बलरामपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रहीं आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। जिले की आशा कार्यकर्ताओं ने गुरुवार दोपहर 1 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचकर एडीएम को मुख्यमंत्री के नाम 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। उन्होंने अपनी मांगों पर विचार करने और उन्हें शासन स्तर तक पहुंचाने का अनुरोध किया। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे कई सालों से स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं में काम कर रही हैं। लेकिन उन्हें सही मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ज्ञापन में आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और हर महीने ₹26 हजार मानदेय तय करने की मुख्य मांग की गई। आशा कार्यकर्ताओं ने आने-जाने और फील्ड के काम के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी देने की मांग भी की। इसके साथ ही दुर्घटना होने पर कम से कम ₹10 लाख का बीमा और बीमा प्रमाणपत्र देने की भी मांग रखी गई। किसी आशा कार्यकर्ता की मृत्यु होने पर उसके परिवार की एक महिला सदस्य को नौकरी देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं और उनके परिवार के सदस्यों के आयुष्मान कार्ड बनवाने की मांग भी की गई। साथ ही आशाओं को मोबाइल फोन देने की भी मांग रखी गई। कार्यकर्ताओं ने बताया कि अभी कई आशाओं को अलग-अलग मदों में करीब 3 हजार, 4 हजार या 5 हजार रुपए तक का भुगतान मिल रहा है। इससे परिवार चलाना, बच्चों की पढ़ाई और दूसरे जरूरी खर्च पूरे करना मुश्किल हो रहा है। आशाओं ने आयुष्मान कार्ड बनवाने, आभा आईडी, दस्तक संचारी अभियान और सी-बैंक फॉर्म फीडिंग जैसे कई कामों का भुगतान नहीं होने की बात भी उठाई। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बाद भी उन्हें सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पाई है। ज्ञापन में यह भी बताया गया कि सरकार की ओर से पहले दिए गए मोबाइल फोन खराब हो चुके हैं। सिम का बैलेंस बंद होने से ऑनलाइन फीडिंग और विभागीय कामों में परेशानी हो रही है। आशा कार्यकर्ताओं ने मोबाइल सुविधा और सिम की व्यवस्था ठीक करने की मांग की।

