऑपरेशन का समय दिया गया था, लेकिन समय बदलकर दोपहर के 3 बजे किया गया।’ ‘तीन बजे राजलक्ष्मी को ओटी में ले जाया गया। 3:45 बजे देव का जन्म हुआ। 4:30 बजे राज राजलक्ष्मी को ओटी से नर्सिंग होम के कमरे में शिफ्ट किया गया। थोड़ी देर में उसे तेज दर्द शुरू हुआ जो बर्दाश्त से बाहर होता चला गया।’ उन्होंने कहा, ‘सर्जरी करने वाली डॉक्टर पूनम दीक्षित ने 6:30 बजे शाम को आकर देखा। राजलक्ष्मी ने बताया कि बहुत दर्द हो रहा है। काफी प्यास लग रही है। यह सुनकर डॉक्टर चली गई। शाम 8 बजे के बाद दर्द ने जीना मुहाल कर दिया।’ ‘नर्स ने कहा कि दर्द कम हो जाएगा, लेकिन कम नहीं हुआ। 8.30 बजे राजलक्ष्मी ने नर्स से कहा कि डॉक्टर को जल्दी बुलाओ नहीं तो मारूंगी तुम सबों को। उसके इतना कहने पर भी किसी को रहम नहीं आई। डॉक्टर पूनम दीक्षित रात 11 बजकर 20 मिनट पर अपने पति डॉ. अजय कुमार शर्मा के साथ नर्सिंग होम पहुंची।’ रात 11:40 बजे राजलक्ष्मी को फिर से ऑपरेशन थियेटर ले गए डॉक्टर केके लाल ने कहा, ‘ऑपरेशन के बाद डॉक्टर दंपत्ति पूनम दीक्षित और अजय कुमार शर्मा शाम 6:30 बजे घर चले गए थे। दोनों रात 11:20 में आए। 11:40 बजे स्ट्रेचर बुलाकर दर्द से कराहती राजलक्ष्मी को फिर से ऑपरेशन थियेटर में ले गए।’ ‘डॉ. अजय ने डॉ. पूनम दीक्षित से कहा कि पैड पर खून है। लगता है यूट्रस में खून जम गया है, लेकिन डॉ. पूनम ने पति से चुप रहने को कहा। ओटी में ले जाने के बाद 12:30 बजे तक अंदर क्या हो रहा है कोई जानकारी नहीं दी गई।’ ‘12:45 बजे हम लोग थर्ड फ्लोर पर पहुंचे कि आखिर वहां क्या हो रहा है। डॉ. अजय कुमार शर्मा ने बताया कि आपकी बेटी राजलक्ष्मी को कार्डियक अरेस्ट हो गया है, उसका शरीर रिस्पांस नहीं कर रहा है।’ इतना बताते-बताते केके लाल की आंखों से आंसू बहने लगे। उन्होंने अपने आंसू पोंछे, कुछ पल ठहरने के बाद कहा, ‘बड़े जतन से बेटी को पाला था। पढ़ने में काफी होशियार थी। पटना के बेली रोड स्थित सेंट्रल स्कूल से प्लस टू, शांति निकेतन से बीएससी और बीएचयू से एमएससी किया था। मेरठ से पीएचडी कर रही थी। पटना जिला में प्रखंड कृषि पदाधिकारी के पद पर काम कर रही थी। राजलक्ष्मी की शादी चेतन आनंद से हुई थी।’ डॉक्टर ने बताया- पल्मोनरी एम्बॉजिल्म से गई जान केके लाल ने बताया, ‘समरी ऑफ डेथ डिस्चार्ज में टाइमिंग भी गलत लिखा गया है। एक बजे रात को राजलक्ष्मी की मौत होने की बात कही गई है। डॉ. पूनम दीक्षित ने हमलोगों को बताया कि उसे पल्मोनरी एम्बॉजिल्म हो गया था, जिसके चलते उसे बचाया नहीं जा सका।’ ‘मेरी बेटी की स्थिति पूरी तरह ठीक थी जब वह अस्पताल आयी थी। ऑपरेशन के लिए ओटी में जाते समय भी वह अच्छी थी। ऑपरेशन से बच्चा होने के बाद से ही दर्द से परेशान थी। शाम छह बजे से तेजी से दर्द बढ़ने लगा था।’ ‘6:30 बजे डॉक्टर उसे देख कर गईं तो फिर रात 11 बजकर 20 मिनट पर देखने आईं। इस बीच उसे नर्सों के भरोसे छोड़ दिया गया। नर्स स्थिति को संभाल नहीं सकीं। ऑपरेशन के बाद जब दर्द काफी था तो किसी डॉक्टर की निगरानी में राजलक्ष्मी को रखना चाहिए था।’ ‘4-5 घंटे तक कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। इस बीच बेटी को डॉक्टर की सख्त जरूरत थी। समय से देखभाल होती तो उसे बचाया जा सकता था। सबसे ज्यादा ज्यादती तो बच्चे के साथ हो गई। मेरा पूरा परिवार टूट गया है। मेरी पत्नी किसी से ठीक से बात करने की स्थिति में नहीं है।’ केके लाल ने कहा, ‘डॉक्टर अपनी गलती के लिए माफी के लायक नहीं हैं। इन्हें तो कम से कम फांसी की सजा मिलनी चाहिए। तुरंत जेल भेजा जाना चाहिए और अस्पताल को सील किया जाना चाहिए।’ ‘डॉक्टर दावा करती हैं कि नर्सिंग होम को NABH (नेशनल एग्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) का सर्टिफिकेट प्राप्त है, जबकि इस अस्पताल में ऐसी तमाम सुविधाएं हैं ही नहीं। अस्पताल का ओटी खंडहर जैसा है।’ अब पढ़िए, डॉक्टर पूनम दीक्षित ने भास्कर की बातचीत डॉक्टर- हां बोलिए आपने फोन किया था? रिपोर्टर- आपके नर्सिंग होम में इलाज के दौरान राजलक्ष्मी नामक कृषि पदाधिकारी की मौत हो गई। उसने एक बच्चे को जन्म दिया था। डॉक्टर- आप उनको कैसे जानते हैं? रिपोर्टर- जानते हैं, मैं राजलक्ष्मी के पिता केके लाल के घर गया था। उन्होंने आपलोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉक्टर- आप लोगों ने पहले तो खबर छापी ही है। उसमें कई आरोप गलत लगाए गए हैं। तथ्य की गड़बड़ी है। रिपोर्टर- पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है। इस पर आपका क्या कहना है? इलाज में आपलोगों ने लापरवाही क्यों की? डॉक्टर- इस घटना से हमलोगों को भी काफी दुख है, लेकिन फोन पर बातचीत उचित नहीं है। रिपोर्टर- आप बताइए कहां आना है, आप कहेंगी तो नर्सिंग होम आकर आपका पक्ष ले लेंगे, नर्सिंग होम के नंबर पर फोन किया था, लेकिन पता चला कि आप वहां नहीं हैं। डॉक्टर- मैं अपने वकील से बात करके आपको दो मिनट में फोन करती हूं। (डॉक्टर पूनम दीक्षित का फोन नहीं आया)

