प्रयागराज में लगातार हो रही बारिश के बीच गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मंगलवार शाम 8 बजे बाढ़ नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटे में तीनों प्रमुख गेज स्टेशनों पर नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी छतनाग में हुई है, जहां गंगा का पानी 53 सेंटीमीटर बढ़ा है। इसके अलावा नैनी में यमुना का जलस्तर 52 सेंटीमीटर और फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 46 सेंटीमीटर बढ़ा है। छतनाग में 53 सेमी और नैनी में 52 सेमी बढ़ा जलस्तर बाढ़ नियंत्रण कक्ष की मंगलवार शाम 8 बजे की रिपोर्ट के अनुसार 17 अगस्त की शाम 8 बजे छतनाग में गंगा का जलस्तर 78.39 मीटर था। 24 घंटे बाद मंगलवार शाम 8 बजे यह बढ़कर 78.92 मीटर पहुंच गया। यानी एक दिन में 53 सेंटीमीटर पानी बढ़ा। नैनी में यमुना का जलस्तर 78.83 मीटर से बढ़कर 79.35 मीटर पहुंच गया। यहां 52 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। फाफामऊ में गंगा का जलस्तर सोमवार शाम 8 बजे 79.65 मीटर था, जो मंगलवार शाम 8 बजे बढ़कर 80.11 मीटर पहुंच गया। यहां 24 घंटे में 46 सेंटीमीटर पानी बढ़ा है। लगातार बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में हो रही इस तेजी से बढ़ोतरी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सुबह 8 बजे तक 100 मिमी से ज्यादा बारिश मंगलवार सुबह 8 बजे जारी बाढ़ नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटे में प्रयागराज के नदी तटीय इलाकों में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। छतनाग में 115 मिलीमीटर, नैनी में 98.4 मिलीमीटर और फाफामऊ में 96.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। बारिश का सीधा असर गंगा और यमुना के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है। शाम 8 बजे की रिपोर्ट में नैनी में यमुना 79.35 मीटर, फाफामऊ में गंगा 80.11 मीटर और छतनाग में गंगा 78.92 मीटर पर पहुंच गई। यानी तीनों स्थानों पर सुबह के मुकाबले भी पानी बढ़ा है। खतरे के निशान से अभी नीचे, सभी तटबंध सुरक्षित हालांकि गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल तीनों प्रमुख गेज स्टेशनों पर पानी खतरे के निशान 84.734 मीटर से नीचे है। फाफामऊ में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 4.624 मीटर नीचे है। नैनी में यमुना करीब 5.384 मीटर और छतनाग में गंगा करीब 5.814 मीटर नीचे बह रही है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार सभी तटबंध सुरक्षित हैं। प्रशासन की ओर से नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। लगातार बारिश और जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

