सालों के इंतजार, डीपीआर और केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद आखिरकार बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया रेलखंड के दोहरीकरण का काम जमीन पर उतरने जा रहा है। पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कार्यालय ने करनौती से बिहारशरीफ तक 26.292 किलोमीटर लंबे पहले खंड के दोहरीकरण के लिए शनिवार को आधिकारिक ई-टेंडर जारी कर दिया। करीब 575.14 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट व कंस्ट्रक्शन) मॉडल पर पूरा किया जाएगा। इसके तहत 11.50 करोड़ रुपये की धरोहर राशि तय की गई है और 28 सितंबर को प्री-बिड कॉन्फ्रेंस के बाद 30 दिसंबर तक बोलियां जमा की जा सकेंगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी को 810 दिन यानी करीब सवा दो साल के भीतर यह कार्य पूरा करना होगा। 25 टन एक्सल लोड क्षमता और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा ट्रैक इस निर्माण कार्य के अंतर्गत अर्थवर्क, ब्लैंकेटिंग, छोटे-बड़े पुल, एलएचएस, आरयूबी, नए ट्रैक, प्लेटफॉर्म, स्टेशन भवन, फुटओवर ब्रिज और सिग्नल-टेलीकॉम सहित विद्युत उपयोगिता स्थानांतरण के सभी कार्य शामिल रहेंगे। संपूर्ण दोहरीकरण का ढांचा 25 टन प्रति एक्सल के मानक इंडियन रेलवे लोडिंग के अनुसार तैयार किया जाएगा। मार्ग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए करनौती से हरनौत के बीच वर्तमान लाइन के पश्चिम में, जबकि आगे विभिन्न हिस्सों में जरूरत के अनुसार पूर्व व पश्चिम दिशा में नई लाइन बिछाई जाएगी। इस पूरे खंड में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 31 रेल गुमटियों को अंडरपास में बदला जाएगा, जबकि हरनौत, बिहारशरीफ और राजगीर को छोड़कर अन्य स्टेशनों व हॉल्टों पर 25 नए फुटओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। कोयला ढुलाई और बुद्ध सर्किट के यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ यह रेलखंड झारखंड की खदानों से बरौनी और बाढ़ एनटीपीसी सहित कई बड़े ताप बिजली घरों व औद्योगिक इकाइयों तक कोयला पहुंचाने का प्रमुख गलियारा है, जहां से रोजाना लगभग 20 मालगाड़ियां गुजरती हैं। दोहरीकरण पूरा होने से माल ढुलाई को गति मिलने के साथ-साथ यात्री ट्रेनों की रफ्तार और समय-पालन में भी व्यापक सुधार दर्ज होगा। इस पूरे 102 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट के पूरा होने से पटना, नालंदा के अलावा गया और नवादा जैसे आकांक्षी जिलों के करीब 1434 गांवों की 13 लाख से अधिक आबादी को सीधा फायदा पहुंचेगा। साथ ही राजगीर, पावापुरी और नालंदा जैसे बुद्ध सर्किट के प्रमुख वैश्विक पर्यटन केंद्रों तक की रेल यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज हो जाएगी। सालों के इंतजार, डीपीआर और केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद आखिरकार बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया रेलखंड के दोहरीकरण का काम जमीन पर उतरने जा रहा है। पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कार्यालय ने करनौती से बिहारशरीफ तक 26.292 किलोमीटर लंबे पहले खंड के दोहरीकरण के लिए शनिवार को आधिकारिक ई-टेंडर जारी कर दिया। करीब 575.14 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट व कंस्ट्रक्शन) मॉडल पर पूरा किया जाएगा। इसके तहत 11.50 करोड़ रुपये की धरोहर राशि तय की गई है और 28 सितंबर को प्री-बिड कॉन्फ्रेंस के बाद 30 दिसंबर तक बोलियां जमा की जा सकेंगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी को 810 दिन यानी करीब सवा दो साल के भीतर यह कार्य पूरा करना होगा। 25 टन एक्सल लोड क्षमता और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा ट्रैक इस निर्माण कार्य के अंतर्गत अर्थवर्क, ब्लैंकेटिंग, छोटे-बड़े पुल, एलएचएस, आरयूबी, नए ट्रैक, प्लेटफॉर्म, स्टेशन भवन, फुटओवर ब्रिज और सिग्नल-टेलीकॉम सहित विद्युत उपयोगिता स्थानांतरण के सभी कार्य शामिल रहेंगे। संपूर्ण दोहरीकरण का ढांचा 25 टन प्रति एक्सल के मानक इंडियन रेलवे लोडिंग के अनुसार तैयार किया जाएगा। मार्ग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए करनौती से हरनौत के बीच वर्तमान लाइन के पश्चिम में, जबकि आगे विभिन्न हिस्सों में जरूरत के अनुसार पूर्व व पश्चिम दिशा में नई लाइन बिछाई जाएगी। इस पूरे खंड में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 31 रेल गुमटियों को अंडरपास में बदला जाएगा, जबकि हरनौत, बिहारशरीफ और राजगीर को छोड़कर अन्य स्टेशनों व हॉल्टों पर 25 नए फुटओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। कोयला ढुलाई और बुद्ध सर्किट के यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ यह रेलखंड झारखंड की खदानों से बरौनी और बाढ़ एनटीपीसी सहित कई बड़े ताप बिजली घरों व औद्योगिक इकाइयों तक कोयला पहुंचाने का प्रमुख गलियारा है, जहां से रोजाना लगभग 20 मालगाड़ियां गुजरती हैं। दोहरीकरण पूरा होने से माल ढुलाई को गति मिलने के साथ-साथ यात्री ट्रेनों की रफ्तार और समय-पालन में भी व्यापक सुधार दर्ज होगा। इस पूरे 102 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट के पूरा होने से पटना, नालंदा के अलावा गया और नवादा जैसे आकांक्षी जिलों के करीब 1434 गांवों की 13 लाख से अधिक आबादी को सीधा फायदा पहुंचेगा। साथ ही राजगीर, पावापुरी और नालंदा जैसे बुद्ध सर्किट के प्रमुख वैश्विक पर्यटन केंद्रों तक की रेल यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज हो जाएगी।

