श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर भगवान बांके बिहारी की वर्ष में एक बार होने वाली मंगला आरती हुई। देर रात हुई आरती के दर्शनों के लिए भक्त लालायित नजर आए। लेकिन मंदिर परिसर में अधिक भीड़ न हो इसकी बजह से 600 लोगों को हुई मंगला आरती में शामिल होने की बांके बिहारी मंदिर हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी ने अनुमति दी थी। जन्म के बाद भगवान बांके बिहारी ने पीले रंग की जरदोजी की जड़ाऊ पोशाक धारण की। चांदी के सिंहासन पर विराजमान हुए बांके बिहारी जन्माष्टमी की रात मंदिर के सेवायतों ने भगवान बांके बिहारी का गर्भ गृह में पंचामृत अभिषेक किया। इसके बाद उनको आकर्षक पीले रंग की जरदोजी की जड़ाऊ पोशाक धारण कराई। जन्म के बाद भगवान बांके बिहारी के दर्शन अलौकिक लग रहे थे। इस दौरान भगवान बांके बिहारी जी को चांदी के सिंहासन पर विराजमान किया गया। रात 1:45 पर हुई आरती महाभिषेक के बाद भक्तों के लिए दर्शन रात 1 बजकर 40 मिनट पर खोले गए। दर्शन खुलते ही मंदिर परिसर नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल के जयकारों से गूंज उठा। 5 मिनट बाद रात करीब 1:45 पर भगवान बांके बिहारी की वर्ष में एक बार होने वाली मंगला आरती शुरू हुई। करीब दस मिनट तक हुई आरती के बाद सेवायतों ने भक्तों पर जल के छींटे डाले। पीले फूलों से की गई थी सजावट श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक तरीके से सजाया गया। पीले फूलों से की गई सजावट भक्तों का ध्यान अपनी ओर आकर्षक कर रही थी। रिमझिम बूंदों के बीच बहुत से ऐसे भक्त भी थे जो मंदिर की तरफ जाने वाले रास्ते पर दर्शनों का इंतजार कर रहे थे। मंगला आरती के दौरान भीड़ अधिक न हो इसको देखते हुए केवल 600 लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी। 2022 में जन्माष्टमी की रात मंगला आरती के दौरान हुए हादसे के बाद हर साल मंदिर प्रबंधन और प्रशासन भक्तों की संख्या सीमित रखता है।

