मां उठ जाओ’, लाश थप-थपाकर कर रोती रही बेटी:चश्मदीद बोले- लोगों को कुचलते हुए निकल गई भीड़; लखीसराय में 7 मौतों की आंखों देखी

मां उठ जाओ’, लाश थप-थपाकर कर रोती रही बेटी:चश्मदीद बोले- लोगों को कुचलते हुए निकल गई भीड़; लखीसराय में 7 मौतों की आंखों देखी

“आ… माय गे… माय, गे… माय… उठ न गे…।” 18 साल की बंटी कुमारी अपनी मां रिंकु देवी के चेहरे को हाथों से थपथपाकर उन्हें उठाने की कोशिश करती है। रोते हुए वह कहती है- “मां, अब उठ जाओ…।” आसपास मौजूद महिलाएं भी चीख-चीखकर रो रही हैं और साथ ही बंटी को संभालने की कोशिश कर रही हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इस बच्ची को किस तरह हिम्मत दें। इस नन्हीं-सी जान ने दो साल पहले ही अपने पिता को खो दिया था। अब मां भी चली गईं। बंटी की मां उन सात लोगों में शामिल थीं, जिनकी मौत लखीसराय के अशोक धाम में मची भगदड़ में हो गई। सोमवार को लखीसराय में भगदड़ में 7 महिलाओं की मौत हो गई। इसमें एक ही परिवार की तीन गोतनी हेमलता (55), ललिता (50) और सविता (30) शामिल हैं। दो महिलाएं लखीसराय की हैं। एक मुंगेर और एक पटना की बताई जा रहीं हैं। हादसे की 2 तस्वीरें देखिए…
लखीसराय के अशोक धाम में भगदड़ कैसे मची? घटना के वक्त क्या हुआ? क्यों यह नौबत आई? पढ़िए रिपोर्ट..। बेटे-बेटी की नौकरी के लिए पूजा करने गई थी मां पांच बहनों में बंटी सबसे छोटी है। वह BA पार्ट-1 की छात्रा है। सुजीत कुमार इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। वहीं, बड़ा भाई छोटू कुमार मैट्रिक पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ चुका है। पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी छोटू के कंधों पर आ गई थी। उसने मजदूरी कर अपने छोटे भाई सुजीत और बहन बंटी की पढ़ाई का खर्च उठाया है। रिंकु देवी की सबसे बड़ी इच्छा थी कि बेटा सुजीत और बेटी बंटी पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी करें। वह भगवान शिव की बड़ी भक्त थीं। आसपास होने वाली शिवचर्चा में नियमित रूप से शामिल होती थीं। बेटा-बेटी को सरकारी नौकरी मिले इस कामना से अशोक धाम मंदिर में जलाभिषेक और पूजा करने गई थीं। बंटी अपनी मां की बेहद लाडली थी। रक्षाबंधन को लेकर मां से उसने वादा किया था कि नए कपड़े दिलाएगी। मां की मौत के बाद बंटी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार अपनी मां को याद कर बदहवास हो जा रही है। हादसे के बाद की दो तस्वीरें… 2 साल पहले पिता की मौत, अब भगदड़ में मां भी मर गई मृतका रिंकू के देवर बिराज कुमार ने बताया, “रविवार की शाम करीब 4 बजे भाभी अपनी बहन के पास लखीसराय गई थी। उनके साथ उनका बेटा भी गया था। भाभी ने कहा था कि सोमवारी के मौके पर अशोक धाम मंदिर में पूजा करने की बहुत समय से इच्छा है। वह रविवार शाम मुंगेर से लखीसराय चली गई थी। सोमवार सुबह 5 बजे अपनी बहन के साथ अशोक धाम में जल चढ़ाने पहुंची। इसी दौरान वहां भगदड़ मच गई। मुझे घटना की जानकारी भतीजे से मिली। उसने फोन कर रोते हुए कहा- चाचा भगदड़ में दबने से मम्मी की मौत हो गई।” बिराज ने बताया मृतका के पति की करीब दो साल पहले मौत हो गई थी। उन्हें शुगर था। मृतका को पांच बेटियां और दो बेटे हैं। चार बेटियों की शादी हो चुकी है। घर में एक बेटी और दोनों बेटे बचे हैं। सबसे छोटा बेटा सुजीत कुमार है। उससे बड़ा भाई छोटू कुमार है। उसने अपनी मां को मुखाग्नि दी है। अब पढ़िए चश्मदीद अशोक की आंखों देखी घटना के बाद सामने आए वीडियो में मौके की भयावह तस्वीर दिखाई दे रही है। कहीं टूटे हुए बांस बिखरे हैं तो कहीं पूजा की सामग्री और लोगों का सामान जमीन पर पड़ा है। चश्मदीद अशोक ने कहा, “मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर तक लंबी लाइन लगी हुई थी। सभी लोग एक-दूसरे से सटकर खड़े थे। बगल में खेत था, जहां जंगली पौधे लगे थे। मैं भी वहीं मौजूद था।” उन्होंने बताया, “अचानक हल्ला हुआ। लाइन में खड़े लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही बांस का बैरिकेड टूटने लगा। कोई बच्चे को गोद में उठाकर भागा तो किसी ने अपनों का हाथ पकड़कर भीड़ से निकलने की कोशिश की। कुछ ही पलों में पूजा का माहौल चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गया। भीड़ में 5 साल से कम उम्र के 10 से ज्यादा बच्चे भी शामिल थे।” घटना कैसे और क्यों हुई, पुलिसकर्मी क्या कर रहे थे? 1. अचानक बिजली का पोल गिरा प्रत्यक्षदर्शी मोनी ने बताया, “मैं चाची और गांव की कुछ महिलाओं के साथ पूजा करने के लिए अशोक धाम मंदिर गई थी। जब हमलोग मंदिर पहुंचे, तब श्रद्धालु लाइन में लगकर पूजा के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। उस समय तक स्थिति ठीक थी।” मोनी के कहा, “श्रद्धालुओं की लाइन के पास अचानक बिजली का पोल गिर गया। पोल गिरते ही लाइन में खड़े लोगों में डर फैल गया। समझ नहीं आया कि अचानक क्या हुआ? कुछ लोग पीछे हटने लगे तो कुछ बचने के लिए इधर-उधर भागने लगे।” 2. डर से श्रद्धालु भागने लगे, बैरिकेड टूटा मोनी के मुताबिक, “पोल गिरने के बाद वहां मौजूद लोगों को डर था कि कहीं बिजली का तार पानी में न गिर गया हो और करंट फैल गया हो। आसपास धान के खेतों में पानी भरा हुआ था। ऐसे में करंट लगने की आशंका से श्रद्धालु ज्यादा घबरा गए।” “लोगों को लगा कि पानी में करंट फैल सकता है। इसी डर में श्रद्धालु सुरक्षित जगह की तलाश में इधर-उधर भागने लगे। भीड़ ज्यादा होने के कारण किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। श्रद्धालुओं को लाइन में रखने के लिए बीच-बीच में बांस की बैरिकेडिंग बनाई गई थी। भगदड़ के दौरान ये बैरिकेड टूट गए। बैरिकेड के दूसरी तरफ गड्ढे जैसी जगह थी। भीड़ के दबाव के कारण कई लोग उस तरफ गिरने लगे।” 3. एक के ऊपर एक गिरते गए लोग मोनी ने कहा, “इसके बाद स्थिति बेहद भयावह हो गई। भागते हुए लोग आगे गिरने वालों को देख नहीं पाए और एक के ऊपर एक गिरते चले गए। कुछ ही देर में वहां लोगों का ढेर लग गया। मैं खुद भी भीड़ में दब गई थी। इसी वजह से मुझे काफी चोटें आईं हैं। चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल था। लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि किसी को यह समझ नहीं आ रहा था कि किस तरफ जाएं।” पर्याप्त पुलिस व्यवस्था नहीं थी मोनी ने आगे बताया, “जब मैं पूजा करने पहुंची थी तब वहां ज्यादा पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थे। भगदड़ मचने के आधे घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। अगर पहले से पुलिस की टीम अच्छे से मौजूद रहती तो शायद हादसा नहीं होता। अगर पुलिस मौजूद रहती तो बिजली का पोल गिरने के बाद तत्काल लोगों को पीछे हटा सकती थी। भीड़ को नियंत्रित कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पुलिसकर्मियों की पर्याप्त मौजूदगी नहीं होने के कारण लोगों में डर और बढ़ गया।” हादसे से पहले हजार भक्त पर 4 पुलिसकर्मी थे मौजूद वहीं, नालंदा जिले के थाना गांव निवासी हरजीत कुमार ने अशोक धाम हादसे की भयावह स्थिति बताते हुए कहा, “मैं मौके पर मौजूद था। श्रद्धालु दर्शन के लिए लाइन में लगे हुए थे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक बिजली का पोल गिरने के बाद भगदड़ की स्थिति बन गई। जिस जगह बांस की बैरिकेडिंग लगाई गई थी, वहां सिर्फ चार पुलिसकर्मी मौजूद थे। भीड़ बढ़ने के बाद मैंने पुलिसकर्मियों से लोगों को संभालने की अपील की, लेकिन स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी कि पुलिस के लिए भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। पोल गिरने से पहले वहां कोई बड़ी परेशानी नहीं थी। पोल गिरने के बाद अचानक लोग घबरा गए और भगदड़ मच गई। देखते ही देखते महिलाएं गिरने लगीं। हरजीत और मेरे साथ मौजूद कुछ लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना महिलाओं को बचाने की कोशिश की।” पुलिस से नहीं संभला तो लोगों ने महिलाओं को खींचना शुरू किया हरजीत ने बताया, “हादसे के दौरान पुलिसकर्मी भी घबरा गए थे। जब मुझे लगा कि स्थिति पुलिस के नियंत्रण से बाहर हो रही है तो मैंने तीन-चार अन्य लोगों के साथ मिलकर बचाव का काम शुरू कर दिया। मैं लोगों को आवाज देकर कह रहा था कि महिलाओं को बाहर निकालो। इसके बाद हमने जमीन पर गिरी महिलाओं को खींचकर बाहर निकालना शुरू किया। मैं बांस की बैरिकेडिंग के ऊपर से कूदकर दूसरी तरफ पहुंचा और महिलाओं को निकालने लगा। करीब 15-20 महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। 3-4 साल के कई बच्चे थे। उन्हें कंधे पर उठाकर भीड़ से बाहर निकाला गया।” हादसे को याद करते हुए हरजीत ने कहा, मौत के बहुत करीब से आए हैं। आज लगा कि हम भी चले जाएंगे, लेकिन भोले बाबा की कृपा थी, इसलिए बच गए और दूसरों को भी बचा पाए। मेरी तीन जेठानी की एक साथ मौत हो गई मीना देवी ने बताया, “मेरी तीन जेठानी हेमलता (55), ललिता (50) और सविता (30) गांव की कुछ महिलाओं के साथ अशोक धाम मंदिर में पूजा करने के लिए सुबह 5 बजे घर से निकलीं थीं। डेढ़ घंटे बाद जानकारी मिली की मेरी तीनों जेठानी की मंदिर से एक किलोमीटर दूर मौत हो गई है। तीनों के साथ उनके पति भी गए थे, लेकिन भगदड़ मचने की वजह से तीनों पुरुष महिलाओं से दूर हो गए। सविता देवी के छोटे-छोटे बच्चे हैं। इनकी उम्र करीब चार से छह साल के आसपास है।