मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर NDA के सभी विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों को पटना बुलाया है। आज शाम 4 बजे मुख्यमंत्री आवास (लोक सेवक आवास) पर अहम बैठक बुलाई गई है। बैठक में विधान परिषद चुनाव में NDA की साझा रणनीति बनाने के साथ गठबंधन की एकजुटता का संदेश देने की कोशिश होगी। बैठक में चुनाव जीतने की रणनीति पर चर्चा के साथ जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक अनंत सिंह और पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने पर भी बातचीत हो सकती है। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ पार्टी के तीन विधायकों के विरोध और सारण शिक्षक सीट से रामपुकार सिन्हा के निर्दलीय नामांकन का मुद्दा भी उठ सकता है। इन विवादों के बीच NDA नेतृत्व की कोशिश गठबंधन के भीतर समन्वय बनाने और चुनाव में नुकसान की आशंका को कम करने की होगी। बैठक में इन 4 मुद्दों पर हो सकती है चर्चा अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच क्यों बढ़ा विवाद? JDU विधायक अनंत सिंह और पटना स्नातक सीट से पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार के बीच विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अनंत सिंह खुलकर नीरज कुमार के विरोध में उतर चुके हैं। वह जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। 1 अक्टूबर को अनुज सिंह के नामांकन में शामिल होने के बाद अनंत सिंह ने 7 अक्टूबर को उनके समर्थन में रोड शो भी किया था। यह रोड को रास्ते में कई जगहों पर समर्थकों ने अनंत सिंह का स्वागत किया। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने कहा था, ‘आप लोग जब भी बुलाएंगे, हम हमेशा हाजिर रहेंगे।’ अनंत सिंह के इस रुख से JDU के भीतर विवाद गहरा गया है। पटना स्नातक सीट पर पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की थी, लेकिन अनंत सिंह ने अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार जारी रखा। ललन सिंह ने कहा था- अनंत सिंह पार्टी के साथ हैं विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री और JDU के वरिष्ठ नेता ललन सिंह को दी गई थी। 5 अक्टूबर को अनंत सिंह से बातचीत के बाद ललन सिंह ने कहा था कि अनंत सिंह की कुछ शिकायतें हैं। उनका कहना था कि जब वह विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे, तब उनके खिलाफ प्रचार किया गया था, लेकिन पार्टी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। ललन सिंह ने माना था कि उस समय प्रदेश इकाई से चूक हुई थी। उन्होंने कहा था कि कोई क्रिया होगी तो प्रतिक्रिया भी होगी और ताली दोनों हाथों से बजती है। ललन सिंह के मुताबिक, उन्होंने अनंत सिंह से नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक बयान नहीं देने को कहा था। अनंत सिंह ने उनकी बात मानने की बात कही थी। हालांकि, इसके करीब 48 घंटे बाद ही अनंत सिंह ने अनुज सिंह के समर्थन में रोड शो किया। इससे पार्टी के भीतर विवाद फिर चर्चा में आ गया। संजय झा ने ललन सिंह के कदम को पार्टी हित में बताया था ललन सिंह के बयान पर JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा था कि ललन सिंह ने पार्टी के हित में काम किया है। उन्होंने इस मामले पर फिलहाल इतना ही कहने की बात कही थी। इससे पहले 7 सितंबर को अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच सुलह कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन बात नहीं बनी। 2 अक्टूबर को संजय झा ने कहा था कि यह मामला ललन सिंह के देखने का है। 5 अक्टूबर को नीतीश कुमार ने ललन सिंह से उनके पटना स्थित आवास पर मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई थी। इसके बाद नीतीश कुमार के सरकारी आवास 7, सर्कुलर रोड पर संजय झा, डिप्टी सीएम विजय चौधरी और मंत्री अशोक चौधरी पहुंचे थे। तीनों नेताओं ने नीतीश कुमार के साथ करीब 30 मिनट तक बंद कमरे में बैठक की थी। 6 अक्टूबर को संजय झा और विजय चौधरी ने ललन सिंह के प्रयास को पार्टी हित में बताया था। 7 अक्टूबर को नीतीश कुमार के आवास पर विधान परिषद चुनाव को लेकर हुई बैठक में भी अनंत सिंह-नीरज विवाद पर चर्चा हुई थी। नीरज कुमार के समर्थन में उतरे थे निशांत कुमार अनंत सिंह के विरोध के बीच JDU के कई नेता नीरज कुमार के समर्थन में सामने आए थे। 