बिना खेले 40 लाख में नेशनल मेडल की डील:खुफिया कैमरे में कैद खेल संघ के पदाधिकारी, बोले- विक्रम अवॉर्ड में भी होती सेटिंग

बिना खेले 40 लाख में नेशनल मेडल की डील:खुफिया कैमरे में कैद खेल संघ के पदाधिकारी, बोले- विक्रम अवॉर्ड में भी होती सेटिंग

बिना खेल खेले राज्य या राष्ट्रीय स्तर का मेडल और सर्टिफिकेट हासिल किया जा सकता है? मध्य प्रदेश में स्पोर्ट्स कोटे से सरकारी नौकरी दिलाने का दावा करने वाला एक ऐसा ही सिंडिकेट एक्टिव है। दैनिक भास्कर की एक महीने लंबी पड़ताल में खुलासा हुआ है कि सरकार से मान्यता प्राप्त खेल संघों के जिम्मेदार पदाधिकारी ही नेशनल मेडल और बैकडेट में स्टेट सर्टिफिकेट बेचने की डील कर रहे हैं। भास्कर रिपोर्टर ने अपने 13 साल के बेटे को पुलिस और छोटे भाई को आर्मी में भर्ती कराने के नाम पर विभिन्न खेल संघों के सचिवों से सीधे सौदेबाजी की। बातचीत में एक पदाधिकारी ने राष्ट्रीय स्तर का मेडल दिलाने के लिए 40 लाख रुपए तक की रकम बताई। दूसरे ने दावा किया कि उसके दिए सर्टिफिकेट के आधार पर पांच साल पहले पुलिस भर्ती में 5 से 7 अभ्यर्थियों का सिलेक्शन हुआ था, जो अब भी नौकरी कर रहे हैं। एक पदाधिकारी ने विक्रम अवॉर्ड में भी अंक बढ़वाने के लिए फर्जी सर्टिफिकेट के इस्तेमाल का दावा किया। पढ़िए, स्पोर्ट्स कोटे के सर्टिफिकेट के नाम पर कथित सौदेबाजी की पूरी पड़ताल…. इंद्रदेव शर्मा: फार्महाउस में मेडल दिलाने की पेशकश पड़ताल के दौरान रिपोर्टर ने इंदौर के कनाड़िया स्थित एक फार्महाउस में वुशू एसोसिएशन ऑफ मध्य प्रदेश (जबलपुर) के इंदौर प्रतिनिधि इंद्रदेव शर्मा से मुलाकात की। शर्मा 2007 में मंडला के खेल विभाग में दो साल काम कर चुके हैं। बातचीत में उन्होंने सितंबर 2026 में भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में हुई 25वीं राज्य स्तरीय वुशू चैंपियनशिप का बैकडेटेड सर्टिफिकेट और सिल्वर मेडल दिलाने का दावा किया। इस चैंपियनशिप का शुभारंभ खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने किया था। एसोसिएशन के अध्यक्ष आईपीएस अधिकारी जयदीप प्रसाद हैं। ‘सेक्रेटरी संभाल लेंगे, नेशनल मेडल के लिए 40 लाख’ शर्मा ने रिपोर्टर के सामने वुशू फेडरेशन के सचिव मनोज गुप्ता को फोन किया। बातचीत में उन्होंने अंडर-14 आयु वर्ग के 39 या 42 किलो भार वर्ग में एक बच्चे के लिए राज्य और राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र या मेडल दिलाने की संभावना पूछी। उन्होंने कहा कि इसके लिए जो भी खर्च होगा, दिया जाएगा। उन्होंने राज्य स्तर पर भागीदारी या मेडल वाले प्रमाणपत्र की व्यवस्था करने की बात भी कही। फोन पर बातचीत के बाद शर्मा ने रिपोर्टर से कहा कि मनोज गुप्ता काम कराने के लिए तैयार हैं। इसके बाद रिपोर्टर ने रकम और प्रोसेस के बारे में पूछा। रिपोर्टर: दोनों स्तर के सर्टिफिकेट और मेडल के लिए कितना खर्च आएगा? शर्मा: राज्य स्तर पर करीब 4-5 लाख रुपए लगेंगे। मेडल मिलने पर स्कॉलरशिप भी मिल सकती है, इसलिए उसका चार्ज ज्यादा होगा। रिपोर्टर: नेशनल मेडल के लिए कितना खर्च मानें? शर्मा: नेशनल में आने-जाने का खर्च 12-15 लाख रुपए होगा। लेकिन सेटिंग से काम कराना है तो करीब 40 लाख रुपए लगेंगे। रिपोर्टर: यह काम कौन कराएगा? शर्मा: सेक्रेटरी मनोज गुप्ता। वे सीधे बात नहीं करते। रिपोर्टर: सर्टिफिकेट कब मिलेगा? शर्मा: नेशनल का आयोजन होने के बाद। राज्य स्तर का अभी बात करके मंगवा लेंगे। रिपोर्टर: नेशनल प्रतियोगिता में जाना जरूरी होगा? शर्मा: एक बार जाकर फोटो खिंचवा