मुझे घर में काम था इसलिए उनलोगों के साथ पूजा करने मंदिर नहीं गई। हर साल जाती थी, लेकिन इस बार पैर में भी दर्द था। हादसे में जान गंवाने वाले तीनों लोग प्रतापपुर, लखीसराय के रहने वाले थे।” पिंकी कुमारी ने बताया, “मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर तक बहुत लंबी लाइन लगी थी। सबसे लास्ट में ज्यादा भीड़ थी। एक दूसरे को महिलाएं धक्का दे रही थी। मैं भी वहीं खड़ी थी। तभी अचानक आगे की महिलाएं गिर गईं। इसके बाद एक के बाद एक सब गिरते गए। कुछ देर बाद मैं वहीं पर बेहोश होकर गिर गई।” घायल मुस्कान ने बताया, “मैं 5 बजे घर से पूजा करने निकली थी। लाइन एक किलोमीटर से ज्यादा लंबी थी। पोल गिरने पर हल्ला हुआ और एक लाइन से दूसरे कतार में आने में भगदड़ मच गया। जिसके बाद महिलाएं गिरते चली गईं।” अब वीडियो में दिखे बिखरे भयावह मंजर को पढ़िए… घटना के बाद बनाए गए वीडियो में जमीन पर बड़ी संख्या में सामान बिखरा दिखाई दे रहा है। कहीं कपड़े पड़े हैं, कहीं प्लास्टिक की बोतलें और पैकेट हैं। पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी इधर-उधर दिखाई दे रही है। टूटे हुए बांस और बैरिकेड के हिस्से जमीन पर पड़े हैं। इन तस्वीरों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि मौके पर अचानक कितनी तेजी से स्थिति बिगड़ती चली गई। जो लोग कुछ देर पहले पूरी श्रद्धा के साथ पूजा के लिए पहुंचे थे, उन्हें अपना सामान तक संभालने का मौका नहीं मिला। किसी की चप्पल छूट गई, किसी का कपड़ा भीड़ में फंस गया और किसी के हाथ से पूजा की थाली या प्रसाद गिर गया। भीड़ में मौजूद लोगों के लिए उस समय सबसे जरूरी चीज पूजा या सामान नहीं, बल्कि किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलना था। घटना से जुड़े वीडियो में कई बच्चे भी भीड़ के बीच दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में बच्चे और महिलाएं भीड़ के बीच से निकलते नजर आ रहे हैं। “आ… माय गे… माय, गे… माय… उठ न गे…।” 18 साल की बंटी कुमारी अपनी मां रिंकु देवी के चेहरे को हाथों से थपथपाकर उन्हें उठाने की कोशिश करती है। रोते हुए वह कहती है- “मां, अब उठ जाओ…।” आसपास मौजूद महिलाएं भी चीख-चीखकर रो रही हैं और साथ ही बंटी को संभालने की कोशिश कर रही हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इस बच्ची को किस तरह हिम्मत दें। इस नन्हीं-सी जान ने दो साल पहले ही अपने पिता को खो दिया था। अब मां भी चली गईं। बंटी की मां उन सात लोगों में शामिल थीं, जिनकी मौत लखीसराय के अशोक धाम में मची भगदड़ में हो गई। सोमवार को लखीसराय में भगदड़ में 7 महिलाओं की मौत हो गई। इसमें एक ही परिवार की तीन गोतनी हेमलता (55), ललिता (50) और सविता (30) शामिल हैं। दो महिलाएं लखीसराय की हैं। एक मुंगेर और एक पटना की बताई जा रहीं हैं। हादसे की 2 तस्वीरें देखिए…
लखीसराय के अशोक धाम में भगदड़ कैसे मची? घटना के वक्त क्या हुआ? क्यों यह नौबत आई? पढ़िए रिपोर्ट..। बेटे-बेटी की नौकरी के लिए पूजा करने गई थी मां पांच बहनों में बंटी सबसे छोटी है। वह BA पार्ट-1 की छात्रा है। सुजीत कुमार इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। वहीं, बड़ा भाई छोटू कुमार मैट्रिक पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ चुका है। पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी छोटू के कंधों पर आ गई थी। उसने मजदूरी कर अपने छोटे भाई सुजीत