बेगूसराय- मशरूम उत्पादन, प्रसंस्करण से आत्मनिर्भर बनेंगी ग्रामीण महिलाएं:कृषि वैज्ञानिकों ने बारीकियों, आधुनिक तकनीकी की जानकारी; कहा- ग्रामीण परिवारों की जीविका के लिए सहायक

बेगूसराय- मशरूम उत्पादन, प्रसंस्करण से आत्मनिर्भर बनेंगी ग्रामीण महिलाएं:कृषि वैज्ञानिकों ने बारीकियों, आधुनिक तकनीकी की जानकारी; कहा- ग्रामीण परिवारों की जीविका के लिए सहायक

ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, आजीविका के नए रास्ते खोलने और उन्हें स्वरोजगार के प्रति प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अधिकार जीविका महिला संकुल संघ के सभागार में मशरूम उत्पादन तथा मशरूम से बनने वाले विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों की प्रसंस्करण विधि पर उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस विशेष प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम में जीविका से जुड़ी महिलाओं और सामुदायिक कैडर ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ के रूप में राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. दया राम एवं डॉ. आरपी प्रसाद उपस्थित थे। कृषि वैज्ञानिकों ने मशरूम उत्पादन की बारीकियों और आधुनिक तकनीकी जानकारियों से अवगत कराया। मशरूम के विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार करने की तकनीक की भी दी जानकारी वैज्ञानिकों ने महिलाओं को समझाया कि किस प्रकार कम लागत, कम जगह और सीमित संसाधनों में भी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर गुणवत्तापूर्ण मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान केवल ताजा मशरूम उगाने तक ही सीमित जानकारी नहीं दी गई। बल्कि मशरूम के प्रसंस्करण यानी उससे विभिन्न प्रकार के मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि मशरूम से अचार, पापड़, बिस्कुट, पाउडर और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। इन मूल्यवर्धित उत्पादों का बाजार में बेहतर मूल्य मिलता है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आय में कई गुना वृद्धि संभव है। वैज्ञानिकों ने इन उत्पादों के व्यावसायिक महत्व और बाजार की मांग पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। वैज्ञानिकों ने मशरूम उत्पादन को ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका का एक बेहद संभावनाशील और टिकाऊ माध्यम बताया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के पास समय और श्रम की उपलब्धता होती है। जिसका सही उपयोग मशरूम उद्यम में किया जा सकता है। मशरूम उत्पादन के साथ-साथ यदि उसके प्रसंस्करण और विपणन की दिशा में संगठित पहल की जाए, तो गांव-गांव में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। कृषि वैज्ञानिक बोले- महिलाएं सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना सकेंगी इससे महिलाओं को रोजगार की तलाश में बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी और वे अपने घर से ही एक सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना सकेंगी। इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम का मूल उद्देश्य जीविका से जुड़ी महिलाओं तथा सामुदायिक संगठनों की क्षमता का संवर्धन करना था। उन्हें कृषि आधारित आजीविका के नए विकल्पों से परिचित कराते हुए उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देना प्राथमिकताओं में शामिल रहा। जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक अविनाश कुमार ने कहा कि इस प्रकार के उन्मुखीकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बन रहे हैं। ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक खेती और घरेलू कामकाज तक सीमित न रहकर अब नए उद्यमों को अपनाने के लिए आगे आ रही हैं। मशरूम उत्पादन जैसे नवाचार से उनकी आय के अवसरों में विस्तार होगा, वे परिवार के वित्तीय निर्णयों में भी मजबूत भूमिका निभा सकेंगी। महिलाओं की यह आर्थिक प्रगति आत्मनिर्भर महिला, सशक्त परिवार और समृद्ध समुदाय के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बेहद ठोस और क्रांतिकारी कदम है। जब गांव की महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तो उससे पूरे समाज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। इस अवसर पर संकुल संघ से जुड़ी बड़ी संख्या में जीविका दीदियां, जीविकोपार्जन विशेषज्ञ ओम कश्यप, संबंधित क्षेत्र के ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर तथा अन्य जीविका कर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में दीदियों ने विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी के लिए आभार व्यक्त किया और मशरूम उत्पादन को अपने समूहों के माध्यम से एक व्यावसायिक रूप में अपनाने का संकल्प लिया। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, आजीविका के नए रास्ते खोलने और उन्हें स्वरोजगार के प्रति प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अधिकार जीविका महिला संकुल संघ के सभागार में मशरूम उत्पादन तथा मशरूम से बनने वाले विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों की प्रसंस्करण विधि पर उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस विशेष प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम में जीविका से जुड़ी महिलाओं और सामुदायिक कैडर ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ के रूप में राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. दया राम एवं डॉ. आरपी प्रसाद उपस्थित थे। कृषि वैज्ञानिकों ने मशरूम उत्पादन की बारीकियों और आधुनिक तकनीकी जानकारियों से अवगत कराया। मशरूम के विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार करने की तकनीक की भी दी जानकारी वैज्ञानिकों ने महिलाओं को समझाया कि किस प्रकार कम लागत, कम जगह और सीमित संसाधनों में भी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर गुणवत्तापूर्ण मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान केवल ताजा मशरूम उगाने तक ही सीमित जानकारी नहीं दी गई। बल्कि मशरूम के प्रसंस्करण यानी उससे विभिन्न प्रकार के मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि मशरूम से अचार, पापड़, बिस्कुट, पाउडर और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। इन मूल्यवर्धित उत्पादों का बाजार में बेहतर मूल्य मिलता है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आय में कई गुना वृद्धि संभव है। वैज्ञानिकों ने इन उत्पादों के व्यावसायिक महत्व और बाजार की मांग पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। वैज्ञानिकों ने मशरूम उत्पादन को ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका का एक बेहद संभावनाशील और टिकाऊ माध्यम बताया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के पास समय और श्रम की उपलब्धता होती है। जिसका सही उपयोग मशरूम उद्यम में किया जा सकता है। मशरूम उत्पादन के साथ-साथ यदि उसके प्रसंस्करण और विपणन की दिशा में संगठित पहल की जाए, तो गांव-गांव में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। कृषि वैज्ञानिक बोले- महिलाएं सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना सकेंगी इससे महिलाओं को रोजगार की तलाश में बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी और वे अपने घर से ही एक सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना सकेंगी। इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम का मूल उद्देश्य जीविका से जुड़ी महिलाओं तथा सामुदायिक संगठनों की क्षमता का संवर्धन करना था। उन्हें कृषि आधारित आजीविका के नए विकल्पों से परिचित कराते हुए उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देना प्राथमिकताओं में शामिल रहा। जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक अविनाश कुमार ने कहा कि इस प्रकार के उन्मुखीकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बन रहे हैं। ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक खेती और घरेलू कामकाज तक सीमित न रहकर अब नए उद्यमों को अपनाने के लिए आगे आ रही हैं। मशरूम उत्पादन जैसे नवाचार से उनकी आय के अवसरों में विस्तार होगा, वे परिवार के वित्तीय निर्णयों में भी मजबूत भूमिका निभा सकेंगी। महिलाओं की यह आर्थिक प्रगति आत्मनिर्भर महिला, सशक्त परिवार और समृद्ध समुदाय के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बेहद ठोस और क्रांतिकारी कदम है। जब गांव की महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तो उससे पूरे समाज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। इस अवसर पर संकुल संघ से जुड़ी बड़ी संख्या में जीविका दीदियां, जीविकोपार्जन विशेषज्ञ ओम कश्यप, संबंधित क्षेत्र के ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर तथा अन्य जीविका कर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में दीदियों ने विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी के लिए आभार व्यक्त किया और मशरूम उत्पादन को अपने समूहों के माध्यम से एक व्यावसायिक रूप में अपनाने का संकल्प लिया।  

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