भागलपुर में बिहुला-विषहरी पूजा को लेकर तैयारियां चल रही हैं। विषहरी स्थान सहित शहर के विभिन्न विषहरी मंदिरों में 17 से 19 अगस्त तक तीन दिवसीय पूजा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पूजा को लेकर मंदिरों की साफ-सफाई, सजावट और अन्य तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बिहुला-विषहरी पूजा अंग क्षेत्र की विशिष्ट लोक परंपरा मानी जाती है। इसकी लोकगाथा सती बिहुला और उनके पति बाला लखेंद्र से जुड़ी है। मान्यता है कि पति बाला लखेंद्र की मृत्यु के बाद बिहुला ने उनके प्राण वापस पाने के लिए कठिन संघर्ष और तपस्या की थी। इसी लोकगाथा की स्मृति में भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में हर वर्ष बिहुला-विषहरी पूजा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। बाएं हाथ से पूजा करने की परंपरा पूजा की प्रमुख परंपराओं में माता विषहरी की बाएं हाथ से पूजा करने की परंपरा भी शामिल है। स्थानीय मान्यता के अनुसार चांदो सौदागर ने नागवंश की पूजा बाएं हाथ से करने का संकल्प लिया था। इसी मान्यता के कारण आज भी विषहरी पूजा में बाएं हाथ से पूजा करने की परंपरा निभाई जाती है। श्रद्धालु माता विषहरी को डलिया-खोचा अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। 17 अगस्त को बाबा लखेंद्र की बारात निकाली जाएगी तीन दिवसीय आयोजन के तहत 17 अगस्त को बाबा लखेंद्र की बारात निकाली जाएगी। 18 अगस्त को श्रद्धालुओं द्वारा माता विषहरी को डलिया-खोचा चढ़ाया जाएगा। वहीं 19 अगस्त को विभिन्न स्थानों से भव्य मंजूषा झांकियां निकाली जाएंगी। पारंपरिक मंजूषा कला से सजी झांकियां आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेंगी। झांकियों में बिहुला-विषहरी की लोकगाथा और अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। पंडित अजीत झा ने बताया कि बिहुला-विषहरी पूजा अंग क्षेत्र की प्राचीन लोक आस्था और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। माता विषहरी की पूजा श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं। तीन दिनों तक चलने वाले आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। मंदिर कमेटी के सदस्य चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि पूजा को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां चल रही हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। तीनों दिन धार्मिक कार्यक्रमों के साथ पारंपरिक आयोजन होंगे। अंतिम दिन निकलने वाली मंजूषा झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। भागलपुर में बिहुला-विषहरी पूजा को लेकर तैयारियां चल रही हैं। विषहरी स्थान सहित शहर के विभिन्न विषहरी मंदिरों में 17 से 19 अगस्त तक तीन दिवसीय पूजा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पूजा को लेकर मंदिरों की साफ-सफाई, सजावट और अन्य तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बिहुला-विषहरी पूजा अंग क्षेत्र की विशिष्ट लोक परंपरा मानी जाती है। इसकी लोकगाथा सती बिहुला और उनके पति बाला लखेंद्र से जुड़ी है। मान्यता है कि पति बाला लखेंद्र की मृत्यु के बाद बिहुला ने उनके प्राण वापस पाने के लिए कठिन संघर्ष और तपस्या की थी। इसी लोकगाथा की स्मृति में भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में हर वर्ष बिहुला-विषहरी पूजा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। बाएं हाथ से पूजा करने की परंपरा पूजा की प्रमुख परंपराओं में माता विषहरी की बाएं हाथ से पूजा करने की परंपरा भी शामिल है। स्थानीय मान्यता के अनुसार चांदो सौदागर ने नागवंश की पूजा बाएं हाथ से करने का संकल्प लिया था। इसी मान्यता के कारण आज भी विषहरी पूजा में बाएं हाथ से पूजा करने की परंपरा निभाई जाती है। श्रद्धालु माता विषहरी को डलिया-खोचा अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। 17 अगस्त को बाबा लखेंद्र की बारात निकाली जाएगी तीन दिवसीय आयोजन के तहत 17 अगस्त को बाबा लखेंद्र की बारात निकाली जाएगी। 18 अगस्त को श्रद्धालुओं द्वारा माता विषहरी को डलिया-खोचा चढ़ाया जाएगा। वहीं 19 अगस्त को विभिन्न स्थानों से भव्य मंजूषा झांकियां निकाली जाएंगी। पारंपरिक मंजूषा कला से सजी झांकियां आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेंगी। झांकियों में बिहुला-विषहरी की लोकगाथा और अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। पंडित अजीत झा ने बताया कि बिहुला-विषहरी पूजा अंग क्षेत्र की प्राचीन लोक आस्था और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। माता विषहरी की पूजा श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं। तीन दिनों तक चलने वाले आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। मंदिर कमेटी के सदस्य चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि पूजा को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां चल रही हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। तीनों दिन धार्मिक कार्यक्रमों के साथ पारंपरिक आयोजन होंगे। अंतिम दिन निकलने वाली मंजूषा झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।