और बहन बंटी की पढ़ाई का खर्च उठाया है। रिंकु देवी की सबसे बड़ी इच्छा थी कि बेटा सुजीत और बेटी बंटी पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी करें। वह भगवान शिव की बड़ी भक्त थीं। आसपास होने वाली शिवचर्चा में नियमित रूप से शामिल होती थीं। बेटा-बेटी को सरकारी नौकरी मिले इस कामना से अशोक धाम मंदिर में जलाभिषेक और पूजा करने गई थीं। बंटी अपनी मां की बेहद लाडली थी। रक्षाबंधन को लेकर मां से उसने वादा किया था कि नए कपड़े दिलाएगी। मां की मौत के बाद बंटी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार अपनी मां को याद कर बदहवास हो जा रही है। हादसे के बाद की दो तस्वीरें… 2 साल पहले पिता की मौत, अब भगदड़ में मां भी मर गई मृतका रिंकू के देवर बिराज कुमार ने बताया, “रविवार की शाम करीब 4 बजे भाभी अपनी बहन के पास लखीसराय गई थी। उनके साथ उनका बेटा भी गया था। भाभी ने कहा था कि सोमवारी के मौके पर अशोक धाम मंदिर में पूजा करने की बहुत समय से इच्छा है। वह रविवार शाम मुंगेर से लखीसराय चली गई थी। सोमवार सुबह 5 बजे अपनी बहन के साथ अशोक धाम में जल चढ़ाने पहुंची। इसी दौरान वहां भगदड़ मच गई। मुझे घटना की जानकारी भतीजे से मिली। उसने फोन कर रोते हुए कहा- चाचा भगदड़ में दबने से मम्मी की मौत हो गई।” बिराज ने बताया मृतका के पति की करीब दो साल पहले मौत हो गई थी। उन्हें शुगर था। मृतका को पांच बेटियां और दो बेटे हैं। चार बेटियों की शादी हो चुकी है। घर में एक बेटी और दोनों बेटे बचे हैं। सबसे छोटा बेटा सुजीत कुमार है। उससे बड़ा भाई छोटू कुमार है। उसने अपनी मां को मुखाग्नि दी है। अब पढ़िए चश्मदीद अशोक की आंखों देखी घटना के बाद सामने आए वीडियो में मौके की भयावह तस्वीर दिखाई दे रही है। कहीं टूटे हुए बांस बिखरे हैं तो कहीं पूजा की सामग्री और लोगों का सामान जमीन पर पड़ा है। चश्मदीद अशोक ने कहा, “मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर तक लंबी लाइन लगी हुई थी। सभी लोग एक-दूसरे से सटकर खड़े थे। बगल में खेत था, जहां जंगली पौधे लगे थे। मैं भी वहीं मौजूद था।” उन्होंने बताया, “अचानक हल्ला हुआ। लाइन में खड़े लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही बांस का बैरिकेड टूटने लगा। कोई बच्चे को गोद में उठाकर भागा तो किसी ने अपनों का हाथ पकड़कर भीड़ से निकलने की कोशिश की। कुछ ही पलों में पूजा का माहौल चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गया। भीड़ में 5 साल से कम उम्र के 10 से ज्यादा बच्चे भी शामिल थे।” घटना कैसे और क्यों हुई, पुलिसकर्मी क्या कर रहे थे? 1. अचानक बिजली का पोल गिरा प्रत्यक्षदर्शी मोनी ने बताया, “मैं चाची और गांव की कुछ महिलाओं के साथ पूजा करने के लिए अशोक धाम मंदिर गई थी। जब हमलोग मंदिर पहुंचे, तब श्रद्धालु लाइन में लगकर पूजा के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। उस समय तक स्थिति ठीक थी।” मोनी के कहा, “श्रद्धालुओं की लाइन के पास अचानक बिजली का पोल गिर गया। पोल गिरते ही लाइन में खड़े लोगों में डर फैल गया। समझ नहीं आया कि अचानक क्या हुआ? कुछ लोग पीछे हटने लगे तो कुछ बचने के लिए इधर-उधर भागने लगे।” 