मणिपुर- 3 लोगों की हत्या के मामले में 3 गिरफ्तार:12 हथियार और विस्फोटक बरामद; विरोध में 48 घंटे का राज्यव्यापी बंद जारी

मणिपुर- 3 लोगों की हत्या के मामले में 3 गिरफ्तार:12 हथियार और विस्फोटक बरामद; विरोध में 48 घंटे का राज्यव्यापी बंद जारी

मणिपुर में सुनुलोक पहाड़ी पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस हमले में 19 अक्टूबर को 3 लोगों की मौत हो गई थी और 3 घायल हुए थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 12 हथियार, 1,095 कारतूस और विस्फोटक बरामद किए हैं। राज्य के एडीजीपी ल्हारी दोरजी खाटू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मंगलवार को यह जानकारी दी। हमले के विरोध में नेटिव पीपल्स कमेटी मणिपुर (NPCM) ने सोमवार आधी रात से 48 घंटे का बंद बुलाया है। समिति ने हमले के जिम्मेदार सशस्त्र समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। बंद के कारण पूरे मणिपुर में जनजीवन प्रभावित हुआ है। वहीं, घटना से नाराज लोगों ने इम्फाल में मुख्यमंत्री के आवास के बाहर शव रखकर प्रदर्शन किया था। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े थे। मुख्यमंत्री आवास के बाहर हंगामे के फोटो 3 आरोपियों में से 2 ने हमले की बात कबूली एडीजीपी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए 3 आरोपियों में से 2 ने शुरुआती पूछताछ में हमले में शामिल होने की बात कबूल की है। तीसरे आरोपी की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस हमले में शामिल अन्य लोगों की पहचान भी कर रही है। आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने INSAS, M16, AK-47/टाइप-81 और 7.62 मिमी स्नाइपर राइफल समेत 12 हथियार बरामद किए हैं। इनमें तीन 12-बोर बंदूकें, एक लेथोड गन और एक देसी रॉकेट लॉन्चर भी शामिल हैं। पुलिस ने अलग-अलग बोर के 1,095 कारतूस भी जब्त किए हैं। पुलिस ने टीएनटी की सिल्लियां, पीके विस्फोटक, बारूद, लेथोड शेल, देसी बम, राइफल ग्रेनेड, हैंड ग्रेनेड, देसी मोर्टार और तीन डेटोनेटर भी बरामद किए हैं। इसके अलावा रेडियो सेट, बैटरियां, हेलमेट, वर्दियां, एक मोनोक्युलर और अफीम के पौधों के बीज भी जब्त किए गए हैं। पुलिस हमले और आरोपियों के अन्य लोगों से संबंधों की जांच कर रही है। राज्यव्यापी बंद के चलते सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति कम रही राज्यव्यापी बंद का असर पहाड़ी और घाटी, दोनों क्षेत्रों में दिखा। NPCM ने कहा कि सरकार जब तक मांगों को पूरा करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक विरोध जारी रहेगा। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाओं, धार्मिक गतिविधियों और जरूरी सेवाओं को बंद से छूट दी गई है। बंद के कारण दुकानें, बाजार, बैंक, निजी कार्यालय और स्कूल-कॉलेज बंद रहे। पुलिस और सरकारी गाड़ियों को छोड़कर सार्वजनिक और निजी परिवहन सेवाएं भी बंद रहीं।मनोरंजन स्थल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भी ठप रहीं। सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रही। लकड़ी लेने पहाड़ियों पर गए थे घटना कांगपोकपी के खोंगबाल सुनुरोक उयोक में हुई थी। यह इम्फाल ईस्ट के नोंगशुम गांव से कुछ मीटर की दूरी पर है। 19 अक्टूबर की सुबह करीब 7 बजे 16 लोग लकड़ी लेने पहाड़ियों पर गए थे। मृतकों की पहचान अरुबाम रोनिल (35), लैरेनलकपम इनाओबी (51), क्षेत्रिमायुम सुशील(32) के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, वे लकड़ी लेने गए समूह में शामिल थे। इसी दौरान उग्रवादियों ने उन पर घात लगाकर हमला किया। थौबल जिले में 18 अक्टूबर की रात दो समुदायों के बीच झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। पुलिस के मुताबिक, लाइशराम राकेश की गोली लगने से मौत हुई। पत्थरबाजी के दौरान कुछ घरों और वाहनों में आग लगा दी गई। फरवरी से अक्टूबर तक हिंसा की घटनाएं 7–11 फरवरी: उखरुल जिले के लितान इलाके में दो तांगखुल नगा और दो कुकी युवकों के बीच झगड़े के बाद तनाव बढ़ा। एक कुकी परिवार के खाली घर में आग लगाई गई। बाद में पत्थरबाजी, गोलीबारी और आगजनी हुई। प्रशासन ने कर्फ्यू और इंटरनेट प्रतिबंध लगाए। 24–25 अप्रैल: उखरुल के सिनाकीथेल और मुल्लम गांवों के पास दो गोलीबारी की घटनाओं में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई। मृतकों में तांगखुल नगा समुदाय का एक व्यक्ति भी शामिल था। 7–8 मई: उखरुल और कामजोंग जिलों में गोलीबारी और आगजनी हुई। कम से कम छह लोग घायल हुए। भारत-म्यांमार सीमा के पास तांगखुल नगा समुदाय के तीन गांवों में 15 तक घरों पर हमले और आगजनी की सूचना मिली। 10 से 15 अगस्त: ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक, नगा और कुकी-जो समुदायों के बीच हिंसा में कम से कम सात लोग मारे गए। 15 से 20 सितंबर: शुरुआत तक इस संघर्ष में मरने वालों की संख्या 34 बताई गई थी। महीने के अंत तक रिपोर्टों में नगा-कुकी संघर्ष में 50 से अधिक मौतों का उल्लेख किया गया। हिंसा के कारण दोनों समुदायों के बीच तनाव और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ीं। 17 अक्टूबर: कामजोंग जिले के चसाद गांव में शनिवार को कुकी और नगा समुदायों के हथियारबंद समूहों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हो गए। मणिपुर में 3 साल पहले शुरू थी हिंसा, 70 हजार लोग विस्थापित मणिपुर में 3 मई 2023 को मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। इसके बाद राज्य में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ और हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। ह्यूमन राइट्स वॉच के सितंबर 2026 के आकलन के मुताबिक, इस हिंसा में 260 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 60 हजार से अधिक लोग विस्थापित हुए।

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