राजधानी भोपाल के बड़ा तालाब की वास्तविक सीमा, कैचमेंट क्षेत्र और संभावित अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (एनजीटी) ने सात सदस्यीय टीम बनाई है। जिसका सर्वे चौथे दिन मंगलवार को भी जारी रहा। सर्वे के दौरान कई महत्वपूर्ण स्थानों पर टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का तकनीकी एवं भौतिक निरीक्षण किया। शुरुआत मुगलिया छाप क्षेत्र में ड्रोन सर्वे से हुई। इसके बाद टीम सेंट्रल पार्क कॉलोनी पहुंची। जहां पार्क के अंतिम छोर और तालाब से लगे हिस्से का निरीक्षण किया गया। इस दौरान मौके पर मुंढेर/मुंडेरनुमा संरचनाएं एवं तालाब की पुरानी सीमा दर्शाने वाले मुनारे दिखाई दिए, जबकि पानी इन मुनारों से आगे लगभग 15 फीट तक फैला हुआ नजर आया। साथ ही पार्क के कुछ हिस्सों में पानी के भराव के भी संकेत दिखाई दिए। इससे मौके पर मौजूद जल सीमा और वर्तमान स्थिति के बीच अंतर की स्थिति सामने आई। जिसका राजस्व रिकॉर्ड, पूर्व जल सीमा और तकनीकी सर्वे के आधार पर सत्यापन किया जाना आवश्यक है। सेंट्रल पार्क के अंदर बने निर्माण भी देखे
टीम ने सेंट्रल पार्क के अंदर बने बड़े आकार के निजी निर्माण और विशाल कोठियों को भी टीम ने मौके पर देखा। तालाब की सीमा, कैचमेंट और संबंधित प्रतिबंधित क्षेत्र के संदर्भ में इन निर्माणों की वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापन किया जाना आवश्यक है। इसके बाद टीम ने बिशनखेड़ी रोड, मयंक नर्सरी के पास, गौरा सेवानिया सीमा, एसपीएस के पास, नाथू बरखेड़ा बॉर्डर पुलिया और नाथू बरखेड़ा रोड सहित अन्य क्षेत्रों का निरीक्षण किया। टीम ने इन स्थानों पर तालाब की सीमा, जलभराव क्षेत्र, निर्माण एवं संभावित अतिक्रमण की स्थिति को मौके पर जांचा। शाम 6 बजे तक सर्वे चलता रहा। सर्वे के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण बिंदू ये रहे मौजूद
इस विशेष सर्वे में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, एमपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, मध् यप्रदेश वेटलैंड अथॉरिटी, मध्य प्रदेश वन विभाग, नगर निगम भोपाल और राजस्व विभाग के प्रतिनिधियों के साथ याचिकाकर्ता एवं विशेष सदस्य राशिद नूर खान, पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडेय मौजूद रहे। MPPCB के नोडल अधिकारी नीतेश चौरसिया भी टीम के साथ मौजूद थे।