2. डर से श्रद्धालु भागने लगे, बैरिकेड टूटा मोनी के मुताबिक, “पोल गिरने के बाद वहां मौजूद लोगों को डर था कि कहीं बिजली का तार पानी में न गिर गया हो और करंट फैल गया हो। आसपास धान के खेतों में पानी भरा हुआ था। ऐसे में करंट लगने की आशंका से श्रद्धालु ज्यादा घबरा गए।” “लोगों को लगा कि पानी में करंट फैल सकता है। इसी डर में श्रद्धालु सुरक्षित जगह की तलाश में इधर-उधर भागने लगे। भीड़ ज्यादा होने के कारण किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। श्रद्धालुओं को लाइन में रखने के लिए बीच-बीच में बांस की बैरिकेडिंग बनाई गई थी। भगदड़ के दौरान ये बैरिकेड टूट गए। बैरिकेड के दूसरी तरफ गड्ढे जैसी जगह थी। भीड़ के दबाव के कारण कई लोग उस तरफ गिरने लगे।” 3. एक के ऊपर एक गिरते गए लोग मोनी ने कहा, “इसके बाद स्थिति बेहद भयावह हो गई। भागते हुए लोग आगे गिरने वालों को देख नहीं पाए और एक के ऊपर एक गिरते चले गए। कुछ ही देर में वहां लोगों का ढेर लग गया। मैं खुद भी भीड़ में दब गई थी। इसी वजह से मुझे काफी चोटें आईं हैं। चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल था। लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि किसी को यह समझ नहीं आ रहा था कि किस तरफ जाएं।” पर्याप्त पुलिस व्यवस्था नहीं थी मोनी ने आगे बताया, “जब मैं पूजा करने पहुंची थी तब वहां ज्यादा पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थे। भगदड़ मचने के आधे घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। अगर पहले से पुलिस की टीम अच्छे से मौजूद रहती तो शायद हादसा नहीं होता। अगर पुलिस मौजूद रहती तो बिजली का पोल गिरने के बाद तत्काल लोगों को पीछे हटा सकती थी। भीड़ को नियंत्रित कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पुलिसकर्मियों की पर्याप्त मौजूदगी नहीं होने के कारण लोगों में डर और बढ़ गया।” हादसे से पहले हजार भक्त पर 4 पुलिसकर्मी थे मौजूद वहीं, नालंदा जिले के थाना गांव निवासी हरजीत कुमार ने अशोक धाम हादसे की भयावह स्थिति बताते हुए कहा, “मैं मौके पर मौजूद था। श्रद्धालु दर्शन के लिए लाइन में लगे हुए थे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक बिजली का पोल गिरने के बाद भगदड़ की स्थिति बन गई। जिस जगह बांस की बैरिकेडिंग लगाई गई थी, वहां सिर्फ चार पुलिसकर्मी मौजूद थे। भीड़ बढ़ने के बाद मैंने पुलिसकर्मियों से लोगों को संभालने की अपील की, लेकिन स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी कि पुलिस के लिए भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। पोल गिरने से पहले वहां कोई बड़ी परेशानी नहीं थी। पोल गिरने के बाद अचानक लोग घबरा गए और भगदड़ मच गई। देखते ही देखते महिलाएं गिरने लगीं। हरजीत और मेरे साथ मौजूद कुछ लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना महिलाओं को बचाने की कोशिश की।” पुलिस से नहीं संभला तो लोगों ने महिलाओं को खींचना शुरू किया हरजीत ने बताया, “हादसे के दौरान पुलिसकर्मी भी घबरा गए थे। जब मुझे लगा कि स्थिति पुलिस के नियंत्रण से बाहर हो रही है तो मैंने तीन-चार अन्य लोगों के साथ मिलकर बचाव का काम शुरू कर दिया। मैं लोगों को आवाज देकर कह रहा था कि महिलाओं को बाहर निकालो। इसके बाद हमने जमीन पर गिरी महिलाओं को खींचकर बाहर निकालना शुरू किया। मैं बांस की बैरिकेडिंग के ऊपर से कूदकर दूसरी तरफ पहुंचा और महिलाओं को निकालने लगा। करीब 15-20 महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। 