4 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा था कि अनंत सिंह गलत कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और नीरज कुमार की जीत सुनिश्चित करने की अपील की थी। 5 अक्टूबर को नीरज कुमार के नामांकन में निशांत कुमार भी शामिल हुए थे। पार्टी की ओर से लगातार यह संदेश देने की कोशिश की गई कि पटना स्नातक सीट पर सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलकर नीरज कुमार के समर्थन में काम करना चाहिए। अनंत सिंह ने कहा था- नीतीश कुमार के लिए गोली खाई अनंत सिंह पहले भी नीतीश कुमार के प्रति अपनी निष्ठा जता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि वह नीतीश कुमार को मानते हैं और उनके लिए नौ लोगों की कुर्बानी दी है, यहां तक कि गोली भी खाई है। हालांकि, नीरज कुमार को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई थी। अनंत सिंह का कहना था कि जब वह विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे, तब नीरज कुमार ने उनके खिलाफ प्रचार किया था, लेकिन पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी में नियम हैं तो वे सभी के लिए बराबर होने चाहिए। RLM में उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ तीन विधायक एकजुट विधान परिषद चुनाव को लेकर दूसरा विवाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा में सामने आया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की इच्छा के खिलाफ पार्टी के नेता रामपुकार सिन्हा ने सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन कराया था। पार्टी के चार में से तीन विधायक रामपुकार सिन्हा के समर्थन में उतर आए थे। इन विधायकों में माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह शामिल हैं। तीनों विधायकों ने इसे पार्टी के कार्यकर्ताओं के सम्मान और हित से जुड़ा मामला बताया था। उनका कहना था कि वे लोकतांत्रिक तरीके से रामपुकार सिन्हा को उम्मीदवार बनाना चाहते थे, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने समर्थन देने से इनकार कर दिया। माधव आनंद ने कहा था- कार्यकर्ताओं में नाराजगी RLM विधायक माधव आनंद ने कहा था कि जब परिवार के किसी व्यक्ति को पद देने की बात आती है, तब NDA में सबकुछ ठीक नहीं रहता। वहीं, जब कार्यकर्ता को पद देने की बात आती है, तब उस पर प्रशासनिक कार्रवाई की बात होने लगती है। उन्होंने कहा था कि महीनों की तैयारी के बाद किसी प्रत्याशी को पीछे हटने के लिए कहना उचित नहीं है। माधव आनंद के मुताबिक, वह विधायक दल के नेता और शून्यकाल के सभापति के रूप में राज्यभर में घूम रहे थे। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कार्यकर्ताओं को केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर अपेक्षित सम्मान और सहयोग नहीं मिल रहा था। विधायकों ने उपेंद्र कुशवाहा पर लगाए थे आरोप तीनों विधायकों ने आरोप लगाया था कि वे सर्वसम्मति से रामपुकार सिन्हा को उम्मीदवार बनाना चाहते थे, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष ने समर्थन देने से मना कर दिया। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं के हितों की अनदेखी बताया था। माधव आनंद ने स्पष्ट किया था कि विधान परिषद चुनाव में पार्टी का सिंबल नहीं मिलता, बल्कि पार्टी या गठबंधन किसी उम्मीदवार को समर्थन देता है। ट उनके मुताबिक, चार विधायकों वाली पार्टी में तीन विधायकों ने लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लिया था। इसलिए रामपुकार सिन्हा को समर्थन देने का फैसला पार्टी का निर्णय था, न कि विधायकों की बगावत। उपेंद्र कुशवाहा ने बगावत से किया था इनकार 5 अक्टूबर को उपेंद्र कुशवाहा पटना स्नातक सीट से NDA प्रत्याशी नीरज कुमार और पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव के नामांकन में शामिल हुए थे। इस दौरान पार्टी के भीतर बगावत को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि कोई बागी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा था कि चुनावी राजनीतिक माहौल में लोग नशे की तरह मदहोश हो जा रहे हैं और ऐसा सत्ता पक्ष तथा विपक्ष, दोनों में हो रहा है। बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर 23 अक्टूबर को वोटिंग बिहार विधान परिषद की 8 स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर चुनाव होना है। इसके लिए मतदान 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। चुनाव की पूरी प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर NDA के सभी विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों को पटना बुलाया है। आज शाम 4 बजे मुख्यमंत्री आवास (लोक सेवक आवास) पर अहम बैठक बुलाई गई है। बैठक में विधान परिषद चुनाव में NDA की साझा रणनीति बनाने के साथ गठबंधन की एकजुटता का संदेश देने की कोशिश होगी। बैठक में चुनाव जीतने की रणनीति पर चर्चा के साथ जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक अनंत सिंह और पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने पर भी बातचीत हो सकती है। