मकर परब 2026 में जीवंत हुई सरायकेला छऊ मुखौटा कला की विरासत

मकर परब 2026 में जीवंत हुई सरायकेला छऊ मुखौटा कला की विरासत

झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला और जनजातीय जीवनशैली को व्यापक मंच देने के उद्देश्य से रांची के हेरिटेज विलेज चेंजोरा में “मकर परब 2026″ एक दिवसीय जनजातीय विरासत अनुभव” का विशेष सांस्कृतिक आयोजन किया गया। कलामंदिर–द सेलुलॉइड चैप्टर आर्ट फाउंडेशन एवं हेरिटेज विलेज चेंजोरा के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की सीएफपीजीएस योजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक प्रेम रंजन भी उपस्थित रहे।आईएचएम रांची के नेतृत्व में आयोजित इस पहल का उद्देश्य झारखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक कलाओं और विरासत को पर्यटन से जोड़ते हुए देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करना था। कार्यक्रम में सिंहभूम एवं कोल्हान क्षेत्र की समृद्ध और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से समझने का अवसर प्रतिभागियों को मिला। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सरायकेला छऊ मुखौटा निर्माण कार्यशाला, व्याख्यान और जीवंत प्रदर्शन रहा। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित गुरु सुशांत कुमार महापात्र, युवा पारंपरिक मुखौटा शिल्पी मास्टर सुमित कुमार महापात्र तथा उनके सहयोगी रोहित साहु ने प्रतिभागियों को छऊ मुखौटा निर्माण की पारंपरिक तकनीक, कलात्मक स्वरूप और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने मुखौटा निर्माण की बारीकियों को करीब से देखा और इस पारंपरिक शिल्प की जटिल प्रक्रिया को समझा। आयोजन में हेरिटेज विलेज चेंजोरा संचालन समिति एवं स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही। इसके साथ ही पारंपरिक जनजातीय पाक-कला का आयोजन किया गया। वहीं वरीय गुरु परमानंद की टीम द्वारा खरसावां छऊ नृत्य की पारंपरिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया। आयोजकों के अनुसार, ऐसे आयोजन केवल कला प्रदर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी हैं। सरायकेला छऊ मुखौटा निर्माण जैसी पारंपरिक कला को कार्यशाला, प्रदर्शन और पर्यटन से जोड़कर इसके संरक्षण तथा व्यापक पहचान की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।इस आयोजन के सफल संचालन के लिए कलामंदिर–द सेलुलॉइड चैप्टर आर्ट फाउंडेशन के निदेशक अमिताभ घोष के प्रति आभार एवं साधुवाद व्यक्त किया गया। झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला और जनजातीय जीवनशैली को व्यापक मंच देने के उद्देश्य से रांची के हेरिटेज विलेज चेंजोरा में “मकर परब 2026″ एक दिवसीय जनजातीय विरासत अनुभव” का विशेष सांस्कृतिक आयोजन किया गया। कलामंदिर–द सेलुलॉइड चैप्टर आर्ट फाउंडेशन एवं हेरिटेज विलेज चेंजोरा के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की सीएफपीजीएस योजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक प्रेम रंजन भी उपस्थित रहे।आईएचएम रांची के नेतृत्व में आयोजित इस पहल का उद्देश्य झारखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक कलाओं और विरासत को पर्यटन से जोड़ते हुए देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करना था। कार्यक्रम में सिंहभूम एवं कोल्हान क्षेत्र की समृद्ध और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से समझने का अवसर प्रतिभागियों को मिला। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सरायकेला छऊ मुखौटा निर्माण कार्यशाला, व्याख्यान और जीवंत प्रदर्शन रहा। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित गुरु सुशांत कुमार महापात्र, युवा पारंपरिक मुखौटा शिल्पी मास्टर सुमित कुमार महापात्र तथा उनके सहयोगी रोहित साहु ने प्रतिभागियों को छऊ मुखौटा निर्माण की पारंपरिक तकनीक, कलात्मक स्वरूप और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने मुखौटा निर्माण की बारीकियों को करीब से देखा और इस पारंपरिक शिल्प की जटिल प्रक्रिया को समझा। आयोजन में हेरिटेज विलेज चेंजोरा संचालन समिति एवं स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही। इसके साथ ही पारंपरिक जनजातीय पाक-कला का आयोजन किया गया। वहीं वरीय गुरु परमानंद की टीम द्वारा खरसावां छऊ नृत्य की पारंपरिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया। आयोजकों के अनुसार, ऐसे आयोजन केवल कला प्रदर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी हैं। सरायकेला छऊ मुखौटा निर्माण जैसी पारंपरिक कला को कार्यशाला, प्रदर्शन और पर्यटन से जोड़कर इसके संरक्षण तथा व्यापक पहचान की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।इस आयोजन के सफल संचालन के लिए कलामंदिर–द सेलुलॉइड चैप्टर आर्ट फाउंडेशन के निदेशक अमिताभ घोष के प्रति आभार एवं साधुवाद व्यक्त किया गया।  

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