3-4 साल के कई बच्चे थे। उन्हें कंधे पर उठाकर भीड़ से बाहर निकाला गया।” हादसे को याद करते हुए हरजीत ने कहा, मौत के बहुत करीब से आए हैं। आज लगा कि हम भी चले जाएंगे, लेकिन भोले बाबा की कृपा थी, इसलिए बच गए और दूसरों को भी बचा पाए। मेरी तीन जेठानी की एक साथ मौत हो गई मीना देवी ने बताया, “मेरी तीन जेठानी हेमलता (55), ललिता (50) और सविता (30) गांव की कुछ महिलाओं के साथ अशोक धाम मंदिर में पूजा करने के लिए सुबह 5 बजे घर से निकलीं थीं। डेढ़ घंटे बाद जानकारी मिली की मेरी तीनों जेठानी की मंदिर से एक किलोमीटर दूर मौत हो गई है। तीनों के साथ उनके पति भी गए थे, लेकिन भगदड़ मचने की वजह से तीनों पुरुष महिलाओं से दूर हो गए। सविता देवी के छोटे-छोटे बच्चे हैं। इनकी उम्र करीब चार से छह साल के आसपास है।मुझे घर में काम था इसलिए उनलोगों के साथ पूजा करने मंदिर नहीं गई। हर साल जाती थी, लेकिन इस बार पैर में भी दर्द था। हादसे में जान गंवाने वाले तीनों लोग प्रतापपुर, लखीसराय के रहने वाले थे।” पिंकी कुमारी ने बताया, “मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर तक बहुत लंबी लाइन लगी थी। सबसे लास्ट में ज्यादा भीड़ थी। एक दूसरे को महिलाएं धक्का दे रही थी। मैं भी वहीं खड़ी थी। तभी अचानक आगे की महिलाएं गिर गईं। इसके बाद एक के बाद एक सब गिरते गए। कुछ देर बाद मैं वहीं पर बेहोश होकर गिर गई।” घायल मुस्कान ने बताया, “मैं 5 बजे घर से पूजा करने निकली थी। लाइन एक किलोमीटर से ज्यादा लंबी थी। पोल गिरने पर हल्ला हुआ और एक लाइन से दूसरे कतार में आने में भगदड़ मच गया। जिसके बाद महिलाएं गिरते चली गईं।” अब वीडियो में दिखे बिखरे भयावह मंजर को पढ़िए… घटना के बाद बनाए गए वीडियो में जमीन पर बड़ी संख्या में सामान बिखरा दिखाई दे रहा है। कहीं कपड़े पड़े हैं, कहीं प्लास्टिक की बोतलें और पैकेट हैं। पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी इधर-उधर दिखाई दे रही है। टूटे हुए बांस और बैरिकेड के हिस्से जमीन पर पड़े हैं। इन तस्वीरों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि मौके पर अचानक कितनी तेजी से स्थिति बिगड़ती चली गई। जो लोग कुछ देर पहले पूरी श्रद्धा के साथ पूजा के लिए पहुंचे थे, उन्हें अपना सामान तक संभालने का मौका नहीं मिला। किसी की चप्पल छूट गई, किसी का कपड़ा भीड़ में फंस गया और किसी के हाथ से पूजा की थाली या प्रसाद गिर गया। भीड़ में मौजूद लोगों के लिए उस समय सबसे जरूरी चीज पूजा या सामान नहीं, बल्कि किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलना था। घटना से जुड़े वीडियो में कई बच्चे भी भीड़ के बीच दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में बच्चे और महिलाएं भीड़ के बीच से निकलते नजर आ रहे हैं।  

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