पैरों में छाले, जुबां पर जयकारे:100 किमी दूर आवरीमाता के दरबार नंगे पैर निकले 35 यात्री

पैरों में छाले, जुबां पर जयकारे:100 किमी दूर आवरीमाता के दरबार नंगे पैर निकले 35 यात्री

शहर के भोईवाड़ा से चित्तौड़गढ़ के निकुंभ स्थित आवरी माताजी मंदिर के लिए गुरुवार को पदयात्रा रवाना हुई। करीब 40 वर्षों से चली आ रही पारंपरिक पदयात्रा इस बार भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रवाना हुई। विश्व में सुख-समृद्धि, जनकल्याण और भाईचारे की कामना को लेकर निकले जत्थे में 12 साल के बच्चों से लेकर 54 साल के बुजुर्गों तक कुल 35 युवा शामिल हैं। गुरुवार दोपहर 12:15 बजे अभिजीत मुहूर्त में 15 फीट ऊंची धर्म ध्वजा के पूजन के साथ पदयात्रा की शुरुआत हुई। वरिष्ठ पदयात्री अनिल माली, सुरेंद्र सिंह और विनोद वर्मा के सान्निध्य में रवाना हुआ जत्था शक्तिनगर होते हुए बोहरा गणेशजी मंदिर पहुंचा। यहां प्रथम पूज्य गणेशजी के दर्शन के बाद यात्रा आगे बढ़ी। पैरों में छाले, जुबां पर जयकारे… 100 किमी का सफर नंगे पैर : करीब 100 किमी के इस कठिन पैदल सफर में युवाओं को न पैरों के छालों की चिंता है और न थकान की। प्रशांत माली, मनोज, कुलदीप, प्रिंस, रौनक और अजय सहित पूरी भक्त मंडली नंगे पैर मातारानी के भजनों और जयकारों के बीच आगे बढ़ रही है। रास्ते में भजनों की धुन पर झूमती युवाओं की टोली यात्रा के प्रति उनकी गहरी आस्था का संदेश दे रही है। निजी मन्नत नहीं, विश्व कल्याण की कामना पदयात्रा में शामिल प्रशांत माली ने बताया कि आज के दौर में अधिकांश लोग अपनी निजी इच्छाओं के लिए प्रार्थना करते हैं, लेकिन भोईवाड़ा के युवाओं का यह समूह पिछले 40 वर्षों से विश्व के जनकल्याण, खुशहाली और भाईचारे की कामना लेकर यह कठिन यात्रा कर रहा है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही यह आस्था समय के साथ और मजबूत होती जा रही है। बुजुर्गों से मिली विरासत, अब हमारी जिम्मेदारी मनोज माली ने कहा कि यह सिर्फ पदयात्रा नहीं, बल्कि बुजुर्गों से मिली ऐसी विरासत है, जिसे नई पीढ़ी सहेज रही है। जब से होश संभाला, माता-पिता और वरिष्ठों को धर्म ध्वजा बारी-बारी से उठाकर यात्रा करते देखा है। अब उसी परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हमारी है। पैरों के छाले और 100 किमी की दूरी माता के जयकारों के आगे छोटी लगती है। 4 दिन का सफर… यहां पड़ाव, यहां पहुंचेगा जत्था पहला पड़ाव, गुरुवार : भोईवाड़ा से रवाना होकर बोहरा गणेशजी के दर्शन। इसके बाद मालेश्वर महादेव (वाना) में रात्रि विश्राम। दूसरा पड़ाव, शुक्रवार : सुबह वाना से रवाना होकर मंगलवाड़ और चिकारड़ा होते हुए आकोला खुर्द पहुंचेंगे। यहां काबरा भैरूजी में रात्रि विश्राम होगा। तीसरा पड़ाव, शनिवार : सुबह आकोला खुर्द से रवाना होकर आवरी माताजी धाम पहुंचेंगे। महाउत्सव, रविवार : नवरात्रि स्थापना के अवसर पर सुबह 9:15 बजे द्वितीय आरती के समय धर्म ध्वजा अर्पित की जाएगी।

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