बाया नदी पर 12 साल में नहीं बना पुल:10 गावों की 50 हजार की आबादी नाव से करती आना-जाना, बच्चों को स्कूल जाने में होती परेशानी

बाया नदी पर 12 साल में नहीं बना पुल:10 गावों की 50 हजार की आबादी नाव से करती आना-जाना, बच्चों को स्कूल जाने में होती परेशानी

समस्तीपुर में गंगा की सहायक नदी का जलस्तर बढ़ गया है। करीब 10 गावों की 50 हजार की आबादी प्रभावित है। इनके आने-जाने का साधन अभी नाव ही बचा है। खास कर स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों की परेशानी बढ़ गई है। नाव के इंतजार स्कूल कभी-कभी छूट जाती है। तीन जिलों को जोड़ने के लिए करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से इस नदी पर आरसीसी पुल का निर्माण शुरू हुआ। एक दशक से अधिक समय गुजरने के बाद यहां पर 5 पाए का ही निर्माण हुआ। वह भी अब जर्जर हो गया है। नदी जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर विद्ययापतिनगर से गुजरती है। अखाड़ा घाट पर पुल की मांग मऊ धनेशपुर के राजू कुमार बताते हैं कि वर्षों से लोग अखाड़ा घाट पर पुल की मांग कर रहे हैं। करीब 12 साल पहले पुल निर्माण शुरू हुआ तो लोगों में आश जगी कि अब लोगों का कष्ट खत्म होगा, लेकिन नदी के बीचों बीच सिर्फ पांच पाए का निर्माण करा कर छोड़ दिया गया। नदी में पानी बढ़ने के बाद स्कूल जाने वाले बच्चे काफी परेशान हैं। स्कूल जाने के लिए वह नाव पर आकर बैठे रहते हैं। जब कोई बड़ी आदमी आता है तो उसे नदी पार कराते हैं। नवम के छात्र दीपक कुमार ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द पुल का निर्माण कराया जाए।
2013 में शुरू हुआ था पुल का निर्माण 2013 में जब पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था तो लोगों को उम्मीद जगी थी कि मऊ धनेशपुर, बालकृष्णपुर मरवा, शेरपुर के लोगों का जीवन आसान हो जाएगा। लोग आसानी से इस इलाके से हरी सब्जी और अन्य आनाज विद्यापतिनर के बाजार में ला सकेंगे। लेकिन सरकारी व्यवस्था के कारण लोग ठगा महसूस कर रहे हैं। पुल का निर्माण बंद हुआ तो लोगों को जानकारी मिली कि बिना जमीन अधिग्रहण के ही पुल का निर्माण शुरू कर दिया गया था। जब जमीन के स्वामियों ने इसका विरोध किया तो पुल का निर्माण रुक गया। गलत नीति के कारण फंसा मामला मऊ धनेशपुर दक्षिण के सत्तन दान ने बताया कि सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि की गलत नीति के कारण पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। आखिर बिना जमीन अधिग्रहण किए पुल का निर्माण 2013 में कैसे शुरू किया गया। करोंड़ों रुपए खर्च करने के बाद काम को बंद किया गया। दियारा इलाके के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे काफी परेशान हैं। लंबे समय से इस इलाके के लोग पुल की आस लगाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अखाड़ा घाट पर पुल बनने से समस्तीपुर के साथ ही बेगूसराय के लोगों को लाभ मिलता। चुकी विद्यापतिनगर का इलाका खत्म होने के बाद 4 किलोमीटर बेगूसराय और फिर गंगा नदी है। वहां पर पुल बना दिया जाय तो लोग सीधा बाढ़ पहुंच जाएंगे। दोनों पुल बन जाता है तो विद्यापतिनगर से भाया पटना महज आधा घंटा में पहुंचा जा सकेगा। जबकि अभी चार से पांच घंटे का समय लगाता है।
पुल बनने से दियारे की दशा-दिशा दोनों बदल जाएगी विद्यापतिनगर का मऊ धनेशपुर दक्षिण, बालकृष्णपुर मरवा, शेरपुर के साथ ही बछबारा क्षेत्र के सैकड़ों किसान दियारे में परवल के साथ अन्य प्रकार की सब्जी की खेती करते हैं। लोग सब्जी बेचने के लिए गंगा पार कर बाढ जाते हैं। अखाड़ा घाट और चार किलोमीटर बाद गंगा नदी पर पुल बन जाय तो इस इलाके के किसान सीधा अपनी सब्जी और अनाज पटना की मंडी ले जा सकेंगे। चार घंटे पटना की दूरी आधे घंटे में बदल जाएगी।