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ पार्टी के तीन विधायकों के विरोध और सारण शिक्षक सीट से रामपुकार सिन्हा के निर्दलीय नामांकन का मुद्दा भी उठ सकता है। इन विवादों के बीच NDA नेतृत्व की कोशिश गठबंधन के भीतर समन्वय बनाने और चुनाव में नुकसान की आशंका को कम करने की होगी। बैठक में इन 4 मुद्दों पर हो सकती है चर्चा अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच क्यों बढ़ा विवाद? JDU विधायक अनंत सिंह और पटना स्नातक सीट से पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार के बीच विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अनंत सिंह खुलकर नीरज कुमार के विरोध में उतर चुके हैं। वह जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। 1 अक्टूबर को अनुज सिंह के नामांकन में शामिल होने के बाद अनंत सिंह ने 7 अक्टूबर को उनके समर्थन में रोड शो भी किया था। यह रोड को रास्ते में कई जगहों पर समर्थकों ने अनंत सिंह का स्वागत किया। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने कहा था, ‘आप लोग जब भी बुलाएंगे, हम हमेशा हाजिर रहेंगे।’ अनंत सिंह के इस रुख से JDU के भीतर विवाद गहरा गया है। पटना स्नातक सीट पर पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की थी, लेकिन अनंत सिंह ने अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार जारी रखा। ललन सिंह ने कहा था- अनंत सिंह पार्टी के साथ हैं विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री और JDU के वरिष्ठ नेता ललन सिंह को दी गई थी। 5 अक्टूबर को अनंत सिंह से बातचीत के बाद ललन सिंह ने कहा था कि अनंत सिंह की कुछ शिकायतें हैं। उनका कहना था कि जब वह विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे, तब उनके खिलाफ प्रचार किया गया था, लेकिन पार्टी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। ललन सिंह ने माना था कि उस समय प्रदेश इकाई से चूक हुई थी। उन्होंने कहा था कि कोई क्रिया होगी तो प्रतिक्रिया भी होगी और ताली दोनों हाथों से बजती है। ललन सिंह के मुताबिक, उन्होंने अनंत सिंह से नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक बयान नहीं देने को कहा था। अनंत सिंह ने उनकी बात मानने की बात कही थी। हालांकि, इसके करीब 48 घंटे बाद ही अनंत सिंह ने अनुज सिंह के समर्थन में रोड शो किया। इससे पार्टी के भीतर विवाद फिर चर्चा में आ गया। संजय झा ने ललन सिंह के कदम को पार्टी हित में बताया था ललन सिंह के बयान पर JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा था कि ललन सिंह ने पार्टी के हित में काम किया है। उन्होंने इस मामले पर फिलहाल इतना ही कहने की बात कही थी। इससे पहले 7 सितंबर को अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच सुलह कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन बात नहीं बनी। 2 अक्टूबर को संजय झा ने कहा था कि यह मामला ललन सिंह के देखने का है। 5 अक्टूबर को नीतीश कुमार ने ललन सिंह से उनके पटना स्थित आवास पर मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई थी। इसके बाद नीतीश कुमार के सरकारी आवास 7, सर्कुलर रोड पर संजय झा, डिप्टी सीएम विजय चौधरी और मंत्री अशोक चौधरी पहुंचे थे। तीनों नेताओं ने नीतीश कुमार के साथ करीब 30 मिनट तक बंद कमरे में बैठक की थी। 6 अक्टूबर को संजय झा और विजय चौधरी ने ललन सिंह के प्रयास को पार्टी हित में बताया था। 7 अक्टूबर को नीतीश कुमार के आवास पर विधान परिषद चुनाव को लेकर हुई बैठक में भी अनंत सिंह-नीरज विवाद पर चर्चा हुई थी। नीरज कुमार के समर्थन में उतरे थे निशांत कुमार अनंत सिंह के विरोध के बीच JDU के कई नेता नीरज कुमार के समर्थन में सामने आए थे। 