भागलपुर में मंगलवार को स्कूल में जगह की कमी, शौचालय की समस्या, दूषित पानी समेत कई मांगों को लेकर ग्रामीणों ने प्रिंसिपल का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। मामला, नाथनगर प्रखंड क्षेत्र के भतोरिया गांव स्थित मध्य विद्यालय भतोरिया का है। दरअसल, स्कूल में कई दिनों से ग्रामीण शिक्षकों से गुहार लगा रहे थे कि बच्चों को जो पानी पिलाया जा रहा है, वह पूरी तरह दूषित है। पांचवीं तक के छात्र-छात्राओं को बाथरूम करने के लिए बाहर जाना पड़ता है, जिसके कारण उन्हें परेशानी हो रही है। छह दिनों से ग्रामीण स्कूल में शांतिपूर्ण तरीके से शिक्षकों के पास अपनी मांगों को लेकर पत्र दे रहे थे, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की समस्या का निराकरण नहीं किया गया। इसके बाद बुधवार को ग्रामीणों की भारी भीड़ स्कूल पहुंची और प्रिंसिपल का घेराव किया। ग्रामीणों ने संबंधित मांगों को लिखित तौर पर देते हुए जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की। वहीं, प्रिंसिपल सुबोध कुमार पासवान ने ग्रामीणों को जल्द समस्या का समाधान करने का आश्वासन देते हुए हंगामा शांत कराया। स्कूल के पास पार्किंग, मैदान और शौचालय की व्यवस्था नहीं मध्य विद्यालय भतोरिया में लगभग 600 बच्चों का एडमिशन है। करीब 500 से ज्यादा बच्चे रोजाना स्कूल आते हैं। स्कूल में जगह नहीं होने के कारण बरामदे पर क्लास चलती है। जहां बच्चे पढ़ रहे हैं, वहीं शिक्षकों के लिए अपनी बाइक पार्क करना भी मजबूरी है। पार्किंग की व्यवस्था नहीं रहने के कारण शिक्षक विद्यालय के अंदर ही गाड़ी पार्क करते हैं। छात्रों के परिजन का आरोप है कि मिड डे मील का खाना भी उसी कमरे में खिलाया जाता है, जहां बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। शौचालय स्कूल में दो जरूर हैं, लेकिन नियमित साफ-सफाई नहीं होने की वजह से बच्चे वहां जाने से कतराते हैं। पैरेंट्स ने कहा कि स्कूल का अपना कोई मैदान नहीं है। स्कूल के पास एक विशेष समुदाय का कब्रिस्तान है, जिसमें फिलहाल बच्चे किसी तरह मनोरंजन और खेलकूद करते हैं। उसमें भी स्थानीय लोगों ने कब्जा कर रखा है, जिसकी वजह से बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण बोले- कई बार मांग रखी, कोई सुनवाई नहीं हुई इस स्कूल के पास आउट छात्र सीटू कुमार ने बताया कि लंबे समय से स्कूल में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। बच्चों को जो पानी पिलाया जा रहा है, वह पूरी तरह दूषित है। वहीं, शौचालय की कमी है और बच्चों के स्कूल में बैठने की भी जगह नहीं है। हम लोगों ने आज प्रदर्शन कर स्कूल प्रशासन को लिखित तौर पर दिया है कि जल्द इस समस्या का समाधान किया जाए। वहीं, स्कूल के अध्यक्ष और समाज के बुद्धिजीवी लोगों ने भी मिलकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को समझाया, जिसके बाद मामला शांत हुआ। फिलहाल सभी की निगाहें शिक्षा विभाग के उस निर्णय पर टिकी हैं, जिसको लेकर आज प्रदर्शन किया गया। प्राचार्य सुबोध कुमार पासवान ने बताया कि हमने कई बार समस्या से विभाग को अवगत कराया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि आज ग्रामीणों की भीड़ आई थी। उन्होंने अपनी बातें रखीं। मांग उनकी जायज है और हम लोग ग्रामीणों के साथ हैं। हम विभाग को फिर एक बार बताएंगे। उम्मीद है कि विभाग हमारी बातों को सुनेगा और जल्द समस्या का समाधान कराया