अधिग्रहण के बाद काम शुरू होगा डीएम रोशन कुशवाहा ने कहा कि पुल निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के लिए प्रक्रिया चल रही है। भू स्वामी के लिए राशि की उपलब्धता कराई जा रही है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने पर पुल का निर्माण कार्य शुरू होगा। पुल का डीपीआर बनाने के समय ही गड़बड़ी हुई है। समस्तीपुर में गंगा की सहायक नदी का जलस्तर बढ़ गया है। करीब 10 गावों की 50 हजार की आबादी प्रभावित है। इनके आने-जाने का साधन अभी नाव ही बचा है। खास कर स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों की परेशानी बढ़ गई है। नाव के इंतजार स्कूल कभी-कभी छूट जाती है। तीन जिलों को जोड़ने के लिए करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से इस नदी पर आरसीसी पुल का निर्माण शुरू हुआ। एक दशक से अधिक समय गुजरने के बाद यहां पर 5 पाए का ही निर्माण हुआ। वह भी अब जर्जर हो गया है। नदी जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर विद्ययापतिनगर से गुजरती है। अखाड़ा घाट पर पुल की मांग मऊ धनेशपुर के राजू कुमार बताते हैं कि वर्षों से लोग अखाड़ा घाट पर पुल की मांग कर रहे हैं। करीब 12 साल पहले पुल निर्माण शुरू हुआ तो लोगों में आश जगी कि अब लोगों का कष्ट खत्म होगा, लेकिन नदी के बीचों बीच सिर्फ पांच पाए का निर्माण करा कर छोड़ दिया गया। नदी में पानी बढ़ने के बाद स्कूल जाने वाले बच्चे काफी परेशान हैं। स्कूल जाने के लिए वह नाव पर आकर बैठे रहते हैं। जब कोई बड़ी आदमी आता है तो उसे नदी पार कराते हैं। नवम के छात्र दीपक कुमार ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द पुल का निर्माण कराया जाए।
2013 में शुरू हुआ था पुल का निर्माण 2013 में जब पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था तो लोगों को उम्मीद जगी थी कि मऊ धनेशपुर, बालकृष्णपुर मरवा, शेरपुर के लोगों का जीवन आसान हो जाएगा। लोग आसानी से इस इलाके से हरी सब्जी और अन्य आनाज विद्यापतिनर के बाजार में ला सकेंगे। लेकिन सरकारी व्यवस्था के कारण लोग ठगा महसूस कर रहे हैं। पुल का निर्माण बंद हुआ तो लोगों को जानकारी मिली कि बिना जमीन अधिग्रहण के ही पुल का निर्माण शुरू कर दिया गया था। जब जमीन के स्वामियों ने इसका विरोध किया तो पुल का निर्माण रुक गया। गलत नीति के कारण फंसा मामला मऊ धनेशपुर दक्षिण के सत्तन दान ने बताया कि सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि की गलत नीति के कारण पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। आखिर बिना जमीन अधिग्रहण किए पुल का निर्माण 2013 में कैसे शुरू किया गया। करोंड़ों रुपए खर्च करने के बाद काम को बंद किया गया। दियारा इलाके के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे काफी परेशान हैं। लंबे समय से इस इलाके के लोग पुल की आस लगाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अखाड़ा घाट पर पुल बनने से समस्तीपुर के साथ ही बेगूसराय के लोगों को लाभ मिलता। चुकी विद्यापतिनगर का इलाका खत्म होने के बाद 4 किलोमीटर बेगूसराय और फिर गंगा नदी है। वहां पर पुल बना दिया जाय तो लोग सीधा बाढ़ पहुंच जाएंगे। दोनों पुल बन जाता है तो विद्यापतिनगर से भाया पटना महज आधा घंटा में पहुंचा जा सकेगा। जबकि अभी चार से पांच घंटे का समय लगाता है।
पुल बनने से दियारे की दशा-दिशा दोनों बदल जाएगी विद्यापतिनगर का मऊ धनेशपुर दक्षिण, बालकृष्णपुर मरवा, शेरपुर के साथ ही बछबारा क्षेत्र के सैकड़ों किसान दियारे में परवल के साथ अन्य प्रकार की सब्जी की खेती करते हैं। लोग सब्जी बेचने के लिए गंगा पार कर बाढ जाते हैं। अखाड़ा घाट और चार किलोमीटर बाद गंगा नदी पर पुल बन जाय तो इस इलाके के किसान सीधा अपनी सब्जी और अनाज पटना की मंडी ले जा सकेंगे। चार घंटे पटना की दूरी आधे घंटे में बदल जाएगी।
अधिग्रहण के बाद काम शुरू होगा डीएम रोशन कुशवाहा ने कहा कि पुल निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के लिए प्रक्रिया चल रही है। भू स्वामी के लिए राशि की उपलब्धता कराई जा रही है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने पर पुल का निर्माण कार्य शुरू होगा। पुल का डीपीआर बनाने के समय ही गड़बड़ी हुई है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *