तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से राजद समर्थित प्रत्याशी डॉ. रश्मि गौतम ने गुरुवार को नानपुर प्रखंड के सफिकपुर में शिक्षकों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने वर्तमान एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी और सांसद देवेश चंद्र ठाकुर पर सवाल उठाए। उन्होंने शिक्षकों के हितों, विकास कार्यों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया। ‘शिक्षकों से सहानुभूति लेकर वोट लिया’ डॉ. रश्मि गौतम ने आरोप लगाया कि बंशीधर ब्रजवासी ने शिक्षकों के सामने रोकर अपनी बात रखी और सहानुभूति हासिल कर वोट लिया, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनके हितों के लिए काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक आज भी अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर परेशान हैं, जबकि उनके प्रतिनिधि को उनकी आवाज उठानी चाहिए थी। ‘दो साल में सिर्फ एफआईआर-एफआईआर का खेल’ बंशीधर ब्रजवासी के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए डॉ. गौतम ने कहा कि दो साल में सिर्फ एफआईआर-एफआईआर का खेल चला है। उनके अनुसार, छात्र हों या शिक्षक, किसी की समस्या का ठोस समाधान नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षकों से सहानुभूति और चंदा लेकर चुनाव जीतने के बाद अगड़ा-पिछड़ा की राजनीति की जाती है। देवेश चंद्र ठाकुर से विकास कार्यों का हिसाब मांगा डॉ. गौतम ने सांसद देवेश चंद्र ठाकुर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो लोग उनके ससुर से चुनाव जीतते रहे, उन्होंने चुनाव जीतने के बाद वेतन नहीं लेने की बात कही थी। उन्होंने सवाल किया कि वेतन नहीं लेने के बावजूद पूरे फंड का इस्तेमाल कहां हुआ और विकास कार्यों पर कितना खर्च किया गया। युवाओं के लिए लाइब्रेरी बनाने पर भी सवाल डॉ. गौतम ने तिरहुत क्षेत्र में युवाओं और शिक्षकों के बच्चों के भविष्य का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्षेत्र के कितने कॉलेजों या इलाकों में युवाओं के लिए लाइब्रेरी बनवाई गईं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को चुनाव जीतने के बाद भी जनता, शिक्षकों और छात्रों के हितों के लिए काम करना चाहिए। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से राजद समर्थित प्रत्याशी डॉ. रश्मि गौतम ने गुरुवार को नानपुर प्रखंड के सफिकपुर में शिक्षकों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने वर्तमान एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी और सांसद देवेश चंद्र ठाकुर पर सवाल उठाए। उन्होंने शिक्षकों के हितों, विकास कार्यों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया। ‘शिक्षकों से सहानुभूति लेकर वोट लिया’ डॉ. रश्मि गौतम ने आरोप लगाया कि बंशीधर ब्रजवासी ने शिक्षकों के सामने रोकर अपनी बात रखी और सहानुभूति हासिल कर वोट लिया, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनके हितों के लिए काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक आज भी अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर परेशान हैं, जबकि उनके प्रतिनिधि को उनकी आवाज उठानी चाहिए थी। ‘दो साल में सिर्फ एफआईआर-एफआईआर का खेल’ बंशीधर ब्रजवासी के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए डॉ. गौतम ने कहा कि दो साल में सिर्फ एफआईआर-एफआईआर का खेल चला है। उनके अनुसार, छात्र हों या शिक्षक, किसी की समस्या का ठोस समाधान नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षकों से सहानुभूति और चंदा लेकर चुनाव जीतने के बाद अगड़ा-पिछड़ा की राजनीति की जाती है। देवेश चंद्र ठाकुर से विकास कार्यों का हिसाब मांगा डॉ. गौतम ने सांसद देवेश चंद्र ठाकुर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो लोग उनके ससुर से चुनाव जीतते रहे, उन्होंने चुनाव जीतने के बाद वेतन नहीं लेने की बात कही थी। उन्होंने सवाल किया कि वेतन नहीं लेने के बावजूद पूरे फंड का इस्तेमाल कहां हुआ और विकास कार्यों पर कितना खर्च किया गया। युवाओं के लिए लाइब्रेरी बनाने पर भी सवाल डॉ. गौतम ने तिरहुत क्षेत्र में युवाओं और शिक्षकों के बच्चों के भविष्य का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्षेत्र के कितने कॉलेजों या इलाकों में युवाओं के लिए लाइब्रेरी बनवाई गईं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को चुनाव जीतने के बाद भी जनता, शिक्षकों और छात्रों के हितों के लिए काम करना चाहिए।

