बांका जिलेभर में मंगलवार देर रात तक करमा-धरमा पर्व धूमधाम और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया। जिले के सभी 11 प्रखंडों में महिलाओं, युवतियों और छोटी बच्चियों में पर्व को लेकर उत्साह दिखा। बहनों ने भाइयों की सुख-समृद्धि, स्वस्थ जीवन और लंबी उम्र के लिए दिनभर उपवास रखा। शाम होते ही घर-आंगन में पूजा की तैयारियां शुरू हो गईं। महिलाओं और युवतियों ने विधि-विधान से गौरी-गणेश की पूजा की और करमा-धरमा की कथा सुनी। इस दौरान रुक-रुककर हल्की बारिश भी होती रही। करमा-धरमा मंडप को सभी जगहों पर दुल्हन की तरह सजाया गया था। गड्ढे को पोखर का रूप देकर बनाई गोरा-गोरी की प्रतिमाएं सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में करमा पर्व का खास महत्व है। यह त्योहार प्रकृति की पूजा के साथ भाई-बहन के प्रेम और सामाजिक एकता का संदेश भी देता है। पुरानी परंपरा के अनुसार, महिलाओं और युवतियों ने घरों के आंगन और आसपास गड्ढा बनाकर उसे पोखर का रूप दिया। इस पोखर में मिट्टी से गोरा-गोरी की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। पोखर को फूल-पत्तियों, रंगीन चित्रों और दूसरी पारंपरिक चीजों से सुंदर ढंग से सजाया गया था। कर्म डाली की पूजा कर भाइयों के लिए मांगी खुशहाली पूजा स्थल पर शाम से ही स्थानीय लोगों की भीड़ जुटने लगी। महिलाओं ने मिलकर पारंपरिक लोकगीत गाए और करमा-धरमा की कथा सुनी। पूजा के दौरान कर्म डाली की विधि-विधान से पूजा की गई। महिलाओं ने कर्म देवता से अपने भाइयों के सुखी, स्वस्थ और लंबी उम्र के जीवन की कामना की। कथा सुनने और पूजा के बाद आरती की गई। भाइयों ने बहनों को पानी से भरे गड्ढे को कराया पार पूजा के बाद पर्व से जुड़ी परंपरा के तहत भाइयों ने बहनों को पानी से भरे गड्ढे को पार कराया। इस दौरान परिवार के सदस्यों और आसपास मौजूद लोगों में काफी उत्साह देखा गया। पर्व को लेकर बच्चों में भी खास उत्साह था। कई जगहों पर बच्चे पूजा स्थल के आसपास जमा रहे और पर्व की तैयारियों में परिवार के सदस्यों की मदद करते दिखे। शाम से देर रात तक गांवों और कस्बों में पारंपरिक गीत-संगीत की गूंज सुनाई देती रही। भाई-बहन के रिश्ते और पारिवारिक सुख-शांति की कामना करमा-धरमा पर्व के दौरान जिलेभर में दिनभर धार्मिक और उत्सव का माहौल बना रहा। इस पर्व ने भाई-बहन के प्यार और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती की परंपरा को जीवित रखा। महिलाओं ने पूजा के साथ परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की भी कामना की। करमा-धरमा पर्व से जुड़ी कुछ और तस्वीरें… बांका जिलेभर में मंगलवार देर रात तक करमा-धरमा पर्व धूमधाम और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया। जिले के सभी 11 प्रखंडों में महिलाओं, युवतियों और छोटी बच्चियों में पर्व को लेकर उत्साह दिखा। बहनों ने भाइयों की सुख-समृद्धि, स्वस्थ जीवन और लंबी उम्र के लिए दिनभर उपवास रखा। शाम होते ही घर-आंगन में पूजा की तैयारियां शुरू हो गईं। महिलाओं और युवतियों ने विधि-विधान से गौरी-गणेश की पूजा की और करमा-धरमा की कथा सुनी। इस दौरान रुक-रुककर हल्की बारिश भी होती रही। करमा-धरमा मंडप को सभी जगहों पर दुल्हन की तरह सजाया गया था। गड्ढे को पोखर का रूप देकर बनाई गोरा-गोरी की प्रतिमाएं सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में करमा पर्व का खास महत्व है। यह त्योहार प्रकृति की पूजा के साथ भाई-बहन के प्रेम और सामाजिक एकता का संदेश भी देता है। पुरानी परंपरा के अनुसार, महिलाओं और युवतियों ने घरों के आंगन और आसपास गड्ढा बनाकर उसे पोखर का रूप दिया। इस पोखर में मिट्टी से गोरा-गोरी की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। पोखर को फूल-पत्तियों, रंगीन चित्रों और दूसरी पारंपरिक चीजों से सुंदर ढंग से सजाया गया था। कर्म डाली की पूजा कर भाइयों के लिए मांगी खुशहाली पूजा स्थल पर शाम से ही स्थानीय लोगों की भीड़ जुटने लगी। महिलाओं ने मिलकर पारंपरिक लोकगीत गाए और करमा-धरमा की कथा सुनी। पूजा के दौरान कर्म डाली की विधि-विधान से पूजा की गई। महिलाओं ने कर्म देवता से अपने भाइयों के सुखी, स्वस्थ और लंबी उम्र के जीवन की कामना की। कथा सुनने और पूजा के बाद आरती की गई। भाइयों ने बहनों को पानी से भरे गड्ढे को कराया पार पूजा के बाद पर्व से जुड़ी परंपरा के तहत भाइयों ने बहनों को पानी से भरे गड्ढे को पार कराया। इस दौरान परिवार के सदस्यों और आसपास मौजूद लोगों में काफी उत्साह देखा गया। पर्व को लेकर बच्चों में भी खास उत्साह था। कई जगहों पर बच्चे पूजा स्थल के आसपास जमा रहे और पर्व की तैयारियों में परिवार के सदस्यों की मदद करते दिखे। शाम से देर रात तक गांवों और कस्बों में पारंपरिक गीत-संगीत की गूंज सुनाई देती रही। भाई-बहन के रिश्ते और पारिवारिक सुख-शांति की कामना करमा-धरमा पर्व के दौरान जिलेभर में दिनभर धार्मिक और उत्सव का माहौल बना रहा। इस पर्व ने भाई-बहन के प्यार और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती की परंपरा को जीवित रखा। महिलाओं ने पूजा के साथ परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की भी कामना की। करमा-धरमा पर्व से जुड़ी कुछ और तस्वीरें…

