कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों के लिए बीकानेर के पीबीएम अस्पताल स्थित आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर ट्रीटमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट से एक बेहद उम्मीद भरी खबर सामने आई है। संस्थान में जल्द ही कैंसर के इलाज की सबसे आधुनिक और क्रांतिकारी विधि कार्टी सेल थेरेपी शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस सुविधा को विकसित करने वाला बीकानेर का यह अस्पताल राजस्थान का पहला सरकारी अस्पताल बनेगा। खास बात यह है कि वर्तमान में यह अत्याधुनिक सुविधा जयपुर स्थित प्रदेश के स्टेट कैंसर सेंटर में भी उपलब्ध नहीं है। मेडिकल ऑन्कोलॉजी के एचओडी डॉ. बेनीवाल ने बताया कि कार्टी सेल थेरेपी शुरू करने के लिए जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की जेनेटिक इंजीनियरिंग लैब के साथ एमओयू किया जाएगा। यह थेरेपी मुख्य रूप से चौथे स्टेज (एडवांस केस) के ब्लड कैंसर, ल्यूकेमिया, लिंफोमा और मल्टीपल मायलोमा के मरीजों को दी जाएगी। थेरेपी की प्रक्रिया के दौरान जब कार्टी सेल्स शरीर में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते हैं, तब मरीज का इम्यून सिस्टम काफी तीव्र रिएक्शन देता है। इस तकलीफ और क्रिटिकल केयर की जरूरत को देखते हुए मरीजों को बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट के आईसीयू में 2 से 3 महीने तक भर्ती रखा जाएगा। मरीजों की 24 घंटे गहन चिकित्सीय निगरानी के लिए मुंबई के प्रतिष्ठित टाटा मेमोरियल अस्पताल से स्टाफ की विशेष ट्रेनिंग के लिए बातचीत चल रही है। आम आदमी की पहुंच में होगा 1 करोड़ तक का इलाज निजी अस्पतालों में कार्टी सेल थेरेपी का खर्च 80 लाख से 1 करोड़ रुपये तक आता है, जो आम मरीज की पहुंच से बाहर है। लेकिन राजस्थान सरकार ने आरजीएचएस के तहत इसके इलाज के लिए करीब 30 लाख रुपये की मंजूरी दी है। इससे अब साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि के कैंसर रोगियों को भी विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक इलाज बिल्कुल मुफ्त या बहुत कम खर्च में मिल सकेगा। कार्टी सेल थेरेपी की सुविधा शुरू करने के लिए कैंसर के डॉक्टरों से मीटिंग हो चुकी है। चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद जेनेटिक लैब से एमओयू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। डॉ. बीसी घीया, अधीक्षक, पीबीएम अस्पताल भारत ने बनाई दुनिया की सबसे सस्ती CAR-T थेरेपी : आईआईटी बॉम्बे और टाटा मेमोरियल अस्पताल द्वारा संयुक्त रूप से विकसित NexCAR19 को CDSCO से कमर्शियल मंजूरी मिल चुकी है। विदेशों में कार्टी सेल थेरेपी का खर्च 3.5 से 4 करोड़ रुपये आता है। स्वदेशी तकनीक से तैयार NexCAR19 की बदौलत भारत में यह इलाज मात्र 30 से 40 लाख रुपये में उपलब्ध है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार से 80 से 90% तक सस्ता है। फैक्ट फाइल कैंसर के रोज मरीज आ रहे : 300-400, हर साल नए केस : 10 से 12000, इस साल का अनुमान : 1.50 लाख मरीज। क्या है कार्टी सेल थेरेपी और यह कैसे काम करती है? कार्टी सेल थेरेपी मेडिकल साइंस का एक ऐसा आधुनिक चमत्कार है, जिसे लिविंग ड्रग (जीवित दवा) भी कहा जाता है।
इसमें मरीज के खून से ही श्वेत रक्त कोशिकाएं यानी टी-सेल्स निकाली जाती हैं। जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिए इन टी-सेल्स में बदलाव करके एक खास कृत्रिम रिसेप्टर जोड़ा जाता है। यह रिसेप्टर टी-सेल्स को एक उन्नत जीपीएस की तरह कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें सटीक रूप से निशाना बनाने की क्षमता देता है। इन संशोधित ‘सुपर सोल्जर’ कोशिकाओं को लैब में करोड़ों की संख्या में बढ़ाकर मरीज के खून में वापस चढ़ा दिया जाता है, जहां वे कैंसर का खात्मा करती हैं।