जाएगा। भागलपुर में मंगलवार को स्कूल में जगह की कमी, शौचालय की समस्या, दूषित पानी समेत कई मांगों को लेकर ग्रामीणों ने प्रिंसिपल का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। मामला, नाथनगर प्रखंड क्षेत्र के भतोरिया गांव स्थित मध्य विद्यालय भतोरिया का है। दरअसल, स्कूल में कई दिनों से ग्रामीण शिक्षकों से गुहार लगा रहे थे कि बच्चों को जो पानी पिलाया जा रहा है, वह पूरी तरह दूषित है। पांचवीं तक के छात्र-छात्राओं को बाथरूम करने के लिए बाहर जाना पड़ता है, जिसके कारण उन्हें परेशानी हो रही है। छह दिनों से ग्रामीण स्कूल में शांतिपूर्ण तरीके से शिक्षकों के पास अपनी मांगों को लेकर पत्र दे रहे थे, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की समस्या का निराकरण नहीं किया गया। इसके बाद बुधवार को ग्रामीणों की भारी भीड़ स्कूल पहुंची और प्रिंसिपल का घेराव किया। ग्रामीणों ने संबंधित मांगों को लिखित तौर पर देते हुए जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की। वहीं, प्रिंसिपल सुबोध कुमार पासवान ने ग्रामीणों को जल्द समस्या का समाधान करने का आश्वासन देते हुए हंगामा शांत कराया। स्कूल के पास पार्किंग, मैदान और शौचालय की व्यवस्था नहीं मध्य विद्यालय भतोरिया में लगभग 600 बच्चों का एडमिशन है। करीब 500 से ज्यादा बच्चे रोजाना स्कूल आते हैं। स्कूल में जगह नहीं होने के कारण बरामदे पर क्लास चलती है। जहां बच्चे पढ़ रहे हैं, वहीं शिक्षकों के लिए अपनी बाइक पार्क करना भी मजबूरी है। पार्किंग की व्यवस्था नहीं रहने के कारण शिक्षक विद्यालय के अंदर ही गाड़ी पार्क करते हैं। छात्रों के परिजन का आरोप है कि मिड डे मील का खाना भी उसी कमरे में खिलाया जाता है, जहां बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। शौचालय स्कूल में दो जरूर हैं, लेकिन नियमित साफ-सफाई नहीं होने की वजह से बच्चे वहां जाने से कतराते हैं। पैरेंट्स ने कहा कि स्कूल का अपना कोई मैदान नहीं है। स्कूल के पास एक विशेष समुदाय का कब्रिस्तान है, जिसमें फिलहाल बच्चे किसी तरह मनोरंजन और खेलकूद करते हैं। उसमें भी स्थानीय लोगों ने कब्जा कर रखा है, जिसकी वजह से बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण बोले- कई बार मांग रखी, कोई सुनवाई नहीं हुई इस स्कूल के पास आउट छात्र सीटू कुमार ने बताया कि लंबे समय से स्कूल में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। बच्चों को जो पानी पिलाया जा रहा है, वह पूरी तरह दूषित है। वहीं, शौचालय की कमी है और बच्चों के स्कूल में बैठने की भी जगह नहीं है। हम लोगों ने आज प्रदर्शन कर स्कूल प्रशासन को लिखित तौर पर दिया है कि जल्द इस समस्या का समाधान किया जाए। वहीं, स्कूल के अध्यक्ष और समाज के बुद्धिजीवी लोगों ने भी मिलकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को समझाया, जिसके बाद मामला शांत हुआ। फिलहाल सभी की निगाहें शिक्षा विभाग के उस निर्णय पर टिकी हैं, जिसको लेकर आज प्रदर्शन किया गया। प्राचार्य सुबोध कुमार पासवान ने बताया कि हमने कई बार समस्या से विभाग को अवगत कराया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि आज ग्रामीणों की भीड़ आई थी। उन्होंने अपनी बातें रखीं। मांग उनकी जायज है और हम लोग ग्रामीणों के साथ हैं। हम विभाग को फिर एक बार बताएंगे। उम्मीद है कि विभाग हमारी बातों को सुनेगा और जल्द समस्या का समाधान कराया जाएगा।

