Umrah pilgrims stranded: सऊदी अरब की पवित्र धार्मिक यात्रा पर गए भारतीय नागरिकों की मुश्किलें इस वक्त अपने चरम पर पहुंच गई हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक गंभीर मामला उजागर करते हुए बताया है कि पिछले दो से तीन हफ्तों से लगभग 4000 भारतीय उमराह यात्री मक्का, मदीना और जेद्दा में बुरी तरह फंसे हुए हैं। हालात इतने दर्दनाक हो चुके हैं कि इन उमराह जायरीनों को मानो पूरी तरह अल्लाह की राह पर छोड़ दिया गया है और वे हर पल भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में ओवैसी ने केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला और क्यों फंसे हैं यात्री?
सांसद ओवैसी के मुताबिक, ये सभी चार हजार यात्री इंडिगो, आकाशा एयर और एयर इंडिया की उड़ानों के जरिए सऊदी अरब पहुंचे थे। लेकिन अब बड़ा प्रशासनिक संकट यह खड़ा हो गया है कि भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की तरफ से इन तीनों प्रमुख एयरलाइंस को जेद्दा के लिए उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस कागजी और तकनीकी गतिरोध के बीच मानवीय संकट यह पैदा हो गया है कि जिन ट्रेवल एजेंटों ने इन यात्रियों को वहां पहुंचाया था, वे अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ते हुए इन्हें बीच मझधार में अकेला छोड़कर गायब हो चुके हैं।
कुछ यात्रियों को जेद्दा में जैसे-तैसे ठहराने की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, फिर भी कुल मिलाकर जमीनी हालात दयनीय बने हुए हैं। स्थानीय स्तर पर लगातार बदलती परिस्थितियों और पास में मौजूद फंड के खत्म होने के कारण इन लोगों की समस्याएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं।
सरकार से की गई है तत्काल मदद की गुहार
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ओवैसी ने केंद्र सरकार के तीन प्रमुख मंत्रियों विदेश मंत्री एस. जयशंकर, नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से इस प्रकरण पर संज्ञान लेने की पुरजोर गुजारिश की है। उन्होंने मांग उठाई है कि डीजीसीए तत्काल प्रभाव से इंडिगो, आकाशा एयर और एयर इंडिया को बड़े आकार के विमान (जैसे A321) तैनात करने की अनुमति दे, ताकि इन फंसे हुए भारतीयों को सुरक्षित उनके वतन वापस लाया जा सके।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं ज्यादातर यात्री
इस पूरे संकट का सबसे डरावना पहलू यह है कि ये सभी तीर्थयात्री बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर तबके से ताल्लुक रखते हैं। इनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे सऊदी एयरलाइंस या किसी अन्य महंगे माध्यम से अपने दम पर नया टिकट खरीदकर भारत लौट सकें। यही मुख्य वजह है कि वे वहां गहरे मानसिक तनाव और बेबसी के साये में जीने को मजबूर हैं।
AIMIM प्रमुख ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि डीजीसीए स्तर पर हरी झंडी मिलने में देरी होती है, तो भारत सरकार को बिना देर किए अपने स्तर पर विशेष विमान (Special Aircraft) भेजकर इन बेबस लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू करना चाहिए। अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस तीखे खुलासे के बाद केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय की तरफ से क्या त्वरित कदम उठाया जाता है।

