बेतिया में पंडित राजकुमार शुक्ल की 151वीं जयंती:‘भारत रत्न’ देने की उठी मांग; गांधी को चंपारण लाने में निभाई थी अहम भूमिका

बेतिया में पंडित राजकुमार शुक्ल की 151वीं जयंती:‘भारत रत्न’ देने की उठी मांग; गांधी को चंपारण लाने में निभाई थी अहम भूमिका

चंपारण सत्याग्रह के सूत्रधार पंडित राजकुमार शुक्ल की 151वीं जयंती रविवार को बेतिया में श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की मांग उठाई गई। कार्यक्रम में बेतिया नगर निगम की महापौर गरिमा देवी शिकारिया, चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने पंडित राजकुमार शुक्ल के जीवन और संघर्ष को याद किया। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी शासन के दौरान चंपारण के किसानों पर जबरन ‘तीन कठिया प्रथा’ लागू की गई थी। इसके कारण किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। गांधी को चंपारण लाने का लिया था संकल्प किसानों की समस्याओं को देखते हुए राजकुमार शुक्ल ने उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने महात्मा गांधी को चंपारण लाने का संकल्प लिया और लखनऊ में उनसे मुलाकात कर चंपारण आने का आग्रह किया। उनके लगातार प्रयासों के बाद महात्मा गांधी वर्ष 1917 में चंपारण पहुंचे। चंपारण सत्याग्रह ने आंदोलन को दी नई दिशा महात्मा गांधी के चंपारण पहुंचने के बाद सत्याग्रह की शुरुआत हुई। वक्ताओं ने कहा कि चंपारण सत्याग्रह ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। राजकुमार शुक्ल ने किसानों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत रत्न देने की मांग दोहराई कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने पंडित राजकुमार शुक्ल को ‘भारत रत्न’ देने की मांग दोहराई। लोगों ने महापौर और विधायक से इस मांग को सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रभावी पहल करने का आग्रह किया। साथ ही, उनके संघर्ष, त्याग और आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। चंपारण सत्याग्रह के सूत्रधार पंडित राजकुमार शुक्ल की 151वीं जयंती रविवार को बेतिया में श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की मांग उठाई गई। कार्यक्रम में बेतिया नगर निगम की महापौर गरिमा देवी शिकारिया, चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने पंडित राजकुमार शुक्ल के जीवन और संघर्ष को याद किया। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी शासन के दौरान चंपारण के किसानों पर जबरन ‘तीन कठिया प्रथा’ लागू की गई थी। इसके कारण किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। गांधी को चंपारण लाने का लिया था संकल्प किसानों की समस्याओं को देखते हुए राजकुमार शुक्ल ने उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने महात्मा गांधी को चंपारण लाने का संकल्प लिया और लखनऊ में उनसे मुलाकात कर चंपारण आने का आग्रह किया। उनके लगातार प्रयासों के बाद महात्मा गांधी वर्ष 1917 में चंपारण पहुंचे। चंपारण सत्याग्रह ने आंदोलन को दी नई दिशा महात्मा गांधी के चंपारण पहुंचने के बाद सत्याग्रह की शुरुआत हुई। वक्ताओं ने कहा कि चंपारण सत्याग्रह ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। राजकुमार शुक्ल ने किसानों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत रत्न देने की मांग दोहराई कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने पंडित राजकुमार शुक्ल को ‘भारत रत्न’ देने की मांग दोहराई। लोगों ने महापौर और विधायक से इस मांग को सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रभावी पहल करने का आग्रह किया। साथ ही, उनके संघर्ष, त्याग और आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।  

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