मथुरा में 26 साल से हो रही रावण की पूजा:यमुना किनारे लंकेश्वर महादेव मंदिर में आराधना; लंकेश भक्त मंडल ने पुतला दहन का किया विरोध

मथुरा में 26 साल से हो रही रावण की पूजा:यमुना किनारे लंकेश्वर महादेव मंदिर में आराधना; लंकेश भक्त मंडल ने पुतला दहन का किया विरोध

देशभर में विजयदशमी पर रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, लेकिन ब्रज की नगरी मथुरा में एक ऐसी परंपरा भी है,जहां दशहरे पर रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा की जाती है। यमुना पुल के निकट स्थित लंकेश्वर महादेव मंदिर में मंगलवार को लंकेश भक्त मंडल और सारस्वत समाज के लोगों ने दशानन रावण की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने रावण के पुतला दहन का विरोध करते हुए इस परंपरा को बंद करने की अपील की। लंकेश्वर महादेव मंदिर में रावण की पूजा की परंपरा पिछले 26 वर्षों से लगातार चली आ रही है। मंदिर में भगवान शिव की आराधना के साथ दशानन रावण की प्रतिमा स्थापित है।दशहरे के अवसर पर यहां महामंत्र का जाप और रावण की महाआरती की जाती है।इस दौरान लंकेश भक्त मंडल के सदस्य और सारस्वत समाज के लोग शामिल होकर रावण के व्यक्तित्व और विद्वता से जुड़े विचार रखते हैं। रावण को मानते हैं प्रकांड विद्वान और शिवभक्त लंकेश भक्त मंडल के सदस्यों का कहना है कि रावण त्रिकालदर्शी,चारों वेदों के ज्ञाता और भगवान शिव के परम भक्त थे। उनका दावा है कि रावण ने माता सीता को कभी स्पर्श नहीं किया। ऐसे में हर साल रावण का पुतला जलाना एक प्रकांड विद्वान और ब्राह्मण का अपमान है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद बार-बार उसका पुतला जलाने की परंपरा पर विचार किया जाना चाहिए। अपने अंदर के अहंकार का करें दहन लंकेश भक्त मंडल के सदस्य और अधिवक्ता ओमबीर सारस्वत का कहना है कि रावण का पुतला दहन करने से पहले व्यक्ति को अपने अंदर झांकना चाहिए। यदि बुराई का अंत करना है तो सबसे पहले अपने भीतर मौजूद अहंकार,क्रोध और अन्य अवगुणों का दहन करना जरूरी है।मंडल के सदस्यों का तर्क है कि रावण का वध करने वाले भगवान राम के आदर्शों को अपनाना भी आवश्यक है। इसी संदेश के साथ मंडल के सदस्य लोगों को जागरूक करते हैं और दशहरे पर रावण का पुतला जलाने के बजाय अपने भीतर की बुराइयों को समाप्त करने की अपील करते हैं।

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