लेना। विक्रम अवॉर्ड में भी फर्जी प्रमाणपत्रों से अंक बढ़ाने का दावा शर्मा ने दावा किया कि विक्रम अवॉर्ड की दौड़ में कुछ खिलाड़ी फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए अपने अंक बढ़वाते हैं। उनके मुताबिक, कुछ मामलों में पुरस्कार राशि भी आपस में बांट ली जाती है। हैंडबॉल संघ सचिव का दावा- हमारे प्रमाणपत्र से 5-7 लोग पुलिस में भर्ती पड़ताल के दौरान रिपोर्टर ने इंदौर के रामबाग में हैंडबॉल एसोसिएशन के सचिव हरदीप सिंह रूप्पल से मुलाकात की। रिपोर्टर ने अपने छोटे भाई को सेना या पुलिस में भर्ती कराने के लिए खेल प्रमाणपत्र मांगा। रूप्पल ने कहा, “मार्कशीट भेज दो, हैंडबॉल का राज्य स्तरीय सर्टिफिकेट बना दूंगा और रिकॉर्ड में दर्ज भी कर दूंगा।” वेरिफिकेशन में पकड़े जाने की आशंका जताने पर उन्होंने कहा, “कोई नहीं पकड़ सकता, क्योंकि वेरिफिकेशन की फाइल मेरे पास ही आएगी।” इसके बाद उन्होंने कुछ सुझाव दिए। रिपोर्टर: नौकरी में सर्टिफिकेट लगाने के बाद वेरिफिकेशन में कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी? रूप्पल: आपके भाई को सवालों के जवाब देने आने चाहिए। कोई पूछ सकता है कि खेल के मैदान का आकार कितना होता है? रिपोर्टर: वह जवाब दे देगा। रूप्पल: आजकल यूट्यूब का जमाना है। रिपोर्टर: चार-पांच साल नौकरी करने के बाद पकड़े जाने का खतरा तो नहीं है? रूप्पल: कोई नहीं पकड़ पाएगा। सत्यापन की फाइल मेरे पास ही आएगी। रिपोर्टर: आपके प्रमाणपत्र से नौकरी पाने वालों को कभी दिक्कत हुई? रूप्पल: कोई दिक्कत नहीं आई। मिनी गोल्फ संघ सचिव का ऑफर- सीधे राज्य स्तरीय टूर्नामेंट में एंट्री भोपाल के शासकीय नूतन स्कूल परिसर में रिपोर्टर ने मिनी गोल्फ एसोसिएशन के सचिव कौशल शिवहरे से मुलाकात की। उस समय ग्वालियर के स्पोर्ट्स टीचर राजू सेंगर भी मौजूद थे। शिवहरे ने सीधे फर्जी प्रमाणपत्र देने से इनकार किया, लेकिन रिपोर्टर को राजगढ़ जिले से ओपन टूर्नामेंट के जरिए सीधे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रवेश दिलाने की पेशकश की। जबकि एसोसिएशन के नियमों के मुताबिक, जिला और संभाग स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिए बिना राज्य स्तर पर खेलने की पात्रता नहीं मिलती। शिवहरे ने कहा, “मिनी गोल्फ धैर्य का खेल है। इसमें भागीदारी का प्रमाणपत्र भी नौकरी या कॉलेज में प्रवेश के काम आ सकता है।” खेल प्रमाणपत्रों में फर्जीवाड़े के मामले पहले भी सामने आए खेल कोटे के प्रमाणपत्रों में कथित फर्जीवाड़े के मामले दूसरे राज्यों और मध्य प्रदेश में भी सामने आ चुके हैं। इनमें कुछ मामलों में पुलिस कार्रवाई और जांच हुई है। किसे मिलता है विक्रम अवॉर्ड, क्या है चयन प्रक्रिया? विक्रम पुरस्कार मध्य प्रदेश का सर्वोच्च खेल सम्मान है। यह प्रदेश के उन वरिष्ठ खिलाड़ियों को दिया जाता है, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों में कम से कम दो साल सीनियर वर्ग की राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया हो और पदक हासिल किए हों। चयन के लिए जरूरी योग्यता इस पुरस्कार के लिए खिलाड़ी का मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना अनिवार्य है। साथ ही, उसे आवेदन वाले वर्ष से पहले लगातार पांच साल तक अपने खेल में सक्रिय रहना जरूरी है। इस अवधि में खिलाड़ी ने मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते हों या राष्ट्रीय चैंपियनशिप में शीर्ष स्थान हासिल किया हो।

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