4 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा था कि अनंत सिंह गलत कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और नीरज कुमार की जीत सुनिश्चित करने की अपील की थी। 5 अक्टूबर को नीरज कुमार के नामांकन में निशांत कुमार भी शामिल हुए थे। पार्टी की ओर से लगातार यह संदेश देने की कोशिश की गई कि पटना स्नातक सीट पर सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलकर नीरज कुमार के समर्थन में काम करना चाहिए। अनंत सिंह ने कहा था- नीतीश कुमार के लिए गोली खाई अनंत सिंह पहले भी नीतीश कुमार के प्रति अपनी निष्ठा जता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि वह नीतीश कुमार को मानते हैं और उनके लिए नौ लोगों की कुर्बानी दी है, यहां तक कि गोली भी खाई है। हालांकि, नीरज कुमार को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई थी। अनंत सिंह का कहना था कि जब वह विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे, तब नीरज कुमार ने उनके खिलाफ प्रचार किया था, लेकिन पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी में नियम हैं तो वे सभी के लिए बराबर होने चाहिए। RLM में उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ तीन विधायक एकजुट विधान परिषद चुनाव को लेकर दूसरा विवाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा में सामने आया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की इच्छा के खिलाफ पार्टी के नेता रामपुकार सिन्हा ने सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन कराया था। पार्टी के चार में से तीन विधायक रामपुकार सिन्हा के समर्थन में उतर आए थे। इन विधायकों में माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह शामिल हैं। तीनों विधायकों ने इसे पार्टी के कार्यकर्ताओं के सम्मान और हित से जुड़ा मामला बताया था। उनका कहना था कि वे लोकतांत्रिक तरीके से रामपुकार सिन्हा को उम्मीदवार बनाना चाहते थे, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने समर्थन देने से इनकार कर दिया। माधव आनंद ने कहा था- कार्यकर्ताओं में नाराजगी RLM विधायक माधव आनंद ने कहा था कि जब परिवार के किसी व्यक्ति को पद देने की बात आती है, तब NDA में सबकुछ ठीक नहीं रहता। वहीं, जब कार्यकर्ता को पद देने की बात आती है, तब उस पर प्रशासनिक कार्रवाई की बात होने लगती है। उन्होंने कहा था कि महीनों की तैयारी के बाद किसी प्रत्याशी को पीछे हटने के लिए कहना उचित नहीं है। माधव आनंद के मुताबिक, वह विधायक दल के नेता और शून्यकाल के सभापति के रूप में राज्यभर में घूम रहे थे। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कार्यकर्ताओं को केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर अपेक्षित सम्मान और सहयोग नहीं मिल रहा था। विधायकों ने उपेंद्र कुशवाहा पर लगाए थे आरोप तीनों विधायकों ने आरोप लगाया था कि वे सर्वसम्मति से रामपुकार सिन्हा को उम्मीदवार बनाना चाहते थे, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष ने समर्थन देने से मना कर दिया। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं के हितों की अनदेखी बताया था। माधव आनंद ने स्पष्ट किया था कि विधान परिषद चुनाव में पार्टी का सिंबल नहीं मिलता, बल्कि पार्टी या गठबंधन किसी उम्मीदवार को समर्थन देता है। ट उनके मुताबिक, चार विधायकों वाली पार्टी में तीन विधायकों ने लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लिया था। इसलिए रामपुकार सिन्हा को समर्थन देने का फैसला पार्टी का निर्णय था, न कि विधायकों की बगावत। उपेंद्र कुशवाहा ने बगावत से किया था इनकार 5 अक्टूबर को उपेंद्र कुशवाहा पटना स्नातक सीट से NDA प्रत्याशी नीरज कुमार और पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव के नामांकन में शामिल हुए थे। इस दौरान पार्टी के भीतर बगावत को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि कोई बागी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा था कि चुनावी राजनीतिक माहौल में लोग नशे की तरह मदहोश हो जा रहे हैं और ऐसा सत्ता पक्ष तथा विपक्ष, दोनों में हो रहा है। बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर 23 अक्टूबर को वोटिंग बिहार विधान परिषद की 8 स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर चुनाव होना है। इसके लिए मतदान 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। चुनाव की पूरी प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी।

