शहर की आबादी को भारी वाहनों की रफ्तार और हादसों से बचाने के लिए बना बायपास अब सघन रिहायशी इलाके का हिस्सा बन चुका है। दोनों ओर तेजी से बढ़ते कमर्शियल व आवासीय निर्माण के कारण बायपास पर हर दिन जाम की स्थिति बन रही है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर निगम और प्रशासन ने 2021-22 में बायपास के दोनों ओर 32-32 किलोमीटर लंबे 4-लेन सर्विस रोड के निर्माण की योजना बनाई थी। मई 2025 में राज्य सरकार ने बायपास के दोनों ओर 45-45 मीटर कंट्रोल एरिया को डिनोटिफाइ कर 22.5 मीटर जमीन पर मिश्रित भूमि उपयोग (मिक्स्ड लैंड यूज) की मंजूरी भी दे दी। ‘मेहता एसोसिएट्स’ द्वारा दिसंबर 2024 में तैयार कराई गई 543 करोड़ रुपए की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) भी पूरी तरह तैयार है, लेकिन बजट न मिलने के कारण यह फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी है। NHAI ने खड़े किए हाथ, नगर निगम ने रोकी प्रक्रिया
निगम ने 543 करोड़ के लिए एनएचएआई को प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, अधिकारियों ने यह कहकर इनकार कर दिया कि वे पहले ही 2-लेन सर्विस रोड का निर्माण करवा चुके हैं। अब चूंकि यह क्षेत्र नगरीय सीमा में आता है, इसलिए चौड़ीकरण का वित्तीय भार नगर निगम को ही उठाना होगा। एनएचएआई के इस रुख के बाद प्रोजेक्ट की प्रगति थम गई। हाल ही में निगम ने अर्बन चैलेंज फंड से सहायता राशि के लिए नया प्रस्ताव तैयार किया है। 3 तरीके… 70% लागत खुद निकाल सकता है निगम 1. वन टाइम प्रीमियम शुल्क : जमीन मालिकों द्वारा निर्माण व ले-आउट पास कराते समय मिलने वाला रूपांतरण शुल्क।
2. अतिरिक्त एफएआर शुल्क: मिक्स्ड लैंड यूज के तहत मिलने वाले अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की अनुमति से प्राप्त राजस्व।
3. प्रॉपर्टी टैक्स में वृद्धि : सर्विस रोड बनने और कमर्शियल गतिविधियां बढ़ने से प्रॉपर्टी टैक्स स्लैब में होने वाली दीर्घकालिक बढ़ोतरी। विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्र के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ या ‘गति शक्ति योजना’ से सहायता मिले और राज्य सरकार 20 प्रतिशत का योगदान दे, तो नगर निगम स्वयं इस प्रोजेक्ट को पूरा कर सकता है। फोर-लेन सर्विस रोड बनने से इंदौर को होंगे ये 3 बड़े फायदे

