मनरेगा की 6.33 लाख राशि की वसूली का आदेश:खर्च के बाद भी मिट्‌टीकरण नहीं, तीन कर्मियों से वसूले जाएंगे रुपए

मनरेगा की 6.33 लाख राशि की वसूली का आदेश:खर्च के बाद भी मिट्‌टीकरण नहीं, तीन कर्मियों से वसूले जाएंगे रुपए

दरभंगा के बिरौल प्रखंड की रोहर महमूदा पंचायत में मनरेगा योजना में अनियमितता का मामले में कार्रवाई हो रही है। योजनाओं में काम और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज खर्च को लेकर ग्रामीण बबलू यादव की शिकायत के बाद कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) महेश कुमार भगत ने संबंधित कनीय अभियंता (जेई), पंचायत रोजगार सेवक (पीआरएस) और पंचायत तकनीकी सहायक (पीटीए) से कुल 6 लाख 33 हजार रुपए की वसूली का आदेश जारी किया है। पीओ के अनुसार, तीनों कर्मियों से करीब 2 लाख 11 हजार रुपए प्रति व्यक्ति की दर से राशि वसूलने के लिए पत्र जारी किया गया है। इसकी प्रतिलिपि उप विकास आयुक्त, दरभंगा को भी भेजी गई है।
मामला रोहर महमूदा पंचायत के महमूदा गांव के वार्ड संख्या-4 में मनरेगा योजनाओं से जुड़ा है। ग्रामीण बबलू यादव समेत अन्य लोगों ने आरोप लगाया था कि मिट्टीकरण और खड़ंजा निर्माण के नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में लाखों रुपए का खर्च दर्ज किया गया, जबकि मौके पर उस स्तर का काम नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने योजनास्थल की भौतिक जांच कराकर वास्तविक कार्य और भुगतान का मिलान करने की मांग की थी। 31 अगस्त को सहयोग पोर्टल पर की थी शिकायत
शिकायतकर्ता बबलू यादव के अनुसार, 31 अगस्त 2026 को बिहार सरकार के सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसमें ठक्को साहू के खेत से घनश्यामपुर सीमा तक मिट्टीकरण से संबंधित योजना संख्या FP/20378777 में अनियमितता का आरोप लगाया गया था। उपलब्ध योजना विवरण के अनुसार, इस योजना की प्राक्कलित राशि 7,87,146 रुपए, मापी पुस्त में दर्ज राशि 7,00,782 रुपए और व्यय 6,32,555 रुपए बताया गया था। शिकायतकर्ताओं का दावा था कि इतनी राशि खर्च होने के बावजूद जमीन पर कुछ भी काम नहीं हुआ है। इसी पंचायत की दूसरी योजना संख्या RC/20564047 सरोज यादव के घर से कमला नदी तक मिट्टीकरण एवं खड़ंजा निर्माण से संबंधित है। इस योजना की प्राक्कलित राशि 4,89,151 रुपए, मापी पुस्त में दर्ज राशि 3,77,702 रुपए और व्यय 3,66,662 रुपए बताया गया था। ग्रामीणों ने दोनों योजनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
पहले की जांच रिपोर्ट पर भी उठे थे सवाल शिकायत के बाद 11 सितंबर 2026 को पीओ की ओर से उप विकास आयुक्त को भेजी गई रिपोर्ट में पहली योजना के संबंध में कार्यस्थल पर काम पाए जाने और कार्य संतोषप्रद होने की बात कही गई थी। इस रिपोर्ट को लेकर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि योजनास्थल की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कार्य एवं राशि का निष्पक्ष सत्यापन जरूरी है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 21 सितंबर को स्थल निरीक्षण भी हुआ था। इसके बाद मामले की दोबारा जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अब संबंधित कर्मियों से 6.33 लाख रुपये की वसूली के लिए पत्र जारी होने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
हालांकि, वसूली आदेश जारी होने के आधार और जांच में सामने आए निष्कर्षों का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रत्येक कर्मी की जिम्मेदारी किस आधार पर निर्धारित की गई है। जांच के बीच जेसीबी से काम कराने पर हुआ था विवाद इसी मामले में 6 अक्टूबर को योजनास्थल पर जेसीबी और मजदूरों को लेकर काम शुरू कराने के प्रयास पर ग्रामीणों ने विरोध जताया था। ग्रामीणों का कहना था कि जब योजना की जांच चल रही है, तो पहले पुराने कार्य और भुगतान की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। इस दौरान विवाद बढ़ने पर मनरेगा मजदूर प्रेम सदा ने बिरौल थाना में आवेदन देकर मारपीट, जातिसूचक गाली देने, काम में बाधा डालने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए थे। आवेदन में बबलू यादव पर कुदाल वार करने का आरोप भी लगाया गया था। घायल मजदूर को इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल, बिरौल ले जाने की बात कही गई थी।
ग्रामीणों ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की वसूली आदेश जारी होने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी राशि की वसूली की कार्रवाई के साथ मामले में जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल राशि की वसूली से मामला समाप्त नहीं होना चाहिए। योजनाओं की मापी पुस्त, भुगतान विवरण, मजदूरों की उपस्थिति और स्थल पर वास्तविक कार्य का मिलान कर यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अनियमितता कैसे हुई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं। फिलहाल, पीओ की ओर से वसूली का आदेश जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब आगे की कार्रवाई और जिला प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट होगा कि मामले में किन