Masjid Loudspeaker: पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने पर बवाल मच गया है। TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जानिए क्या है पूरा मामला…
West Bengal Masjid Loudspeaker: पश्चिम बंगाल में धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा अब अदालत के दरवाजे तक पहुंच चुका है। राज्य पुलिस द्वारा मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई के विरोध में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस संवेदनशील मामले पर हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति अतरूप बनर्जी की बेंच सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन पर बिना किसी लिखित आदेश के जल्दबाजी और मनमानी कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाया है।
4 हजार मस्जिदों से हटे स्पीकर, TMC ने जताई आपत्ति
हाईकोर्ट में पैरवी करते हुए सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि राज्य में अब तक लगभग 4,000 मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जा चुके हैं। उन्होंने 1996 के ऐतिहासिक अदालती फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने पहले ही यह स्पष्ट किया है कि निर्धारित डेसिबल आवाड का सख्ती से पालन करते हुए अजान दी जा सकती है। इसके बावजूद भी पुलिस प्रशासन बिना किसी आधिकारिक नोटिस या सार्वजनिक घोषणा के मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटवा रही है, जिससे लोगों में डर का माहौल बन रहा है।
सांसदों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, कहा- ‘कानून सबके लिए बराबर हो’
लाउडस्पीकर हटाने की इस कार्रवाई पर मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहेर खान और जंगीपुर सांसद खलीलुर रहमान ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। सांसदों ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात कर इस प्रशासनिक कार्रवाई को तुरंत रोकने की मांग की है।
सांसदों का आरोप है कि पुलिस जरूरत से ज्यादा सख्ती दिखा रही है और मस्जिद कमेटियों को बिना कोई समय दिए लाउडस्पीकर हटाने का दबाव बना रही है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि नियम-कानून का पालन हर धर्म के लिए समान रूप से होना चाहिए और किसी एक समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
आखिर क्यों शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि पुलिस बिना किसी लिखित सरकारी आदेश के मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटवा रही है। कोर्ट के नियमों के मुताबिक लाउडस्पीकर की आवाज एक तय सीमा में होनी चाहिए, लेकिन लोगों की शिकायत है कि पुलिस आवाज कम कराने के बजाय सीधे माइक और लाउडस्पीकर ही निकाल रही है। नेताओं का मानना है कि पुलिस के इस रवैये से इलाके का माहौल खराब हो सकता है।


