मधेपुरा में गैस सिलेंडर से लगी आग ने भीषण तबाही मचा दी। आग की चपेट में आने से करीब 10 घर जलकर राख हो गए। घरों में रखे नकदी, अनाज, कपड़े, जरूरी कागजात और घरेलू सामान समेत 25 लाख रुपए से अधिक की संपत्ति के नुकसान का अनुमान है। घटना शंकरपुर प्रखंड की सोनवर्षा पंचायत स्थित डीएसपी टोला वार्ड-11 की है। आग इतनी भयावह थी कि चार गैस सिलेंडर भी धमाके के साथ फट गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटों पर काबू नहीं पा सके। गैस रिसाव के कारण लगी आग स्थानीय लोगों ने बताया कि आग की शुरुआत गैस सिलेंडर से गैस रिसाव के कारण हुई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के घरों को अपनी चपेट में ले लिया। इस दौरान चार गैस सिलेंडर धमाके के साथ फट गए, जिससे आग और भयावह हो गई। आग की लपटें उठती देख बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। लोगों ने अपने स्तर से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग तेजी से फैलती चली गई। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के करीब एक घंटे बाद दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची। इसके बाद अग्निशमन कर्मियों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। मौके से आई तस्वारें…. 10 परिवारों के घर जलकर राख हालांकि, तब तक करीब 10 परिवारों के घर और उनमें रखा सामान जलकर नष्ट हो चुका था। इस घटना में प्रभावित परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। अगलगी की इस घटना के बाद शंकरपुर प्रखंड में सरकारी अग्निशमन केंद्र नहीं होने का मुद्दा फिर उठने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रखंड में दमकल की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण आग लगने की घटनाओं के दौरान दमकल पहुंचने में देरी होती है। इससे आग पर समय रहते काबू पाना मुश्किल हो जाता है और नुकसान बढ़ जाता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से शंकरपुर में जल्द अग्निशमन केंद्र स्थापित करने की मांग की है। आग में घर और गृहस्थी का सामान गंवाने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने और खाने का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग पीड़ित परिवारों के पास सिर छिपाने तक की जगह नहीं बची है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों को तत्काल तिरपाल, राशन और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने के साथ उचित मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर दमकल की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों, तो ऐसी घटनाओं में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। मधेपुरा में गैस सिलेंडर से लगी आग ने भीषण तबाही मचा दी। आग की चपेट में आने से करीब 10 घर जलकर राख हो गए। घरों में रखे नकदी, अनाज, कपड़े, जरूरी कागजात और घरेलू सामान समेत 25 लाख रुपए से अधिक की संपत्ति के नुकसान का अनुमान है। घटना शंकरपुर प्रखंड की सोनवर्षा पंचायत स्थित डीएसपी टोला वार्ड-11 की है। आग इतनी भयावह थी कि चार गैस सिलेंडर भी धमाके के साथ फट गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटों पर काबू नहीं पा सके। गैस रिसाव के कारण लगी आग स्थानीय लोगों ने बताया कि आग की शुरुआत गैस सिलेंडर से गैस रिसाव के कारण हुई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के घरों को अपनी चपेट में ले लिया। इस दौरान चार गैस सिलेंडर धमाके के साथ फट गए, जिससे आग और भयावह हो गई। आग की लपटें उठती देख बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। लोगों ने अपने स्तर से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग तेजी से फैलती चली गई। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के करीब एक घंटे बाद दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची। इसके बाद अग्निशमन कर्मियों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। मौके से आई तस्वारें…. 10 परिवारों के घर जलकर राख हालांकि, तब तक करीब 10 परिवारों के घर और उनमें रखा सामान जलकर नष्ट हो चुका था। इस घटना में प्रभावित परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। अगलगी की इस घटना के बाद शंकरपुर प्रखंड में सरकारी अग्निशमन केंद्र नहीं होने का मुद्दा फिर उठने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रखंड में दमकल की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण आग लगने की घटनाओं के दौरान दमकल पहुंचने में देरी होती है। इससे आग पर समय रहते काबू पाना मुश्किल हो जाता है और नुकसान बढ़ जाता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से शंकरपुर में जल्द अग्निशमन केंद्र स्थापित करने की मांग की है। आग में घर और गृहस्थी का सामान गंवाने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने और खाने का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग पीड़ित परिवारों के पास सिर छिपाने तक की जगह नहीं बची है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों को तत्काल तिरपाल, राशन और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने के साथ उचित मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर दमकल की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों, तो ऐसी घटनाओं में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

