बलूचिस्तान में पाक सेना के कथित ड्रोन हमले से हड़कंप, तीन नागरिकों की मौत, कई घायल

बलूचिस्तान में पाक सेना के कथित ड्रोन हमले से हड़कंप, तीन नागरिकों की मौत, कई घायल

Balochistan Drone Attack: बलूचिस्तान के जियारत और केच जिलों में अलग-अलग ड्रोन हमलों में तीन आम नागरिकों की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ के मुताबिक, पहली घटना जियारत के अंजारगी इलाके में हुई, जहां एक ड्रोन हमले में एक चरवाहे की मौत हो गई और दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि चरवाहे का शव पहाड़ी इलाके में ही पड़ा है और स्थानीय प्रशासन ने अभी तक उसके शव को वहां से निकालने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

केच जिले की एक अन्य घटना में, पाकिस्तान सेना के एक ड्रोन ने कथित तौर पर दश्तुक सीमावर्ती इलाके में एक वाहन को निशाना बनाया, जिसमें दो आम नागरिकों की मौत हो गई। स्थानीय सूत्रों ने मृतकों की पहचान शाह जान और समद जान के रूप में की है।

ड्रोन और क्वाडकॉप्टर से सैन्य हमले

इन ताजा घटनाओं के साथ बलूचिस्तान में ड्रोन और क्वाडकॉप्टर ऑपरेशनों के कारण मारे जाने वाले या घायल होने वाले आम नागरिकों की संख्या और बढ़ गई है। इन लगातार लग रहे आरोपों ने सैन्य गतिविधियों से प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और आम नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए उठाए गए कदमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस महीने की शुरुआत में, मस्तंग जिले के खादकोचा इलाके में एक संदिग्ध ड्रोन हमले में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पंजगुर की एक अन्य घटना में, एक विस्फोट के कारण दो बच्चों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ के अनुसार, स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि यह विस्फोट पाकिस्तानी सेना के एक क्वाडकॉप्टर में लगे विस्फोटकों के कारण हुआ था।

पिकनिक मना रहे लोगों पर हमला, अधिकारी बोले: उग्रवादी

इससे पहले 24 सितंबर को केच जिले के बलिचा में हुए एक हमले में चार युवाओं की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हो गए थे। ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों के परिवारों का कहना है कि वे लोग वहां पिकनिक मनाने गए थे। परिवारों ने अधिकारियों द्वारा उन्हें ‘संदिग्ध उग्रवादी’ बताए जाने के दावे का कड़ा विरोध किया है।

पाकिस्तान पर जबरन लोगों को गायब करने और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हत्याएं (एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग्स) करने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं, खासकर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे मानवाधिकार समूहों ने बार-बार उन लापता कार्यकर्ताओं, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को लेकर चिंता जताई है, जिन्हें कथित तौर पर सुरक्षा एजेंसियों ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के उठा लिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *