भागलपुर के अकबरनगर थाना क्षेत्र में किशनपुर गांव के पास हादसे में राकेश कुमार की मौत हो गई। वह ममलखा में मैच देखकर घर लौट रहे थे। राकेश तीन बेटों के पिता थे। परिजनों के मुताबिक, राकेश सुबह मैच देखने निकले थे। वह मेले में भी अपना काम-धंधा देखने जाते थे। गुरुवार शाम घर लौटते समय वह हादसे का शिकार हुए। हादसा कैसे हुआ, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। किसी ने उन्हें हादसे का शिकार होते नहीं देखा। किशनपुर की ओर से गुजर रहे एक राहगीर ने राकेश को सड़क किनारे जमीन पर गिरा देखा। उसने उन्हें पहचान लिया। उस समय राकेश की सांसें चल रही थीं। उन्हें इलाज के लिए मायागंज अस्पताल ले गए, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। राकेश के पिता का नाम कैलाश मंडल बताया गया है। परिवार को दी गई सूचना
मामल की जनकारी राकेश के बेटे को फोन पर दी गई। सूचना मिलते ही बेटा भी पहुंचा। इसके बाद राकेश को बेहतर इलाज के लिए मायागंज अस्पताल ले जाया गया। परिजनों को उम्मीद थी कि समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच जाएगी, लेकिन उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं। अस्पताल में उसकी मौत हो गई। तीन छोटे बेटों के सिर से उठा पिता का साया
बताया जा रहा है कि राकेश कुमार की उम्र करीब 34 वर्ष थी। वह शादीशुदा था और उसके तीन छोटे-छोटे बेटे हैं, जिनकी उम्र दस वर्ष से कम बताई जा रही है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। ऐसे में परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अब तीनों बच्चों के पालन-पोषण और भविष्य की जिम्मेदारी को लेकर परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पिता की असमय मौत से बच्चों के सिर से वह सहारा छिन गया, जिसकी उन्हें जिंदगी के हर मोड़ पर जरूरत थी।
परिजनों के अनुसार, राकेश अलग-अलग जगहों पर लगने वाले मेलों में जाकर अपना काम-धंधा करता था। इसी सिलसिले में वह घर से बाहर भी जाता रहता था। घटना के दिन भी वह मैच देखने और मेले से जुड़े काम के सिलसिले में निकला था। भागलपुर के अकबरनगर थाना क्षेत्र में किशनपुर गांव के पास हादसे में राकेश कुमार की मौत हो गई। वह ममलखा में मैच देखकर घर लौट रहे थे। राकेश तीन बेटों के पिता थे। परिजनों के मुताबिक, राकेश सुबह मैच देखने निकले थे। वह मेले में भी अपना काम-धंधा देखने जाते थे। गुरुवार शाम घर लौटते समय वह हादसे का शिकार हुए। हादसा कैसे हुआ, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। किसी ने उन्हें हादसे का शिकार होते नहीं देखा। किशनपुर की ओर से गुजर रहे एक राहगीर ने राकेश को सड़क किनारे जमीन पर गिरा देखा। उसने उन्हें पहचान लिया। उस समय राकेश की सांसें चल रही थीं। उन्हें इलाज के लिए मायागंज अस्पताल ले गए, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। राकेश के पिता का नाम कैलाश मंडल बताया गया है। परिवार को दी गई सूचना
मामल की जनकारी राकेश के बेटे को फोन पर दी गई। सूचना मिलते ही बेटा भी पहुंचा। इसके बाद राकेश को बेहतर इलाज के लिए मायागंज अस्पताल ले जाया गया। परिजनों को उम्मीद थी कि समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच जाएगी, लेकिन उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं। अस्पताल में उसकी मौत हो गई। तीन छोटे बेटों के सिर से उठा पिता का साया
बताया जा रहा है कि राकेश कुमार की उम्र करीब 34 वर्ष थी। वह शादीशुदा था और उसके तीन छोटे-छोटे बेटे हैं, जिनकी उम्र दस वर्ष से कम बताई जा रही है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। ऐसे में परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अब तीनों बच्चों के पालन-पोषण और भविष्य की जिम्मेदारी को लेकर परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पिता की असमय मौत से बच्चों के सिर से वह सहारा छिन गया, जिसकी उन्हें जिंदगी के हर मोड़ पर जरूरत थी।
परिजनों के अनुसार, राकेश अलग-अलग जगहों पर लगने वाले मेलों में जाकर अपना काम-धंधा करता था। इसी सिलसिले में वह घर से बाहर भी जाता रहता था। घटना के दिन भी वह मैच देखने और मेले से जुड़े काम के सिलसिले में निकला था।

