भारत की संशोधित GDP गणना और आधार वर्ष में बदलाव को IMF ने बताया अपनी सलाह के अनुरूप

भारत की संशोधित GDP गणना और आधार वर्ष में बदलाव को IMF ने बताया अपनी सलाह के अनुरूप

(सागर कुलकर्णी)
वॉशिंगटन, 15 अक्टूबर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत की संशोधित जीडीपी गणना पद्धति सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है और आईएमएफ की सलाह से पूरी तरह मेल खाती है। आईएमएफ के एशिया एवं प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने बैंकॉक में संवाददाताओं से कहा कि भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के आधार वर्ष में संशोधन ‘‘स्वागत योग्य कदम’’ है। उन्होंने कहा कि संशोधित पद्धति आईएमएफ के सांख्यिकी विभाग की ओर से दी गई सलाह से पूरी तरह मेल खाती है।

श्रीनिवासन ने कहा, ‘‘पद्धति में ये संशोधन पूरी तरह हमारी भारत को दी सलाह के अनुरूप हैं। इसमें हमारे सांख्यिकी विभाग की सलाह भी शामिल है।’’
उन्होंने कहा कि भारत ने जीडीपी गणना पद्धति में संशोधनों को समझाने के लिए एक टिप्पणी भी जारी की है। श्रीनिवासन ने कहा, ‘‘जीडीपी के आंकड़ों के लिहाज से भारत ने जो किया है, वह अच्छी प्रथाओं के अनुरूप है।

इसमें सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है लेकिन जीडीपी आंकड़ों को बेहतर बनाने के लिए सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) की ओर से किए गए अच्छे काम को भी स्वीकार करना चाहिए।’’
आईएमएफ के अधिकारी ने बताया कि भारत ने मजबूत बुनियादी आर्थिक स्थितियों के साथ ऊर्जा संकट का सामना किया है और उससे निपटने के लिए अच्छी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साथ ही कहा कि रुपये की विनिमय दर पर दबाव को आर्थिक विफलता के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। श्रीनिवासन ने कहा कि विनिमय दर ‘‘वैश्विक ब्याज दरों, निवेशकों की जोखिम लेने की धारणा और तेल की कीमतों पर निर्भर करती है।’’
उन्होंने कहा कि विनिमय दर पर दबाव का अर्थ यह नहीं है कि आर्थिक वृद्धि के साथ उसका कोई वास्तविक संबंध नहीं है।

आईएमएफ की बृहस्पतिवार को जारी ‘एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र की क्षेत्रीय आर्थिक परिदृश्य’ रिपोर्ट में भारत को उन उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया गया है जिनकी मुद्राओं पर ऊर्जा संकट के बाद दबाव पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले कुछ महीनों में यह दबाव कुछ कम हुआ है। इसमें भारत को उन अर्थव्यवस्थाओं में भी शामिल किया गया है जिन्होंने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया।

गौरतलब है कि सरकार की ओर से पिछले महीने जारी अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी वृद्धि के उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत रहने के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। पूर्व वित्त सचिव एस. सी. गर्ग ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए थे। गर्ग ने दावा किया था कि पिछले वर्ष के आंकड़ों को कम करके जीडीपी वृद्धि को कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने गर्ग के तरीके को आंकड़ों में से अपनी सुविधा के अनुसार चुनिंदा आंकड़े लेने वाला रवैया बताया था। उन्होंने कहा था कि जीडीपी के नवीनतम आंकड़े तैयार करने के लिए मार्च 2023 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष को नया आधार वर्ष बनाया गया है। पद्धति में बदलाव के कारण पिछले वर्ष के तिमाही आंकड़ों में भी संशोधन हुआ।

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