बाढ़ प्रभावित इलाकों में बनाए गए आश्रय स्थल पीड़ितों के लिए आपदा में मुफीद ठिकाने बनते हैं। पर ये आश्रय स्थल खुद ही बदहाल हैं। इनकी पड़ताल की गई तो इनकी हालत चौंकाने वाली आई। ज्यादातर के खिड़की-दरवाजे उखड़ चुके हैं। प्लास्टर झड़ रहे हैं। एक में तो पुलिस ओपी खोल दिया गया है, तो वहीं एक में बाढ़ पीड़ित एक बार आकर जमे तो वह उनका स्थायी ठिकाना ही बन गया। बेगूसराय में आश्रय के लिए चिह्नित टीले खुद ही बाढ़ में डूब गए। ऐसे में बाढ़ पीड़ितों के लिए ठहरने के लिए कोई समुचित व्यवस्थान नहीं बची है। कई क्षेत्रों में आश्रय स्थलों की जांच के बाद ये बात सामने आई है। आइए जानते हैं कुछ प्रमुख आश्रय स्थलों का हाल… खिड़की-दरवाजे उखड़ चुके, कहीं पुलिस ओपी खुला तो कहीं मवेशी बांधे जा रहे सोनवर्षा राज : शौचालय और रसोई के दरवाजे तक चोरी 2009 में निर्मित 11 बाढ़ आश्रय स्थल अतिक्रमण, गंदगी और टूट-फूट के शिकार हैं। खजुराहा पंचायत का आश्रय स्थल झाड़ियों से घिरा है, जबकि लगमा पंचायत का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। पड़रिया पंचायत के मैना स्थित बाढ़ आश्रय स्थल के महिला व पुरुष शौचालय, रसोईघर और पशु शेड पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। शौचालय और रसोई के दरवाजे चोरी हो चुके हैं। मधेपुरा : छज्जे टूटकर गिर रहे, खिड़कियां और चौखट गायब मधेपुरा जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए बाढ़ आश्रय स्थल और पशुशरण स्थली में बुनियादी सुविधाएं ही नहीं हैं। बिहारीगंज प्रखंड के गोरपार स्थित बाढ़ आश्रय स्थल की स्थिति खराब है। 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान भवन की मरम्मत और रंग-रोगन कराया गया था। अभी रखरखाव नहीं हो रहा है। छज्जे टूटकर गिरने लगे हैं। खिड़कियां और चौखट गायब हैं। पूर्णिया : तत्काल राहत के लिए बना था, स्थायी ठिकाना बना अमौर की हफनियां पंचायत स्थित बाढ़ आश्रय स्थल में खाड़ी महीनगांव ओपी चल रहा है। खाड़ी महीनगांव पंचायत में बना दूसरा बाढ़ आश्रय स्थल आबादी से दूर है। मकैली पंचायत के गेहुआ स्थित केंद्र तक पहुंचने के लिए कच्ची सड़क है। देखरेख के लिए किसी कर्मी की प्रतिनियुक्ति नहीं है। बैसा प्रखंड के सिरसी गांव में बने बाढ़ आश्रय स्थल में वर्षों से बाढ़ से विस्थापित परिवार रह रहे हैं। बेगूसराय : बाढ़ आश्रय टीले खुद ही बाढ़ में डूब गए बाढ़ प्रभावित लोगों के ठहरने के लिए बनाए गए आश्रय स्थल खुद ही डूब गए हैं। बेगूसराय में चमथा दियारा के दादूपुर, बिशनपुर, चमथा-1, चमथा-2 और चमथा-3 पंचायतों में बाढ़ के दौरान एक भी आश्रय टीला नहीं बचा, जहां प्रभावित परिवार शरण ले सके। कागज पर कई बाढ़ आश्रय टीले बने हैं, पर वहां अभी पानी नजर आ रहा है, लेकिन आश्रय टीले का कहीं पता नहीं