बांका में 150 बेल्ट्रॉन कर्मियों का मार्च:15 नवंबर तक मांगों पर फैसले का अल्टीमेटम, राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग

बांका में 150 बेल्ट्रॉन कर्मियों का मार्च:15 नवंबर तक मांगों पर फैसले का अल्टीमेटम, राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग

बांका के बेल्ट्रॉन के जरिए सरकारी विभागों में काम कर रहे डाटा एंट्री ऑपरेटरों और अन्य संविदाकर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग तेज हो गई है। रविवार को बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले करीब 150 कर्मियों ने बांका जिला मुख्यालय में विरोध मार्च निकाला। मार्च के बाद कर्मियों ने जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को मांगों का ज्ञापन सौंपा। मार्च का नेतृत्व मोर्चा अध्यक्ष सुमित कुमार और उपाध्यक्ष चंद्रेश कुमार ने किया। कर्मियों ने हाथों में मांगों से जुड़ी तख्तियां ले रखी थीं। मार्च आरएमके मैदान से शुरू होकर बालिका उच्च विद्यालय, गांधी चौक, आजाद चौक और डीएम कोठी चौक होते हुए समाहरणालय पहुंचा। यहां कर्मियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं और सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की। 29 साल से विभागों में काम कर रहे करीब 20 हजार कर्मी मोर्चा की ओर से सौंपे गए ज्ञापन के मुताबिक, बेल्ट्रॉन के माध्यम से डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, आशुलिपिक और आईटी कर्मी करीब 29 साल से राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों में काम कर रहे हैं। प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में इस समय करीब 20 हजार ऐसे कर्मी कार्यरत हैं। नियमित काम, लेकिन राज्यकर्मी का दर्जा नहीं मोर्चा का कहना है कि इन कर्मियों से नियमित और स्थायी प्रकृति का काम लिया जा रहा है, लेकिन अब तक उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा नहीं दिया गया है। कर्मियों ने राज्यकर्मी का दर्जा देने के साथ सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को इस व्यवस्था का नोडल विभाग घोषित करने की मांग की है। 15 नवंबर तक लिखित फैसले की मांग मोर्चा ने सरकार से 15 नवंबर तक मांगों पर लिखित और सकारात्मक फैसला लेने को कहा है। निर्धारित समय तक निर्णय नहीं होने पर कर्मी काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे। इसके बाद धरना, महारैली, आमरण अनशन और सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल मोर्चा ने चेतावनी दी है कि चरणबद्ध आंदोलन के बावजूद मांगें पूरी नहीं हुईं तो कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जा सकते हैं। कर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं और अब अपने लिए उचित सेवा दर्जे की मांग कर रहे हैं। बांका के बेल्ट्रॉन के जरिए सरकारी विभागों में काम कर रहे डाटा एंट्री ऑपरेटरों और अन्य संविदाकर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग तेज हो गई है। रविवार को बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले करीब 150 कर्मियों ने बांका जिला मुख्यालय में विरोध मार्च निकाला। मार्च के बाद कर्मियों ने जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को मांगों का ज्ञापन सौंपा। मार्च का नेतृत्व मोर्चा अध्यक्ष सुमित कुमार और उपाध्यक्ष चंद्रेश कुमार ने किया। कर्मियों ने हाथों में मांगों से जुड़ी तख्तियां ले रखी थीं। मार्च आरएमके मैदान से शुरू होकर बालिका उच्च विद्यालय, गांधी चौक, आजाद चौक और डीएम कोठी चौक होते हुए समाहरणालय पहुंचा। यहां कर्मियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं और सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की। 29 साल से विभागों में काम कर रहे करीब 20 हजार कर्मी मोर्चा की ओर से सौंपे गए ज्ञापन के मुताबिक, बेल्ट्रॉन के माध्यम से डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, आशुलिपिक और आईटी कर्मी करीब 29 साल से राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों में काम कर रहे हैं। प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में इस समय करीब 20 हजार ऐसे कर्मी कार्यरत हैं। नियमित काम, लेकिन राज्यकर्मी का दर्जा नहीं मोर्चा का कहना है कि इन कर्मियों से नियमित और स्थायी प्रकृति का काम लिया जा रहा है, लेकिन अब तक उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा नहीं दिया गया है। कर्मियों ने राज्यकर्मी का दर्जा देने के साथ सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को इस व्यवस्था का नोडल विभाग घोषित करने की मांग की है। 15 नवंबर तक लिखित फैसले की मांग मोर्चा ने सरकार से 15 नवंबर तक मांगों पर लिखित और सकारात्मक फैसला लेने को कहा है। निर्धारित समय तक निर्णय नहीं होने पर कर्मी काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे। इसके बाद धरना, महारैली, आमरण अनशन और सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल मोर्चा ने चेतावनी दी है कि चरणबद्ध आंदोलन के बावजूद मांगें पूरी नहीं हुईं तो कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जा सकते हैं। कर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं और अब अपने लिए उचित सेवा दर्जे की मांग कर रहे हैं।  

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