कर्मियों की कितनी जिम्मेदारी तय होती है तथा अन्य कानूनी कदम क्या उठाए जाते हैं। दरभंगा के बिरौल प्रखंड की रोहर महमूदा पंचायत में मनरेगा योजना में अनियमितता का मामले में कार्रवाई हो रही है। योजनाओं में काम और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज खर्च को लेकर ग्रामीण बबलू यादव की शिकायत के बाद कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) महेश कुमार भगत ने संबंधित कनीय अभियंता (जेई), पंचायत रोजगार सेवक (पीआरएस) और पंचायत तकनीकी सहायक (पीटीए) से कुल 6 लाख 33 हजार रुपए की वसूली का आदेश जारी किया है। पीओ के अनुसार, तीनों कर्मियों से करीब 2 लाख 11 हजार रुपए प्रति व्यक्ति की दर से राशि वसूलने के लिए पत्र जारी किया गया है। इसकी प्रतिलिपि उप विकास आयुक्त, दरभंगा को भी भेजी गई है।
मामला रोहर महमूदा पंचायत के महमूदा गांव के वार्ड संख्या-4 में मनरेगा योजनाओं से जुड़ा है। ग्रामीण बबलू यादव समेत अन्य लोगों ने आरोप लगाया था कि मिट्टीकरण और खड़ंजा निर्माण के नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में लाखों रुपए का खर्च दर्ज किया गया, जबकि मौके पर उस स्तर का काम नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने योजनास्थल की भौतिक जांच कराकर वास्तविक कार्य और भुगतान का मिलान करने की मांग की थी। 31 अगस्त को सहयोग पोर्टल पर की थी शिकायत
शिकायतकर्ता बबलू यादव के अनुसार, 31 अगस्त 2026 को बिहार सरकार के सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसमें ठक्को साहू के खेत से घनश्यामपुर सीमा तक मिट्टीकरण से संबंधित योजना संख्या FP/20378777 में अनियमितता का आरोप लगाया गया था। उपलब्ध योजना विवरण के अनुसार, इस योजना की प्राक्कलित राशि 7,87,146 रुपए, मापी पुस्त में दर्ज राशि 7,00,782 रुपए और व्यय 6,32,555 रुपए बताया गया था। शिकायतकर्ताओं का दावा था कि इतनी राशि खर्च होने के बावजूद जमीन पर कुछ भी काम नहीं हुआ है। इसी पंचायत की दूसरी योजना संख्या RC/20564047 सरोज यादव के घर से कमला नदी तक मिट्टीकरण एवं खड़ंजा निर्माण से संबंधित है। इस योजना की प्राक्कलित राशि 4,89,151 रुपए, मापी पुस्त में दर्ज राशि 3,77,702 रुपए और व्यय 3,66,662 रुपए बताया गया था। ग्रामीणों ने दोनों योजनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
पहले की जांच रिपोर्ट पर भी उठे थे सवाल शिकायत के बाद 11 सितंबर 2026 को पीओ की ओर से उप विकास आयुक्त को भेजी गई रिपोर्ट में पहली योजना के संबंध में कार्यस्थल पर काम पाए जाने और कार्य संतोषप्रद होने की बात कही गई थी। इस रिपोर्ट को लेकर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि योजनास्थल की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कार्य एवं राशि का निष्पक्ष सत्यापन जरूरी है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 21 सितंबर को स्थल निरीक्षण भी हुआ था। इसके बाद मामले की दोबारा जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अब संबंधित कर्मियों से 6.33 लाख रुपये की वसूली के लिए पत्र जारी होने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
हालांकि, वसूली आदेश जारी होने के आधार और जांच में सामने आए निष्कर्षों का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रत्येक कर्मी की जिम्मेदारी किस आधार पर निर्धारित की गई है। जांच के बीच जेसीबी से काम कराने पर हुआ था विवाद इसी मामले में 6 अक्टूबर को योजनास्थल पर जेसीबी और मजदूरों को लेकर काम शुरू कराने के प्रयास पर ग्रामीणों ने विरोध जताया था। ग्रामीणों का कहना था कि जब योजना की जांच चल रही है, तो पहले पुराने कार्य और भुगतान की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। इस दौरान विवाद बढ़ने पर मनरेगा मजदूर प्रेम सदा ने बिरौल थाना में आवेदन देकर मारपीट, जातिसूचक गाली देने, काम में बाधा डालने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए थे। आवेदन में बबलू यादव पर कुदाल वार करने का आरोप भी लगाया गया था। घायल मजदूर को इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल, बिरौल ले जाने की बात कही गई थी।
ग्रामीणों ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की वसूली आदेश जारी होने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी राशि की वसूली की कार्रवाई के साथ मामले में जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल राशि की वसूली से मामला समाप्त नहीं होना चाहिए। योजनाओं की मापी पुस्त, भुगतान विवरण, मजदूरों की उपस्थिति और स्थल पर वास्तविक कार्य का मिलान कर यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अनियमितता कैसे हुई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं। फिलहाल, पीओ की ओर से वसूली का आदेश जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब आगे की कार्रवाई और जिला प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट होगा कि मामले में किन कर्मियों की कितनी जिम्मेदारी तय होती है तथा अन्य कानूनी कदम क्या उठाए जाते हैं।  

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