है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बनाए गए आश्रय स्थल पीड़ितों के लिए आपदा में मुफीद ठिकाने बनते हैं। पर ये आश्रय स्थल खुद ही बदहाल हैं। इनकी पड़ताल की गई तो इनकी हालत चौंकाने वाली आई। ज्यादातर के खिड़की-दरवाजे उखड़ चुके हैं। प्लास्टर झड़ रहे हैं। एक में तो पुलिस ओपी खोल दिया गया है, तो वहीं एक में बाढ़ पीड़ित एक बार आकर जमे तो वह उनका स्थायी ठिकाना ही बन गया। बेगूसराय में आश्रय के लिए चिह्नित टीले खुद ही बाढ़ में डूब गए। ऐसे में बाढ़ पीड़ितों के लिए ठहरने के लिए कोई समुचित व्यवस्थान नहीं बची है। कई क्षेत्रों में आश्रय स्थलों की जांच के बाद ये बात सामने आई है। आइए जानते हैं कुछ प्रमुख आश्रय स्थलों का हाल… खिड़की-दरवाजे उखड़ चुके, कहीं पुलिस ओपी खुला तो कहीं मवेशी बांधे जा रहे सोनवर्षा राज : शौचालय और रसोई के दरवाजे तक चोरी 2009 में निर्मित 11 बाढ़ आश्रय स्थल अतिक्रमण, गंदगी और टूट-फूट के शिकार हैं। खजुराहा पंचायत का आश्रय स्थल झाड़ियों से घिरा है, जबकि लगमा पंचायत का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। पड़रिया पंचायत के मैना स्थित बाढ़ आश्रय स्थल के महिला व पुरुष शौचालय, रसोईघर और पशु शेड पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। शौचालय और रसोई के दरवाजे चोरी हो चुके हैं। मधेपुरा : छज्जे टूटकर गिर रहे, खिड़कियां और चौखट गायब मधेपुरा जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए बाढ़ आश्रय स्थल और पशुशरण स्थली में बुनियादी सुविधाएं ही नहीं हैं। बिहारीगंज प्रखंड के गोरपार स्थित बाढ़ आश्रय स्थल की स्थिति खराब है। 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान भवन की मरम्मत और रंग-रोगन कराया गया था। अभी रखरखाव नहीं हो रहा है। छज्जे टूटकर गिरने लगे हैं। खिड़कियां और चौखट गायब हैं। पूर्णिया : तत्काल राहत के लिए बना था, स्थायी ठिकाना बना अमौर की हफनियां पंचायत स्थित बाढ़ आश्रय स्थल में खाड़ी महीनगांव ओपी चल रहा है। खाड़ी महीनगांव पंचायत में बना दूसरा बाढ़ आश्रय स्थल आबादी से दूर है। मकैली पंचायत के गेहुआ स्थित केंद्र तक पहुंचने के लिए कच्ची सड़क है। देखरेख के लिए किसी कर्मी की प्रतिनियुक्ति नहीं है। बैसा प्रखंड के सिरसी गांव में बने बाढ़ आश्रय स्थल में वर्षों से बाढ़ से विस्थापित परिवार रह रहे हैं। बेगूसराय : बाढ़ आश्रय टीले खुद ही बाढ़ में डूब गए बाढ़ प्रभावित लोगों के ठहरने के लिए बनाए गए आश्रय स्थल खुद ही डूब गए हैं। बेगूसराय में चमथा दियारा के दादूपुर, बिशनपुर, चमथा-1, चमथा-2 और चमथा-3 पंचायतों में बाढ़ के दौरान एक भी आश्रय टीला नहीं बचा, जहां प्रभावित परिवार शरण ले सके। कागज पर कई बाढ़ आश्रय टीले बने हैं, पर वहां अभी पानी नजर आ रहा है, लेकिन आश्रय टीले का कहीं पता नहीं है।

