मधेपुरा में डिलीवरी के बाद नवजात की मौत, हंगामा:परिजन बोले-‘अस्पताल ने लापरवाही की’, डॉक्टर ने कहा-‘बिना डिस्चार्ज ले गए’

मधेपुरा में डिलीवरी के बाद नवजात की मौत, हंगामा:परिजन बोले-‘अस्पताल ने लापरवाही की’, डॉक्टर ने कहा-‘बिना डिस्चार्ज ले गए’

मधेपुरा के ग्वालपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के एक दिन बाद नवजात बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था और प्रसव के बाद मां-बच्ची को घर ले जाने को लेकर सवाल उठाए। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि परिजन बिना डिस्चार्ज कराए ही मां और नवजात को निजी वाहन से घर ले गए थे। अगले दिन तबीयत बिगड़ने पर बच्ची को अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। रविवार सुबह प्रसव के लिए भर्ती हुई थी कल्याणपट्टी वार्ड-11 निवासी पप्पू कुमार ने रविवार सुबह करीब 7 बजे अपनी पत्नी निशा कुमारी को प्रसव के लिए ग्वालपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। करीब 10 बजे निशा ने एक बच्ची को जन्म दिया। परिजनों के अनुसार प्रसव के बाद नवजात को उनके सामने रखा गया था और उसे टीका भी लगाया गया था। शाम को मां और नवजात को घर ले गए परिजनों के मुताबिक रविवार शाम करीब 5 बजे मां और नवजात को अस्पताल से घर ले जाया गया। इसके बाद सोमवार दोपहर करीब 1 बजे बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उसे लेकर दोबारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। डॉक्टर ने जांच के बाद मृत घोषित किया अस्पताल में डॉक्टर ने नवजात की जांच की। जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टर के अनुसार अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्ची की मौत हो चुकी थी। बिना डिस्चार्ज कराए ले गए- प्रबंधन डॉक्टर प्रवेश कुमार प्रभाकर ने बताया कि निशा को रविवार सुबह करीब 7 बजे भर्ती कराया गया था और करीब 10 बजे प्रसव हुआ। उनके अनुसार प्रसव के बाद परिजन निजी वाहन से मां और नवजात को लेकर अस्पताल से चले गए थे। सोमवार दोपहर करीब 12:30 से 1 बजे के बीच नवजात को दोबारा अस्पताल लाया गया। जांच के दौरान उसकी मौत हो चुकी थी। फिर घर ले जाने की अनुमति कैसे मिली? नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि मां और नवजात को अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया गया था, तो उन्हें दोनों को घर ले जाने की अनुमति या सलाह कैसे दी गई। इसी मुद्दे को लेकर परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। अस्पताल परिसर में जुटे 20-25 लोग घटना की जानकारी मिलने के बाद करीब 20 से 25 लोग अस्पताल परिसर में जमा हो गए। इस दौरान आशा कार्यकर्ता बबीता कुमारी और उनके पति राजीव कुमार से परिजनों की बहस हो गई। कुछ देर तक अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बनी रही। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप परिजनों की ओर से अस्पताल की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने बच्ची को प्रसव के बाद बिना डिस्चार्ज कराए घर ले जाने की बात कही। दोनों पक्षों के बीच इसी बात को लेकर विवाद होता रहा। परिजन प्रसूता को लेकर घर लौटे हंगामे के बाद परिजन प्रसूता को लेकर घर चले गए। परिजनों ने कहा कि उनके साथ जो स्थिति बनी, ऐसी घटना आगे किसी दूसरे मरीज के साथ नहीं होनी चाहिए। मौत की वजह अब भी स्पष्ट नहीं नवजात की मौत किस वजह से हुई, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार बच्ची को दोबारा अस्पताल लाए जाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। वहीं, परिजन अस्पताल की व्यवस्था और प्रसव के बाद मां-नवजात की देखभाल को लेकर सवाल उठा रहे हैं। मामले में मौत की वास्तविक वजह और अस्पताल से मां-बच्ची को घर ले जाने की परिस्थितियां जांच का विषय हैं। मधेपुरा के ग्वालपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के एक दिन बाद नवजात बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था और प्रसव के बाद मां-बच्ची को घर ले जाने को लेकर सवाल उठाए। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि परिजन बिना डिस्चार्ज कराए ही मां और नवजात को निजी वाहन से घर ले गए थे। अगले दिन तबीयत बिगड़ने पर बच्ची को अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। रविवार सुबह प्रसव के लिए भर्ती हुई थी कल्याणपट्टी वार्ड-11 निवासी पप्पू कुमार ने रविवार सुबह करीब 7 बजे अपनी पत्नी निशा कुमारी को प्रसव के लिए ग्वालपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। करीब 10 बजे निशा ने एक बच्ची को जन्म दिया। परिजनों के अनुसार प्रसव के बाद नवजात को उनके सामने रखा गया था और उसे टीका भी लगाया गया था। शाम को मां और नवजात को घर ले गए परिजनों के मुताबिक रविवार शाम करीब 5 बजे मां और नवजात को अस्पताल से घर ले जाया गया। इसके बाद सोमवार दोपहर करीब 1 बजे बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उसे लेकर दोबारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। डॉक्टर ने जांच के बाद मृत घोषित किया अस्पताल में डॉक्टर ने नवजात की जांच की। जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टर के अनुसार अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्ची की मौत हो चुकी थी। बिना डिस्चार्ज कराए ले गए- प्रबंधन डॉक्टर प्रवेश कुमार प्रभाकर ने बताया कि निशा को रविवार सुबह करीब 7 बजे भर्ती कराया गया था और करीब 10 बजे प्रसव हुआ। उनके अनुसार प्रसव के बाद परिजन निजी वाहन से मां और नवजात को लेकर अस्पताल से चले गए थे। सोमवार दोपहर करीब 12:30 से 1 बजे के बीच नवजात को दोबारा अस्पताल लाया गया। जांच के दौरान उसकी मौत हो चुकी थी। फिर घर ले जाने की अनुमति कैसे मिली? नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि मां और नवजात को अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया गया था, तो उन्हें दोनों को घर ले जाने की अनुमति या सलाह कैसे दी गई। इसी मुद्दे को लेकर परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। अस्पताल परिसर में जुटे 20-25 लोग घटना की जानकारी मिलने के बाद करीब 20 से 25 लोग अस्पताल परिसर में जमा हो गए। इस दौरान आशा कार्यकर्ता बबीता कुमारी और उनके पति राजीव कुमार से परिजनों की बहस हो गई। कुछ देर तक अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बनी रही। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप परिजनों की ओर से अस्पताल की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने बच्ची को प्रसव के बाद बिना डिस्चार्ज कराए घर ले जाने की बात कही। दोनों पक्षों के बीच इसी बात को लेकर विवाद होता रहा। परिजन प्रसूता को लेकर घर लौटे हंगामे के बाद परिजन प्रसूता को लेकर घर चले गए। परिजनों ने कहा कि उनके साथ जो स्थिति बनी, ऐसी घटना आगे किसी दूसरे मरीज के साथ नहीं होनी चाहिए। मौत की वजह अब भी स्पष्ट नहीं नवजात की मौत किस वजह से हुई, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार बच्ची को दोबारा अस्पताल लाए जाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। वहीं, परिजन अस्पताल की व्यवस्था और प्रसव के बाद मां-नवजात की देखभाल को लेकर सवाल उठा रहे हैं। मामले में मौत की वास्तविक वजह और अस्पताल से मां-बच्ची को घर ले जाने की परिस्थितियां जांच का विषय हैं।  

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