लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय की ओर से सोमवार कों ‘पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम-2026’ के पांचवें दिन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. नीरज राय ने पुरातत्व और आधुनिक विज्ञान के जरिए मानव अतीत को समझने के तरीके बताए। डॉ. राय ने ‘बियॉन्ड आर्टिफैक्ट्स: अंडरस्टैंडिंग द ह्यूमन पास्ट थ्रू आर्कियोलॉजिकल साइंस’ विषय पर सचित्र व्याख्यान दिया। उन्होंने प्राचीन डीएनए और पुरातात्त्विक साक्ष्यों के जरिए मानव इतिहास को समझने की वैज्ञानिक प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि मानव इतिहास केवल लिखित दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। मानव अस्थियां, जीवाश्म, प्राचीन उपकरण, आवासीय अवशेष और आनुवंशिक सामग्री भी अतीत की महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं। डीएनए अध्ययन से पता लगाने में भी मदद मिलती है डॉ. राय ने कहा कि प्राचीन डीएनए और पुरातात्त्विक साक्ष्यों को साथ रखकर प्राचीन मानव समुदायों के उद्गम, विकास और उनके एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में फैलाव को ज्यादा प्रमाणिक तरीके से समझा जा सकता है। उन्होंने बताया कि डीएनए अध्ययन से यह पता लगाने में भी मदद मिलती है कि किसी पुरास्थल से मिली मानव अस्थियां वहां की स्थानीय आबादी से जुड़ी थीं या दूसरे क्षेत्रों से आए लोगों की थीं। डीएनए विश्लेषण पर विस्तार से जानकारी दी मानव समाधियों और अस्थि अवशेषों के डीएनए विश्लेषण पर भी उन्होंने विस्तार से जानकारी दी। इससे प्राचीन आबादी की आनुवंशिक संबद्धता, प्रवासन और जनसंख्या के बदलावों को समझने में मदद मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्राचीन मानव समूहों ने अलग-अलग पर्यावरणीय और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार खुद को कैसे ढाला और समय के साथ विभिन्न क्षेत्रों में कैसे पहुंचे। प्राचीन डीएनए से जुड़े सवाल पूछे कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने विषय में काफी रुचि दिखाई। प्रश्नोत्तर सत्र में उन्होंने वैज्ञानिक पद्धतियों और प्राचीन डीएनए से जुड़े सवाल पूछे। कार्यक्रम में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से बड़ी संख्या में प्रतिभागी जुड़े। इस मौके पर विभाग की निदेशक रेनू द्विवेदी ने डॉ. नीरज राय का स्वागत किया। अधिकारी दीपा जोशी और सहायक पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने पौधा और स्मृति-चिह्न देकर उनका सम्मान किया।

